











































world Rabies day
लखनऊ। अगर स्वान चाट ले या काट ले तो तुरंत बहते पानी में 15 मिनट तक साबुन के साथ सफाई करें और चिकित्सालय में तत्काल जाएं। विश्व रेबीज दिवस है रेबीज़ को खत्म करना सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 3 (अच्छी सेहत और भलाई) और खास तौर पर SDG टारगेट 3.3 से जुड़ा है।जिसके अंतर्गत 2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज़ से इंसानों की मौत को शून्य करने का लक्ष्य है। दुनिया भर में इंसानों में रेबीज़ के 99% मामलों के लिए कुत्ते ज़िम्मेदार हैं, इसलिए पूरी रणनीति कुत्तों से इंसानों में इसके फैलाव को रोकने पर केंद्रित है।
स्वान के काटने से सबसे गंभीर बीमारी रेबीज़ (Rabies) है। यह जानलेवा हो सकती है, लेकिन समय पर इलाज से इससे बचाव संभव है।कुत्ते के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम-से-कम 15 मिनट धोएँ। घाव पर हल्दी मिर्च मिट्टी या कोई घरेलू पदार्थ न लगाएँ। डॉक्टर/सरकारी अस्पताल में जाएँ रेबीज़ वैक्सीन की जरूरत पड़ सकती है और गंभीर घाव में रेबीज़ इम्यूनोग्लोब्युलिन (RIG) भी दिया जाता है। टिटनेस का टीका आवश्यक हो सकता है। रेबीज स्वस्थ दिख रहा हो तब भी चिकित्सा सलाह लेने में देरी न करें।
फार्मासिस्ट फेडरेशन फार्मासिस्टों के साथ आमजन को जागरूक करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम और जागरूकता अभियान चला रहा है, फेडरेशन में सभी विधाओं के साथ पशुपालन विभाग के फार्मेसिस्ट समन्वित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लगातार इस घातक रोग से होने वाले मृत्यु को बचाने के लिए कार्य किया जा रहा है जानवरों के वैक्सीनेशन जागरूकता फैलाने चिकित्सा कर्मियों को शिक्षित करने का कार्य राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सालय में वैक्सीन की पूरी उपलब्धता रखी गई है। इसी क्रम में एक वेबिनार को संबोधित करते हुए ये बातें फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताई। उन्होंने कहा काटे चाटे श्वान के दुहु भांति विपरीत यह लाइन बिल्कुल सत्य है परंतु कुत्ते के काटने से डर नहीं लगता साहब, डर लगता है इंजेक्शन लगवाने से ये बात आपने जरूर सुना होगा, यह बिल्कुल ही सत्य नहीं है!
लक्षण
रेबीज का इनक्यूबेशन पीरियड आमतौर पर 2-3 महीने होता है, लेकिन वायरस के प्रवेश के स्थान और वायरल लोड जैसे कारकों के आधार पर एक सप्ताह से एक वर्ष तक भिन्न हो सकती है। रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, दर्द और घाव वाली जगह पर असामान्य या अस्पष्टीकृत झुनझुनी, चुभन या जलन जैसी सामान्य निशानियाँ शामिल हैं। जैसे-जैसे वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में जाता है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में प्रगतिशील और घातक सूजन विकसित होती है।
रैबीज के प्रकार -
रेबीज दो प्रकार की होती है
Furious rabies - (फ्यूरियस रेबीज)
अति सक्रियता, उत्तेजक व्यवहार, मतिभ्रम समन्वय की कमी हाइड्रोफोबिया (पानी का डर) और एरोफोबिया (ड्राफ्ट या ताजी हवा का डर)। कार्डियो-श्वसन अरेस्ट के कारण कुछ दिनों के बाद मृत्यु हो जाती है।
आंकड़े
WHO के अनुसार मनुष्यों में 99% रैबीज कुत्ते के काटने और खरोचने से होती है कुत्ते को वैक्सीन लगाकर और खुद को काटने से बचाकर इस रोग से पूर्ण रूपेण बचा जा सकता है। 15 वर्ष से छोटे बच्चे ज्यादातर इसके शिकार होते हैं आंकड़ों के अनुसार कुल मरीजों के 40% संख्या इस उम्र वाले बच्चों की है। रेबीज मुख्य तौर पर एशिया और अफ्रीका सहित डेढ़ सौ देशों की एक बड़ी सामाजिक और गंभीर जन स्वास्थ्य की समस्या है, प्रतिवर्ष 10000 तक की संख्या में इससे मृत्यु हो जाती है।
किसके काटने से फैलता है ?
प्रमुख रूप से रेबीज से संक्रमित स्वान बिल्ली बंदर या जंगली जानवर के काटने खरोच मारने या खुली चमड़ी पर चाटने से अर्थात सीधे mucosa के संपर्क में आने जैसे आंख मुंह या कोई घाव को चाट लेने से भी हो सकता है। अंटार्कटिका को छोड़कर रेबीज सभी देशों में पाए जाने वाला रोग है। वैश्विक स्तर पर रेबीज से प्रतिवर्ष लगभग 59 000 मृत्यु हो रही है, जबकि बहुत सारे ऐसे भी मामले होते हैं जिन्हें रिपोर्ट नहीं किया जाता।
नजदीकी चिकित्सालय से संपर्क करें
उत्तर प्रदेश के सभी चिकित्सालयों यथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों व अन्य चिकित्सालयों में एंटी रेबीज वैक्सीन निशुल्क लगाई जाती है। घाव पर मिर्च या अन्य कुछ भी न लगाएं। कोई पट्टी न बांधे। गाइडलाइन के अनुसार टांका यथा संभव नहीं लगाया जाता है लेकिन यदि बहुत आवश्यकता है तो इम्यूनोग्लोबुलीन लगाने के उपरांत चिकित्सीय देखरेख में ढीला टांका लगाया जा सकता है।
कब लगेगा टीका ?
वर्तमान गाइडलाइन के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन को इंट्रेडर्मल दोनों हाथों में ऊपर की तरफ डेल्टॉयड एरिया में इंट्रा डर्मल दिया जाता है। जिसका दिन 0,3,7,28 निर्धारित है। हालांकि इम्यूनो कंप्रेस्ड मरीजों में intra muscular (मांस में) का दिवस 0,3,7,14,28 निर्धारित है। जो लोग वैक्सीन का अनुसंधान कर रहे हैं या ऐसे एरिया में काम करते हैं जहां पर इस वैक्सीन के होने की संभावना ज्यादा है उन्हे जानवर काटने के पूर्व भी अपना वैक्सीनेशन करा लेना चाहिए।
फेडरेशन की अपील
इस बीमारी से खुद को बचाना और दूसरे को बचाना यह हमारी और आपकी सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है इसलिए यदि आप कुत्ता पालते हैं तो उन्हें टीके अवश्य लगाएं बच्चों को खास तौर पर जानवरों से दूर रखें तथा जानवरों के काटने के उपरांत तत्काल नजदीकी चिकित्सालय के विशेषज्ञ/ फार्मेसिस्ट से राय लें। वेबिनार को प्रो डॉ प्रकाश वी दीवान डॉ हरलोकेश नारायण प्रो मनोज यादव डॉ विष्णु डॉ वंदना डॉ अभिषेक अशोक कुमार आदेश कृष्ण अवधेश अजीत आदि ने संबोधित किया और जागरूक रहने की अपील की।
अब रेबीज का इंजेक्शन पेट में नहीं लगता जिससे लोग डरते थे अब कुत्ते के काटने के बाद जो वैक्सीन लगती है वह वैक्सीन चमड़े के ठीक नीचे और बहुत कम मात्रा में हाथों में लगाई जाती है अतः अब इसमें डरने की कोई आवश्यकता नहीं रही। रेबीज होने के बाद इसमें मृत्यु की संभावना शत प्रतिशत तक है वहीं समय पर वैक्सीन लेने से इससे बचा जा सकता है। श्री यादव ने बताया रेबीज़ एक टीका-निवारणीय जूनोटिक वायरल रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसका वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलीन उपलब्ध है और ज्यादातर सरकारी चिकित्सालयों में निशुल्क लगाया जाता है।







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