देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

बिहार में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में और उनके नवजातों के खून में यूरेनियम मिला 

17 से 35 साल की 40 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया था। हर सैंपल में यूरेनियम की मात्रा पाई गई, अर्थात सौ फीसदी सैंपल प्रदूषित थे, हालांकि अलग-अलग सैंपल में यूरेनियम की मात्रा अलग-अलग थी। कटिहार जिले की माताओं के सैंपल में यूरेनियम की सर्वाधिक मात्रा 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि औसत स्तर 4.035 माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाया गया। भोजपुर की माताओं में यह सबसे कम पाया गया।

एस. के. राणा
December 05 2025 Updated: December 05 2025 22:14
0 4263
बिहार में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में और उनके नवजातों के खून में यूरेनियम मिला  प्रतीकात्मक चित्र

पटना। बिहार में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम पाया गया है। उनके नवजातों के खून में भी यूरेनियममात्रा मिला है। इस तथ्य की जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली ने पटना के महावीर कैंसर संस्थान और वैशाली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) सहित पांच अन्य संस्थानों द्वारा किये गए एक शोध में प्रकाश में आया है।   स्तनपान कराने वाली महिलाओं (lactating women ) के दूध में यूरेनियम की मौजूदगी ने मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषण के घातक प्रभावों को लेकर बहस तेज कर दी है। 

इस शोध (research) से जुड़ी रिपोर्ट प्रतिष्ठित साइंस जर्नल नेचर (journal Nature) में प्रकाशित हुई है। राहत की बात है कि जांचे गए ब्रेस्ट मिल्क (breast milk) के सैंपल में यूरेनियम (यू-238) की मात्रा 5.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम रही, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) की ओर से पेयजल के लिए निर्धारित सुरक्षा के मानक से कम है। मानक के मुताबिक यूरेनियम (Uranium) की अधिकतम मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर हो सकती है। 

महावीर कैंसर संस्थान के रिसर्च डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष अशोक कुमार घोष के अनुसार दुनिया में पहली बार मां के दूध में यूरेनियम को लेकर रिसर्च किया गया है। उनके मुताबिक, ‘‘ग्राउंड वाटर में यूरेनियम का प्रदूषण बड़ी चिंता का विषय है। जिससे बिहार सहित 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित हैं। यह एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है। इसकी रेडियोधर्मी (radioactive) व रासायनिक प्रकृति दोनों ही स्वास्थ्य के लिए घातक होती है।  

17 से 35 साल की माताओं पर रिसर्च - Research on mothers aged 17 to 35 years
साल 2021 से साल 2024 के बीच भोजपुर, कटिहार, नालंदा, खगड़िया, समस्तीपुर और बेगूसराय में स्तनपान कराने वाली 17 से 35 साल की 40 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया था। हर सैंपल में यूरेनियम की मात्रा पाई गई, अर्थात सौ फीसदी सैंपल प्रदूषित थे, हालांकि अलग-अलग सैंपल में यूरेनियम की मात्रा अलग-अलग थी। कटिहार जिले की माताओं के सैंपल में यूरेनियम की सर्वाधिक मात्रा 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि औसत स्तर 4.035 माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाया गया। भोजपुर की माताओं में यह सबसे कम पाया गया।

नवजात बच्चों के खून में भी मिला यूरेनियम - Uranium also found in the blood of newborns
जिन 40 माताओं के ब्रेस्ट मिल्क पर शोध किया गया, उनके 35 नवजात बच्चों के ब्लड सैंपल की भी जांच की गई। 87.5 प्रतिशत शिशुओं के खून में भी यूरेनियम की मात्रा मिली। इनके खून में यूरेनियम का औसत प्रति लीटर चार माइक्रोग्राम रहा। सुकून की बात ये है कि इन बच्चों में शारीरिक या मानसिक, किसी तरह का कोई ऐसा क्लीनिकल सिम्टम (clinical symptoms) नहीं मिला है, जिसके लिए इन्हें उपचार की आवश्यकता हो। शोधकर्ताओं ने यूरेनियम की मौजूदगी का कारण तलाशने के उद्देश्य से सभी 40 महिलाओं के घरों से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

डॉ. अशोक कुमार घोष के अनुसार नवजात के यूरेनियम युक्त दूध का सेवन करने से दो तरह की समस्याएं आ सकती हैं, नॉन कार्सिनोजेनिक (clinical symptoms) पदार्थों से किडनी व न्यूरो संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, शारीरिक विकास व आईक्यू प्रभावित हो सकता है, वहीं कार्सिनोजेनिक पदार्थों से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल कुमार कहते हैं, ‘‘इससे सबसे अधिक खतरा उन बच्चों को है, जिनके अंग अभी विकसित हो रहे। उनका शरीर भारी धातुओं को जल्दी अवशोषित करता है और कम वजन होने के कारण जरा सी मात्रा भी कई गुना ज्यादा हानिकारक हो जाती है। हालांकि, इस अध्ययन के अनुसार 70 प्रतिशत बच्चों में यूरेनियम के कारण नॉन कार्सिनोजेनिक हेल्थ इफेक्ट की संभावना देखी गई है। संभावना व्यक्त की जा रही कि आर्सेनिक की तरह ही यूरेनियम भी खाने या फिर ग्राउंड वाटर (groundwater) के जरिए मां के शरीर तक पहुंचा हो। ऐसा कृषि उपजों में यूरेनियम युक्त पानी के इस्तेमाल के चलते हो सकता है। 

डॉ. अशोक कुमार घोष कहते हैं, ‘‘इस मामले में क्लीनिकल स्टडी की तो जरूरत है ही, फूड चेन या फिर ग्राउंड वाटर में यूरेनियम की मौजूदगी को देखते हुए सरकार को बड़े स्तर पर इस मुद्दे पर काम करना चाहिए। यानी भूजल में यूरेनियम के पहुंचने को लेकर भी शोध किया जाना चाहिए। 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

भुवनेश्‍वर एम्‍स में खुला एडवांस्‍ड डायग्‍नोस्टिक्‍स रिसर्च सेंटर

भुवनेश्‍वर एम्‍स में खुला एडवांस्‍ड डायग्‍नोस्टिक्‍स रिसर्च सेंटर

विशेष संवाददाता November 28 2022 22857

भुवनेश्‍वर एम्‍स में देश का सबसे बड़ा एडवांस्ड माइकोलॉजी एंड डायग्‍नोस्टिक्‍स रिसर्च सेंटर खोला गया

कोर्वेवैक्स टीके से प्रदेश के 12 से 14 साल के 85 लाख बच्चे कोरोना संक्रमण से सुरक्षित होंगे: डॉ मनोज

कोर्वेवैक्स टीके से प्रदेश के 12 से 14 साल के 85 लाख बच्चे कोरोना संक्रमण से सुरक्षित होंगे: डॉ मनोज

हुज़ैफ़ा अबरार March 16 2022 26155

प्रदेश के 12 से 14 साल के करीब 85 लाख बच्चों का टीकाकरण कर कोरोना से सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इसके स

बीआरडी मेडिकल कालेज में होगी कोरोना वायरस के म्यूटेशन की पहचान।

बीआरडी मेडिकल कालेज में होगी कोरोना वायरस के म्यूटेशन की पहचान।

रंजीव ठाकुर July 19 2021 39580

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब में जीनोम सीक्वेसिंग की जाएगी। इस जांच के लिए अन्य मशीनें ‌विभाग में मौ

H3N2 इन्फ्लूएंजा कोरोना की तरह खतरनाक, जानें कैसे फैलती है ये बीमारी ?

H3N2 इन्फ्लूएंजा कोरोना की तरह खतरनाक, जानें कैसे फैलती है ये बीमारी ?

हे.जा.स. March 10 2023 28544

वैसे तो इन्फ्लूएंजा किसी भी उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है लेकिन इससे सबसे ज्यादा खतरा गर

आगरा में पहला कोरोना पॉजिटिव मिला

आगरा में पहला कोरोना पॉजिटिव मिला

विशेष संवाददाता December 25 2022 25454

ताजनगरी में कोरोना का पहला केस मिला है, चीन से लौटे युवक में कोरोना की पुष्टि हुई है। युवक दो दिन प

अपेंडिसाइटिस के बारे में गलत धारणाएं प्रचलित हैं, डॉ देवदूत सोरेन से समझिये इसका कारण, बचाव और इलाज

अपेंडिसाइटिस के बारे में गलत धारणाएं प्रचलित हैं, डॉ देवदूत सोरेन से समझिये इसका कारण, बचाव और इलाज

लेख विभाग February 21 2022 26667

अपेंडिसाइटिस तब होता है जब यह अंग संक्रमित होता है, और अधिक संभावना है जब इसे निकाल लिया जाता है। ठी

7 महीने से बेहोश पड़ी महिला ने दिया बच्ची को जन्म

7 महीने से बेहोश पड़ी महिला ने दिया बच्ची को जन्म

एस. के. राणा November 01 2022 32217

23 वर्षीय महिला जो करीब 7 माह से अस्पताल में बेहोश पड़ी है, उसने पिछले सप्ताह एक बच्ची को जन्म दिया।

पीएम मोदी ने भारत के सहयोग से फिजी में बने पहले चिल्ड्रन हार्ट अस्पताल का उद्घाटन किया

पीएम मोदी ने भारत के सहयोग से फिजी में बने पहले चिल्ड्रन हार्ट अस्पताल का उद्घाटन किया

एस. के. राणा April 27 2022 46293

पीएम मोदी ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से फिजी में श्री सत्य साई संजीवनी चिल्ड्रन हार्ट अ

मोटापा कम करने के लिए अपनाए ये घरेलू उपाय

मोटापा कम करने के लिए अपनाए ये घरेलू उपाय

लेख विभाग August 17 2022 38126

आज के समय में वजन बढ़ना या मोटापा एक आम बीमारी हो गई है और लगभग 70 प्रतिशत लोग इसके शिकार बन रहें है

लखनऊ में भी पाँव पसार रहा कोरोना, छात्र हो रहे शिकार

लखनऊ में भी पाँव पसार रहा कोरोना, छात्र हो रहे शिकार

हुज़ैफ़ा अबरार April 30 2022 28575

इससे पहले लामाटीनियर की दो छात्राएं संक्रमण की चपेट में आ चुकी हैं। कैथेड्रल और डीपीएस के छात्र भी स

Login Panel