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रीजेंसी ने 13 वर्षीय बच्ची का विशाल ओवेरियन सिस्ट को हटाया

किशोरियों में लगातार रहने वाले पेट दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और शीघ्र सर्जिकल हस्तक्षेप से स्थायी जटिलताओं को रोका जा सकता है तथा भविष्य की प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखी जा सकती है।

हुज़ैफ़ा अबरार
August 02 2026 Updated: August 02 2026 01:05
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रीजेंसी ने 13 वर्षीय बच्ची का विशाल ओवेरियन सिस्ट को हटाया Ovarian Cyst Regency helth Removes

लखनऊ। रेजेंसी हेल्थ लखनऊ के विशेषज्ञों ने 13 वर्षीय बच्ची की भविष्य की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को सुरक्षित रखते हुए 20 म 20 सेमी आकार की दुर्लभ विशाल दाहिनी ओवरी की हेमोरेजिक सिस्ट को अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक हटाया। यह सिस्ट ओवेरियन टॉर्शन जैसी गंभीर स्त्रीरोग आपातकालीन स्थिति से जटिल हो गई थी, जिसमें ओवरी अपने सहायक ऊतकों के चारों ओर मुड़ जाती है और उसमें रक्त प्रवाह रुक जाता है। यह जटिल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी डॉ. शालिनी सिंह कंसल्टेंट प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने सफलतापूर्वक की, जिसमें सिस्ट को हटाने के साथ बच्ची की ओवरी और उसकी भविष्य की प्रजनन क्षमता भी सुरक्षित रखी गई। रोगी बेबी को पेट के दाहिने निचले हिस्से में तेज दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकीय जांच और इमेजिंग में दाहिनी ओवरी में विशाल हेमोरेजिक सिस्ट पाई गई, जिसने पूरे पेल्विस और ऊपरी पेट तक स्थान घेर लिया था। जांच में पुष्टि हुई कि सिस्ट अपने पेडिकल के चारों ओर मुड़ चुकी थी, जिसकी तत्काल सर्जरी आवश्यक थी। समय पर उपचार न मिलने पर ओवरी को स्थायी नुकसान पहुंच सकता था और भविष्य में उसकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती थी।

डॉ. शालिनी सिंह ने कहा ओवेरियन टॉर्शन एक ऐसी सर्जिकल इमरजेंसी है जिसमें हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। कम उम्र की लड़कियों में हमारा पहला उद्देश्य केवल प्रभावित ओवरी को बचाना ही नहीं बल्कि उनकी भविष्य की प्रजनन क्षमता को भी सुरक्षित रखना होता है। सिस्ट का आकार बड़ा होने टॉर्शन और व्यापक चिपकाव जैसी जटिलताओं के बावजूद टीम ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की, हेमोरेजिक सिस्ट को सुरक्षित हटाया, ओवरी को सीधा कर उसका पुनर्निर्माण किया। समय पर निदान और शीघ्र उपचार ऐसे सकारात्मक परिणामों की कुंजी हैं।  उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के कई लाभ हैं, जैसे छोटे चीरे, ऑपरेशन के बाद कम दर्द, कम रक्तस्राव, तेजी से रिकवरी, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना तथा पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में प्रजनन अंगों का बेहतर संरक्षण। किशोरियों में लगातार रहने वाले पेट दर्द को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच से ओवेरियन टॉर्शन जैसी गंभीर स्थितियों का पता लगाकर स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।

मरीज की उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि विशाल सिस्ट आंतों तथा ओमेंटम (पेट की वसायुक्त झिल्ली) से व्यापक रूप से चिपकी हुई थी, जिससे यह मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। सिस्ट को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए उसमें से लगभग एक लीटर रक्तमिश्रित द्रव निकाला गया। सर्जिकल टीम ने सबसे पहले एड्हेसियोलाइसिस (Adhesiolysis) प्रक्रिया के माध्यम से असामान्य चिपकाव को अलग किया। इसके बाद ओवरी के मुड़े हुए पेडिकल को सावधानीपूर्वक सीधा कर रक्त प्रवाह को पुनः स्थापित किया गया। फिर सिस्ट वॉल एन्यूक्लिएशन (Cyst Wall Enucleation) तकनीक से सिस्ट को हटाया गया, जिससे स्वस्थ ओवेरियन ऊतक सुरक्षित रह सके। इसके पश्चात ओवरी का पुनर्निर्माण (Reconstruction) कर उसकी सामान्य संरचना और कार्यक्षमता बहाल की गई। बाईं ओवरी और फैलोपियन ट्यूब पूरी तरह स्वस्थ थीं, जबकि दाहिनी फैलोपियन ट्यूब अत्यधिक सूजन और रक्तस्राव के कारण अलग से स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे सकी। 

मरीज के परिजनों ने समय पर उपचार और संवेदनशील देखभाल के लिए रेजेंसी हेल्थ लखनऊ की चिकित्सा टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अचानक बीमारी का पता चलने और बच्ची के असहनीय पेट दर्द ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया था, लेकिन सफल सर्जरी, ओवरी के सुरक्षित रहने और शीघ्र स्वस्थ होने से उन्हें अत्यधिक राहत मिली तथा बेटी के स्वस्थ भविष्य को लेकर उनका विश्वास और मजबूत हुआ। इस दुर्लभ एवं जटिल मामले का सफल उपचार रेजेंसी हेल्थ लखनऊ की उन्नत मिनिमली इनवेसिव स्त्री रोग सर्जरी में विशेषज्ञता और विश्वस्तरीय महिला स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मामला इस बात पर भी जोर देता है कि किशोरियों में लगातार रहने वाले पेट दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और शीघ्र सर्जिकल हस्तक्षेप से स्थायी जटिलताओं को रोका जा सकता है तथा भविष्य की प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखी जा सकती है।

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