











































women suffering from anemia
लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया यानी खून की कमी मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृ एनीमिया के प्रबंधन में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) को शामिल करते हुए उपचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 10 हजार से ज्यादा डोज लगाए जा चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ पिंकी जोवेल के मुताबिक एफसीएम की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार में केवल आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां ही पर्याप्त नहीं होतीं। कुछ महिलाओं में दवा नियमित लेने में परेशानी दुष्प्रभाव या गर्भावस्था के दौरान तेजी से हीमोग्लोबिन सुधार की जरूरत जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। वहीं आयरन सुक्रोज के लिए कई बार अस्पताल आने की जरूरत पड़ सकती है। एफसीएम अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में आयरन को एक ही सत्र में देने वाली उपचार पद्धति है, जिससे बार-बार स्वास्थ्य केंद्र आने की आवश्यकता कम हो सकती है।
डॉ पिंकी जोवेल ने बताया प्रदेश में एफसीएम की यात्रा को संस्थागत रूप देने की दिशा में आवश्यक दवाओं की सूची में इसे शामिल करने खरीद की व्यवस्था चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों की क्षमता बढ़ाने तथा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसे उपलब्ध कराने पर काम किया गया। इस पूरी प्रक्रिया को मातृ एनीमिया के स्क्रीन रेफर ट्रैक ट्रीट मॉडल से भी जोड़ा गया है, ताकि महिला की पहचान से लेकर उपचार और फॉलोअप तक सेवाओं की निरंतरता बनी रहे। इस पहल का महत्वपूर्ण पड़ाव फरवरी 2026 में रायबरेली से प्रशिक्षण की शुरुआत रहा। इसके बाद सीतापुर हरदोई रायबरेली श्रावस्ती और बहराइच के फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को एफसीएम के इस्तेमाल तथा एनीमिया प्रबंधन के मानकों पर प्रशिक्षित करने की योजना सामने आई। प्रशिक्षण में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज, कानपुर को तकनीकी साझेदार के रूप में जोड़ा गया।
इस समय प्रदेश के सभी जनपदों में एफसीएम का प्रयोग हो रहा है। इसके बाद एफसीएम सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में भी कदम बढ़े। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सीतापुर में 28 अप्रैल 2026 को विकेंद्रीकृत एफसीएम सेवाओं की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य यह है कि मध्यम और गंभीर एनीमिया वाली गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं की पहचान समय रहते हो और उन्हें उपचार के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े। राष्ट्रीय स्तर पर भी वर्ष 2026 की एनीमिया मुक्त भारत संबंधी गाइडलाइन में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अंतःशिरा आयरन उपचार को सुरक्षित एवं मानकीकृत तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया है। राज्यों को चरणबद्ध तरीके से जिला अस्पताल और उससे ऊपर के संस्थानों से शुरुआत करने की सलाह दी गई है। इस तरह उत्तर प्रदेश में एफसीएम की यात्रा केवल नई दवा को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की कहानी नहीं है, बल्कि समय पर पहचान, रेफरल, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपचार और फॉलोअप को एक साथ जोड़कर मातृ एनीमिया प्रबंधन को मजबूत करने की पहल है। आने वाले समय में इसकी प्रभावशीलता का आकलन उपचार कवरेज हीमोग्लोबिन में सुधार फॉलोअप और मातृ-नवजात स्वास्थ्य परिणामों जैसे संकेतकों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
छह से बढ़कर 12 ग्राम हुआ कुसुमा देवी का हीमोग्लोबिन
एफसीएम के लाभ का प्रत्यक्ष उदाहरण रायबरेली की कुसुमा देवी हैं। गर्भावस्था के आठवें महीने में हीमोग्लोबिन छह ग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंचने के बाद रोहनिया क्षेत्र के छिपिया गांव की कुसुमा देवी (बदला हुआ नाम) को लगातार कमजोरी, थकान और हाथ-पैरों में झुनझुनी की शिकायत रहती थी। आयरन की गोलियां अनुकूल न लगने के कारण उनका नियमित सेवन भी नहीं कर पा रही थीं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की सलाह से उन्हें एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया। करीब एक माह बाद हुई जांच में उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया। इसके बाद पांच सितंबर को उनका सामान्य प्रसव हुआ और उन्होंने 2.8 किलोग्राम वजन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।







हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 770
हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 378
हुज़ैफ़ा अबरार September 28 2026 0 350
हुज़ैफ़ा अबरार September 27 2026 0 336
हुज़ैफ़ा अबरार September 28 2026 0 217
हुज़ैफ़ा अबरार September 27 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार September 30 2026 0 147
हुज़ैफ़ा अबरार September 30 2026 0 147
हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 98
हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 3787
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 1631
हुज़ैफ़ा अबरार September 13 2026 0 1624
हुज़ैफ़ा अबरार September 04 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार September 08 2026 0 952
हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 770
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 763
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9597
एस. के. राणा February 01 2026 0 5852
एस. के. राणा January 20 2026 0 5831
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5530
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5495
एस. के. राणा January 13 2026 0 5068
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4998
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87407
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35554
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38552
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36064
लेख विभाग March 19 2022 0 35651
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73428
श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री केहेलिया रामबुकवीला ने अधिकारियों को दवा की कमी और अस्पतालों की स्थिति
इंडक्शन मीट के दौरान केजीएमयू के डीन प्रो. आरएन श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थान में अनुशासन के लिए ड्रे
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी को पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास कि
स्वास्थ्य निदेशक ने अखनूर का दौरा कर नवनिर्मित अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान आदेश जारी किया कि
यदि आप प्रेगनेंट हैं और आपको हाई बीपी की भी समस्या है तो सम्बंधित डॉक्टर्स से समय-समय पर अपनी समस्या
वर्तमान में लारी की ओपीडी में रोजाना 500 से 700 मरीज आ रहे हैं। इमरजेंसी में 70 से 80 मरीज प्रतिदिन
देश में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,52,647 हो गई है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 3.80 प्रत
एम्स ऋषिकेश ने बंपर भर्तियां निकाली गई है। ग्रुप बी और ग्रुप सी के पदों पर भर्तियां निकाली हैं।
कॉलेज में पंजीकृत करीब 1200 छात्रों का भविष्य दांव पर है। फर्जी मान्यता दिखाकर इन छात्रों से चार सा
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल का जायजा लिया। औचक निरीक्षण के दौ

COMMENTS