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नयी दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली में सभी मोहल्ला क्लीनिक बंद करने की तैयारी है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर इसकी सूचना दी। फिलहाल जो मोहल्ला क्लीनिक किसी सरकारी डिस्पेंसरी, मैटरनिटी होम, नगर निगम क्लीनिक और नए बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (Ayushman Arogya Mandir) के एक किलोमीटर के दायरे में आते हैं, उन्हें बंद किया जाएगा। अभी यह निर्देश 170 ऐसे मोहल्ला क्लीनिकों (Mohalla Clinics) के लिए है, जो पोर्टा केबिनों और किराये पर चल रहे क्लीनिकों में हैं। दिल्ली में फिलहाल 168 आयुष्मान मंदिर हैं। जबकि योजना के तहत हर वार्ड में चार से पांच और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 15 आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे।
केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर दिल्ली में नई हेल्थ स्कीम आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू की है। इसके तहत पुरानी डिस्पेंसरी को बदलकर आरोग्य मंदिर बनाया जा रहा है। कुछ जगहों पर सामुदायिक सेंटर और बारात घर को भी आरोग्य मंदिर में बदलने की योजना है। पहले चरण में 33 सेंटर खुल चुके हैं और स्टाफ की भर्ती भी पूरी हो गई है। इस स्टाफ को दिल्ली के आरएमएल और एम्स (RML and AIIMS) जैसे अस्पतालों से लिया गया है। वहीं मोहल्ला क्लीनिक के कर्मचारी इस भर्ती प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।

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मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत साल 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने की थी. इस मॉडल को सस्ती व नजदीकी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दुनिया भर में सराहा गया था. ऐसी कई रिपोर्ट्स हैं, जो कहती हैं कि इनसे गरीब और मध्यम वर्ग को काफी फायदा मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनसे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी पर बोझ लगभग 20 प्रतिशत घटा था।
मोहल्ला क्लीनिक बंद करने की जरूरत क्यों? - Why the need to close Mohalla Clinics?
दिल्ली की नई सरकार की ओर से कहा गया है कि मोहल्ला क्लीनिक जहां केवल मुफ्त प्राथमिक उपचार और दवाएं उपलब्ध कराते थे। वहीं आरोग्य मंदिर में प्राथमिक इलाज के साथ विशेषज्ञ परामर्श (specialist consultations), टीकाकरण (vaccinations,), लैब जांच, मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य (maternal and child health) सेवाएं भी मुहैया कराएंगे।
इसी साल हुए चुनावों के बाद दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी। मुख्यमंत्री बनीं रेखा गुप्ता ने कई बार आरोप लगाया कि मोहल्ला क्लीनिक भ्रष्टाचार का केंद्र हैं और पैसा उगाही का माध्यम बन गए हैं। कई नालों और गंदी जगहों पर क्लीनिक बनाने के लिए पोर्टा केबिन लगाए गए थे। अब दिल्ली सरकार इन्हें हटाने की योजना बना रही है।
आरोग्य मंदिर में काम चाह रहे मोहल्ला क्लीनिक के कर्मचारी Mohalla Clinic Employees Seeking Work at Arogya Mandir
पश्चिम विहार का एक मोहल्ला क्लीनिक बंद किए जाने वाले क्लीनिकों की लिस्ट में शामिल है। हर क्लीनिक में चार लोगों का स्टाफ होता है। यहां मेडिकल सहायक मोनिका पिछले छह साल से काम कर रही हैं। उनके जैसे अधिकतर कर्मचारियों ने साल 2019 में लिखित परीक्षा पास की थी। इन्हें साल 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया है।
मोहल्ला क्लीनिक में वेतन हर दिन के हिसाब से मिलता है। एक मरीज को देखने के लिए डॉक्टर (मेडिकल ऑफिसर) को 40 रूपए, मल्टी-पर्पस वर्कर (एमपीडब्ल्यू) को आठ रूपए, फार्मासिस्ट को 12 रूपए और मेडिकल सहायक को 10 रूपए मिलते हैं. एक दिन में वे अधिकतम 120 मरीज ही देख सकते हैं। जबकि कुछ साल पहले तक ऐसी कोई लिमिट नहीं थी।
कर्मचारियों ने डीडब्ल्यू को बताया कि उन्हें स्वास्थ्य बीमा या मैटरनिटी बेनिफिट नहीं मिलता। रविवार, त्योहार या डॉक्टर की छुट्टी के दिन क्लीनिक बंद रहता है। उन दिनों का भुगतान किसी भी कर्मचारी को नहीं दिया जाता। उन्हें कोई एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट भी नहीं मिलता जिसे दिखाकर वे कहीं और नौकरी ढूंढ सकें।







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