











































प्रतीकात्मक चित्र
अच्छी नींद हर इंसान की जरूरत है, लेकिन हर इंसान एक तरीके से नहीं सोता। रिसर्च बताते हैं कि ना केवल महिलाओं के सोने का तरीका पुरुषों से काफी अलग होता है, बल्कि पुरुषों के मुकाबले उन्हें ज्यादा नींद की भी जरूरत है।
जर्मनी (German) के प्रसिद्द न्यूज़ पोर्टल डीडब्ल्यू ने दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं से बात की। कमोबेश सभी महिलाओं ने बताया कि वे जितना सो पाती हैं, वह उन्हें पर्याप्त महसूस नहीं होता. उन्होंने यह भी बताया कि कथित "स्लीप डेट" का उनपर क्या असर पड़ता है। आपके शरीर को जितनी नींद (sleep) चाहिए और आप जितनी देर सो पाती हैं, उनके बीच का कुल जमा अंतर "स्लीप डेट" कहा जाता है।
सना अखंद, न्यूयॉर्क (New York) की एक टेक कंपनी में नौकरी करती थीं। वह एचआर विभाग की प्रमुख थीं। सना ने बताया कि नौकरी करते हुए वह हमेशा थकान महसूस करती थीं। उन्हें समझ आया कि इससे उनकी मानसिक सेहत (mental health) पर भी असर पड़ रहा है। आखिरकार, थक-हारकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
सना ने डीडब्ल्यू को बताया, "मैं हर रात वाइन (wine) लेकर टीवी (TV) के सामने बैठ जाती थी और वहीं सो जाती थी। मैं बहुत थक चुकी थी। मुझमें बिलकुल भी ताकत नहीं बची थी।"
सेहतमंद (healthy) महसूस करने के लिए अब सना नींद को सबसे ज्यादा अहमियत देती हैं। उन्होंने बच्चे ना करने का फैसला किया और अच्छी नींद भी इसकी एक वजह है। वह हर रात 10 बजे सो जाती हैं और नौ घंटे की नींद लेती हैं। सना बताती हैं कि वह अपनी नींद से कोई समझौता नहीं कर सकती हैं, "मैं हर सुबह आठ बजे उठती हूं। मेरे शरीर को इसकी जरूरत है।"
इस बारे में विज्ञान क्या कहता है? - What does science say about this?
औसतन, महिलाएं (women) हर रात पुरुषों के मुकाबले करीब 11 से 13 मिनट ज्यादा सोती हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार, महिलाओं को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के मुश्किल कामों, जैसे कि एक साथ कई काम करना, भावनाओं को नियंत्रित करना या हार्मोनल संतुलन बनाना और पीरियड्स वगैरह में खुद को संभालने के लिए 20 मिनट तक की अतिरिक्त नींद चाहिए।
पीरियड्स (menstruation) के शुरुआती आधे हिस्से (फॉलिक्युलर फेज) में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही, आरईएम नींद यानी वह अवस्था जिसमें सपने आते हैं और याददाश्त, भावनाएं मजबूत होती हैं, वह भी बढ़ जाती है।

पीरियड्स के दूसरे हिस्से, यानी ल्यूटियल फेज (luteal phase) में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है। यह महिलाओं को सुस्त और उनींदा महसूस कराता है। मगर विरोधाभास यह दिखता है कि इस दौरान नींद की गुणवत्ता घट जाती है। बार-बार नींद टूटती है और गहरी नींद में करीब 27 फीसदी तक की कमी आ जाती है।
बॉडी इंटेलिजेंस कोच, शांतनी मूर ने डीडब्ल्यू को बताया कि वह अपने पीरियड्स और नींद के अनुसार अपनी दिनचर्या को तय करती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने बहुत सोच-समझकर अपनी जिंदगी में यह तरीका अपनाया है। जब मेरी नींद पूरी नहीं होती है, तो बहुत थकान और बेचैन महसूस होती है। इससे ध्यान लगाने में दिक्कत होती है। गलत फैसले लेने लगती हूं। अपने पार्टनर को झिड़क देती हूं. उन चीजों के लिए 'हां' कहने लगती हूं, जिसके लिए नहीं कहना चाहिए था।"







हुज़ैफ़ा अबरार June 30 2026 0 301
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4606
एस. के. राणा January 20 2026 0 4445
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4403
एस. के. राणा January 13 2026 0 4284
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4151
एस. के. राणा February 01 2026 0 3780
एस. के. राणा February 04 2026 0 3640
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86700
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34581
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37796
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35322
लेख विभाग March 19 2022 0 34853
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72238
वा जारी रखने की जरूरत होती है जब तक कि आपका डॉक्टर इसे बंद करने के लिए न कहे। इसलिए टीबी से डरें नही
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि भले ही कुछ लोगों में इस टीके ने प्रभावी ढंग से काम किया है लेकिन वा
सर्दियों के मौसम में बच्चों की सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस मौसम में सर्दी-जुखाम, खां
धूम्रपान निषेध दिवस पर डॉक्टरों, कैंसर पीड़ितों और होटल चलाने वाले लोगों ने केंद्र सरकार से होटलों,
मुख्यमंत्री ने आला अधिकारियों को डेंगू समेत अन्य संचारी रोगों के प्रति सावधानी बरतने के निर्देश दिए
साइंस एडवांस्ड में प्रकाशित एक अध्ययन की माने तो भारत के ज़्यादातर बड़े शहर वायु-प्रदूषण के कारण श्मशा
सम्पूर्ण विश्व की फेफड़े से जुड़ी संस्थायें ’’विश्व फेफड़ा दिवस’’ यानि ’’वर्ल्ड लंग डे’’ मना रही हैं और
सीआरसी -लखनऊ एवं हीमोफ़िलीया सोसाइटी लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व हीमोफ़िलीया दिवस 2022 के अव
डेंगू के एक मरीज को कथित तौर पर प्लाज्मा की जगह मीठा नींबू का रस (मौसमी जूस) दिया गया। इससे उसकी मौत

COMMENTS