












































प्रतीकात्मक चित्र
पटना। बिहार में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम पाया गया है। उनके नवजातों के खून में भी यूरेनियममात्रा मिला है। इस तथ्य की जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली ने पटना के महावीर कैंसर संस्थान और वैशाली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) सहित पांच अन्य संस्थानों द्वारा किये गए एक शोध में प्रकाश में आया है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं (lactating women ) के दूध में यूरेनियम की मौजूदगी ने मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषण के घातक प्रभावों को लेकर बहस तेज कर दी है।
इस शोध (research) से जुड़ी रिपोर्ट प्रतिष्ठित साइंस जर्नल नेचर (journal Nature) में प्रकाशित हुई है। राहत की बात है कि जांचे गए ब्रेस्ट मिल्क (breast milk) के सैंपल में यूरेनियम (यू-238) की मात्रा 5.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम रही, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) की ओर से पेयजल के लिए निर्धारित सुरक्षा के मानक से कम है। मानक के मुताबिक यूरेनियम (Uranium) की अधिकतम मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर हो सकती है।

महावीर कैंसर संस्थान के रिसर्च डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष अशोक कुमार घोष के अनुसार दुनिया में पहली बार मां के दूध में यूरेनियम को लेकर रिसर्च किया गया है। उनके मुताबिक, ‘‘ग्राउंड वाटर में यूरेनियम का प्रदूषण बड़ी चिंता का विषय है। जिससे बिहार सहित 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित हैं। यह एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है। इसकी रेडियोधर्मी (radioactive) व रासायनिक प्रकृति दोनों ही स्वास्थ्य के लिए घातक होती है।
17 से 35 साल की माताओं पर रिसर्च - Research on mothers aged 17 to 35 years
साल 2021 से साल 2024 के बीच भोजपुर, कटिहार, नालंदा, खगड़िया, समस्तीपुर और बेगूसराय में स्तनपान कराने वाली 17 से 35 साल की 40 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया था। हर सैंपल में यूरेनियम की मात्रा पाई गई, अर्थात सौ फीसदी सैंपल प्रदूषित थे, हालांकि अलग-अलग सैंपल में यूरेनियम की मात्रा अलग-अलग थी। कटिहार जिले की माताओं के सैंपल में यूरेनियम की सर्वाधिक मात्रा 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि औसत स्तर 4.035 माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाया गया। भोजपुर की माताओं में यह सबसे कम पाया गया।
नवजात बच्चों के खून में भी मिला यूरेनियम - Uranium also found in the blood of newborns
जिन 40 माताओं के ब्रेस्ट मिल्क पर शोध किया गया, उनके 35 नवजात बच्चों के ब्लड सैंपल की भी जांच की गई। 87.5 प्रतिशत शिशुओं के खून में भी यूरेनियम की मात्रा मिली। इनके खून में यूरेनियम का औसत प्रति लीटर चार माइक्रोग्राम रहा। सुकून की बात ये है कि इन बच्चों में शारीरिक या मानसिक, किसी तरह का कोई ऐसा क्लीनिकल सिम्टम (clinical symptoms) नहीं मिला है, जिसके लिए इन्हें उपचार की आवश्यकता हो। शोधकर्ताओं ने यूरेनियम की मौजूदगी का कारण तलाशने के उद्देश्य से सभी 40 महिलाओं के घरों से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
डॉ. अशोक कुमार घोष के अनुसार नवजात के यूरेनियम युक्त दूध का सेवन करने से दो तरह की समस्याएं आ सकती हैं, नॉन कार्सिनोजेनिक (clinical symptoms) पदार्थों से किडनी व न्यूरो संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, शारीरिक विकास व आईक्यू प्रभावित हो सकता है, वहीं कार्सिनोजेनिक पदार्थों से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल कुमार कहते हैं, ‘‘इससे सबसे अधिक खतरा उन बच्चों को है, जिनके अंग अभी विकसित हो रहे। उनका शरीर भारी धातुओं को जल्दी अवशोषित करता है और कम वजन होने के कारण जरा सी मात्रा भी कई गुना ज्यादा हानिकारक हो जाती है। हालांकि, इस अध्ययन के अनुसार 70 प्रतिशत बच्चों में यूरेनियम के कारण नॉन कार्सिनोजेनिक हेल्थ इफेक्ट की संभावना देखी गई है। संभावना व्यक्त की जा रही कि आर्सेनिक की तरह ही यूरेनियम भी खाने या फिर ग्राउंड वाटर (groundwater) के जरिए मां के शरीर तक पहुंचा हो। ऐसा कृषि उपजों में यूरेनियम युक्त पानी के इस्तेमाल के चलते हो सकता है।
डॉ. अशोक कुमार घोष कहते हैं, ‘‘इस मामले में क्लीनिकल स्टडी की तो जरूरत है ही, फूड चेन या फिर ग्राउंड वाटर में यूरेनियम की मौजूदगी को देखते हुए सरकार को बड़े स्तर पर इस मुद्दे पर काम करना चाहिए। यानी भूजल में यूरेनियम के पहुंचने को लेकर भी शोध किया जाना चाहिए।







हुज़ैफ़ा अबरार October 27 2026 0 1351
हुज़ैफ़ा अबरार October 26 2026 0 1302
लेख विभाग October 25 2026 0 378
हुज़ैफ़ा अबरार October 25 2026 0 287
अखण्ड प्रताप सिंह October 26 2026 0 245
हुज़ैफ़ा अबरार October 26 2026 0 210
हुज़ैफ़ा अबरार October 26 2026 0 189
हुज़ैफ़ा अबरार October 28 2026 0 189
हुज़ैफ़ा अबरार October 28 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार October 28 2026 0 56
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6755
हुज़ैफ़ा अबरार October 08 2026 0 1743
हुज़ैफ़ा अबरार October 13 2026 0 1729
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1596
हुज़ैफ़ा अबरार October 06 2026 0 1575
हुज़ैफ़ा अबरार October 14 2026 0 1512
हुज़ैफ़ा अबरार October 18 2026 0 1414
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 1393
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10388
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6755
एस. के. राणा February 01 2026 0 6629
एस. के. राणा January 20 2026 0 6363
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5978
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5817
एस. के. राणा January 13 2026 0 5383
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87715
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35974
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38881
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36400
लेख विभाग March 19 2022 0 35973
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73988
प्रदेश में मेडिकल कोर्स के लिए सीटों की संख्या को दोगुनी करने के अलावा राज्य में 6,000 से अधिक डॉक्ट
मंडलायुक्त ने निरीक्षण के दौरान कुपोषित बच्चों को चार्ट के अनुसार दिये जाने वाले पौष्टिक आहार चार्ट
युवक ने जो पर्चा बनवाया था, उसमें उसने युवती का नाम प्रीति और उम्र 23 साल लिखवाई थी। इस बीच युवती टॉ
बता दें कि एम्स में आई 28 वर्षीय गर्भवती महिला इससे पहले 3 बार गर्भपात हो चुका था। महिला को अल्ट्रा
मैक्स हॉस्पिटल में हम सीआरएस और एचआईपीईसी सर्जरी के जरिये एडवांस्ड कैंसर के लगभग 150 मामलों का सफल इ
मिली जानकारी ने मुताबिक लोहिया अस्पताल में शाम 5 बजे तक जांच के सैंपल लिए जाएंगे। इससे मरीजों को निज
सभी अधिकारी कम से कम एक-एक टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लें और इस कार्य से स्वंय सेवी संस्थाएं भी जुड़े।
जिला सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो माझी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पीड़ित को ब्लड बैंक आने के बाद से 25 यू
चेहरे की मसाज त्वचा को लिफ्ट और फर्म कर सकती है, जिससे चेहरे का मोटापा और झुर्रियों की उपस्थिति कम ह
‘‘हम पूरे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रहे हैं।’’ एनएमसी के गठन से इस

COMMENTS