देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

भारत में तेजी से पैर पसार रहा है, लंग कैंसर

फेफड़ों के कैंसर के लिए अब तक देश में कोई राष्ट्रीय जांच कार्यक्रम नहीं होने की वजह से जागरूकता ही लोगों को इस बीमारी से बचा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खांसी होने, सीने में दर्द, मुंह से खून निकलने, थोड़ा सा चलने या सीढ़ी चढ़ने से सांस फूलना और भूख में कमी के साथ ही वजन में गिरावट जैसे लक्षणों को देख कर सचेत हो जाना चाहिए।

एस. के. राणा
December 07 2025 Updated: December 07 2025 22:19
0 6937
भारत में तेजी से पैर पसार रहा है, लंग कैंसर  प्रतीकात्मक चित्र

नयी दिल्ली। भारत में लंग कैंसर तेजी से फ़ैल रही गंभीर बीमारी है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के आखिर तक भारत में लंग कैंसर के मरीजों की संख्या करीब 81 हजार तक पहुंच जाएगी। यहां हर 74 लोगों में से एक को इस बीमारी का खतरा है। इस बीमारी से होने वाली सालाना मौतों की संख्या 60 हजार तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात यह है कि करीब 80 फीसदी लोगों में इस बीमारी का पता तीसरे या चौथे चरण में लगता है। उस स्थिति में इसका इलाज संभव नहीं है। यही वजह है कि इससे होने वाली मौतों का तादाद साल दर साल बढ़ रही है। देश के हर हिस्से में इस बीमारी का प्रकोप समान नहीं हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में यह दर ज्यादा है। उनके मुकाबले मध्य और पश्चिम भारत में मरीजों की तादाद कुछ कम है। देश में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में लंग कैंसर का हिस्सा करीब आठ फीसदी है। ज्यादातर मरीजों में इस बीमारी का पता तीसरे या चौथे चरण में चलने के कारण मृत्यु दर 80 से 90 फीसदी तक है।

महिला मरीजों में बढ़ रहा लंग कैंसर की बीमारी - Lung cancer increasing among female patients
विशेषज्ञों का कहना है कि अब लंग कैंसर के जो नए मामले सामने आ रहे हैं उनमें हर चार से में एक मरीज ऐसा होता है जिसने कभी धूम्रपान नहीं किया है। पहले इस रोग का धूम्रपान से सीधा संबंध माना जाता था। लेकिन हालिया अध्ययन रिपोर्ट और विशेषज्ञों का कहना है कि यह पारंपरिक धारणा अब बदल रही है। महिला मरीजों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है। धूम्रपान के लंग कैंसर की प्रमुख वजह होने के बावजूद अब प्रदूषण इसकी एक और बड़ी वजह के तौर पर सामने आया है। वायु प्रदूषण के साथ ही घर के भीतर के प्रदूषण के भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

कैंसर की घटिया या नकली करीब दवाएं - Substandard or counterfeit cancer drugs
पल्मोनोलॉजिस्ट यानी फेफड़ा कैंसर विशेषज्ञ डा. सुस्मिता राय चौधरी डीडब्ल्यू नामक वेबसाइट को बतातीं हैं कि घर के भीतर का प्रदूषण घरेलू महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। महिलाओं का एक बड़ा समूह अपना ज्यादातर समय घर के भीतर बिताता है। उनके काफी समय रसोई में गुजरता है। उनका कहना है कि खाना पकाने के लिए कोयला और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में इस बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह इनसे निकलने वाले धुएं में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) की मौजूदगी है।

वो बताती हैं कि किचन में हवा का प्रवाह पर्याप्त नहीं होने या खिड़की-दरवाजे बंद होने से खतरा और बढ़ जाता है। महिलाओं के फेफड़ों का आकार अपेक्षाकृत छोटा होने की वजह से पीएम 2.5 और पीएम 5 आसानी से उसमें चिपक जाते हैं। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि इस वजह से घरेलू महिलाओं में लंग कैंसर की बीमारी बढ़ रही है। महिलाओं में विशिष्ट आनुवंशिक म्युटेशन, शरीर पर एस्ट्रोजन हार्मोन का प्रभाव और शहरी क्षेत्रों में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की बढ़ती तादाद भी इस बीमारी के कारण के तौर सामने आ रहे हैं।

प्रदूषण एक बड़ा कारण - Pollution: A Major Cause
विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में खासकर दिवाली के बाद उत्तर भारतीय शहरों में प्रदूषण सुर्खियों में रहता है। दिल्ली के अलावा कोलकाता भी इस मामले में पीछे नहीं है। वैसे तो पूरे साल प्रदूषण की मात्रा खतरनाक स्तर पर रहती है। लेकिन दीवाली के बाद यह काफी बढ़ जाती है।

टैल्कम पाउडर, एस्बेस्टस भी कैंसर के कारक हो सकतें हैं - Talcum Powder and Asbestos Can Also Cause Cancer
एक अन्य विशेषज्ञ डा. देवराज बताते हैं कि औद्योगिक इलाके से निकलने वाले धुएं में कार्सिनोजेन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसकी वजह से डीएनए को नुकसान पहुंचता है और कोशिकाओं का असामान्य विकास होने लगता है। यही जो आगे चल कर कैंसर में बदल जाता है। यह भी धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों में बढ़ती इस बीमारी की प्रमुख वजह के तौर पर सामने आया है। उनका कहना है कि मौजूदा जीवनशैली में ऐसे लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है जिन्होंने साग-सब्जी, फल और विटामिन-युक्त भोजन कम कर दिया है। साथ ही वो शारीरिक मेहनत भी कम कर रहे हैं, जिससे लंग कैंसर का खतरा बढ़ रहा है।

जागरूकता ही बचाव सम्भव - Awareness is the Key to Prevention
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले इस रोग का पता लगाना मुश्किल था। लेकिन विज्ञान की प्रगति के साथ थोड़ी-सी जागरूकता जरूरी है। खासकर धूम्रपान करने वालों लोगों को 45 साल की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर सी.टी. स्कैन कराना चाहिए। समय पर इस बीमारी की पहचान से मरीज के स्वस्थ होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

फेफड़ों के कैंसर के लिए अब तक देश में कोई राष्ट्रीय जांच कार्यक्रम नहीं होने की वजह से जागरूकता ही लोगों को इस बीमारी से बचा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खांसी होने, सीने में दर्द, मुंह से खून निकलने, थोड़ा सा चलने या सीढ़ी चढ़ने से सांस फूलना और भूख में कमी के साथ ही वजन में गिरावट जैसे लक्षणों को देख कर सचेत हो जाना चाहिए।

पहले माना जाता था कि अगर आप किसी तरह के तंबाकू का सेवन नहीं करते तो आप लंग कैंसर से बचे रहेंगे। लेकिन बढ़ते वायु प्रदूषण ने इस धारणा को तोड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण से जहां तक हो सके बचने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीज़ों के लिए योग।

कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीज़ों के लिए योग।

लेख विभाग May 16 2021 27209

कोविड के मरीज को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को फिट रखने के लिए विशेषज्ञों की देखरेख में योग जरूर क

कोविड-19: दक्षिण अफ़्रीका में चिन्हित नए वैरिएण्ट का  नामकरण "ओमिक्रोन"

कोविड-19: दक्षिण अफ़्रीका में चिन्हित नए वैरिएण्ट का  नामकरण "ओमिक्रोन"

हे.जा.स. November 28 2021 32559

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार आरम्भिक सबूतों से पता चलता है कि डेल्टा जैसे अन्य वैरिएण्ट की तुलना

कोविड-19: देश में कोविड-19 के 11,610 नए मामले।

कोविड-19: देश में कोविड-19 के 11,610 नए मामले।

हे.जा.स. February 17 2021 27771

1,06,44,858 लोगों के संक्रमण मुक्त होने के साथ ही देश में मरीजों के ठीक होने की दर 97.33 प्रतिशत हो

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर रैली निकालकर किया गया जागरूक

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर रैली निकालकर किया गया जागरूक

विशेष संवाददाता April 08 2023 28172

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सीएमओ कार्यालय से चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने जा

सहारा हॉस्पिटल में स्तन से सम्बंधित समस्याओं के परामर्श के लिए नि:शुल्क शिविर का आयोजन

सहारा हॉस्पिटल में स्तन से सम्बंधित समस्याओं के परामर्श के लिए नि:शुल्क शिविर का आयोजन

हुज़ैफ़ा अबरार October 05 2023 100163

डॉ.फरहा अरशद ने बताया कि अगर स्तन सम्बंधी कोई समस्या है तो इलाज कराने से पहले उसकी जांच करानी चाहिए।

जर्मनी में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप का तेजी से प्रसार।

जर्मनी में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप का तेजी से प्रसार।

एस. के. राणा July 08 2021 33965

नवीनतम विश्लेषण के मुताबिक, पिछले महीने के अंत तक संक्रमण के 59 प्रतिशत नये मामले कोरोना वायरस के डे

माताओं से बच्चों में होने वाले एचआईवी व सिफ़लिस संक्रमण की जाँच के लिए सस्ती परीक्षण किट उपलब्ध।

माताओं से बच्चों में होने वाले एचआईवी व सिफ़लिस संक्रमण की जाँच के लिए सस्ती परीक्षण किट उपलब्ध।

हे.जा.स. November 16 2021 46108

माताओं से बच्चों में होने वाले एचआईवी व सिफ़लिस संक्रमण की रोकथाम के लिये कम क़ीमत वाली दोहरी परीक्ष

गोरखपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों में आई वायरल फीवर के मरीजों की बाढ़

गोरखपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों में आई वायरल फीवर के मरीजों की बाढ़

अनिल सिंह October 19 2022 30532

वायरल फीवर में इस बार डेंगू जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। मरीजों को तेज बुखार आने की वजह से चेहरा लाल पड

बलरामपुर अस्पताल में बढ़ी मरीजों की कतार

बलरामपुर अस्पताल में बढ़ी मरीजों की कतार

आरती तिवारी September 05 2023 30630

बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पर्चा और जांच काउंटर पर मरीजों की लंबी-

इंडोनेशिया में कोरोना कहर: एक दिन में 54 हजार से ज्यादा नए केस, एशिया का नया हब। 

इंडोनेशिया में कोरोना कहर: एक दिन में 54 हजार से ज्यादा नए केस, एशिया का नया हब। 

हे.जा.स. July 16 2021 22587

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की एक करोड़ से ज्यादा आबादी में से आधी आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती ह

Login Panel