











































लखनऊ। क्या आप जानते हैं कि लम्बे समय तक पेन किलर या आयुर्वेदिक दवाएं खाने से सबसे पहले गुर्दे पर असर पड़ता है? किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस करने की नौबत क्यों आती है? किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करना चाहिए? ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हेल्थ जागरण को दिए डॉ मयंक मोहन अग्रवाल ने जो मेदांता अस्पताल में एसोसिएट डायरेक्टर, यूरोलॉजी एण्ड किडनी ट्रांसप्लांट है। आपका नाम कई सम्मानित पुरस्कारों से जुड़ा हुआ है और कम उम्र में अपने राष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब क्या लखनऊ में किडनी ट्रांसप्लांट की उपयुक्त सुविधाएं उपलब्ध हैं?
डॉ मयंक मोहन अग्रवाल - हां उपलब्ध है। मेदांता अस्पताल डॉ नरेश त्रेहन के नेतृत्व में विश्व स्तरीय किडनी ट्रांसप्लांट (kidney transplant) की सुविधाएं मुहैया करवा रहा है। कमखर्च में मेदांता अस्पताल ये सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कई विभागों की जरूरत होती है। यह एक लम्बी प्रक्रिया होती है जिसको मेदांता अस्पताल पूरी कर रहा है।
हेल्थ जागरण - क्या डिमांड के हिसाब से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधाएं प्रर्याप्त है?
डॉ मयंक मोहन अग्रवाल - देखिए पूरे देश में किडनी ट्रांसप्लांट की इतनी अधिक जरुरत है कि उसे आप आसानी से पूरा नहीं कर सकते हैं इसलिए डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर बना हुआ है।
हेल्थ जागरण - क्या मेदांता अस्पताल पर किडनी ट्रांसप्लांट का अतिरिक्त दबाव है और इसके लिए आगामी क्या योजनाएं हैं?
डॉ मयंक मोहन अग्रवाल - जी बिल्कुल दबाव है। मेदांता अस्पताल में अभी हम लाइव डोनर किडनी ट्रांसप्लांट (Live Donor Kidney Transplant) कर रहे हैं। इसके लिए परिवार या निकट रिश्तेदारों से ही किडनी का दान लिया जाता है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है। अभी 10 ऑपरेशन थियेटर (operation theaters) काम कर रहे हैं और 8 आने वाले समय में काम करने लगेंगे तो 18 ऑपरेशन थियेटर हमारे पास हो जाएंगे। ऐसे ही नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी (Urology) में टीमों को बढ़ाया जा रहा है।
हेल्थ जागरण - मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट ना करवाना पड़े इसके लिए क्या करना चाहिए?
डॉ मयंक मोहन अग्रवाल - किडनी को स्वस्थ रखने के लिए 35-40 साल की उम्र के बाद ब्लडप्रेशर (blood pressure), शुगर (sugar) या दिल की बीमारियों (heart diseases) को कंट्रोल रखना होता है। आखिरी बात डायट और लाइफ स्टाइल पर आ कर रुक जाती है। तो किडनी को स्वस्थ रखने के लिए ब्लडप्रेशर, शुगर और दिल की बीमारियों को पैदा करने वाले सभी कारकों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे जरूरी है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने स्वास्थ्य के लिए कुछ समय जरूर निकालें। कसरत करें (Exercise), उचित मात्रा में पानी पिएं, उचित आहार लें और फास्ट फूड (fast food) से बचें, नशा ना करें, सीमित मात्रा में नमक का उपयोग करें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या खास तौर पर आयुर्वेदिक दवाएं लम्बे समय तक ना खाएं। लोगों को लगता है कि आयुर्वेदिक दवाएं साइड इफेक्ट नहीं डालती हैं तो लोग बिना आयुर्वेदाचार्य के परामर्श के दवाएं खाने लगते हैं, ऐसा बिल्कुल भी ना करें और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं का सेवन करें नहीं तो इसका इफेक्ट पूरे शरीर पर हो सकता है।
तो यह थे जाने माने यूरोलॉजिस्ट डॉ मयंक मोहन अग्रवाल जिन्होंने किडनी के स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां दी।







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