












































प्रतीकात्मक
कानपुर। रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने बताया तंबाकू से होने वाले मुंह के कैंसर यानी ओरल कैंसर से पीड़ित 51 साल के एक मरीज़ की जीवन की गुणवत्ता में यहां के डॉक्टरों द्वारा काफ़ी सुधार किया गया है। कैंसर दुबारा होने के बाद मरीज का ऑपरेशन करना संभव नहीं था, लेकिन एडवांस्ड इलाज से उसे काफ़ी राहत मिली। यह मामला तंबाकू के लंबे समय के सेवन से होने वाले गंभीर खतरों और जटिल कैंसर मामलों में नई थेरेपी की बढ़ती अहमियत को दिखाता है। मरीज करीब 14 साल तक धूम्रपान और तंबाकू चबाने का आदी था।
44 साल की उम्र में उसके मुंह में ल्यूकोप्लाकिया नाम का सफेद धब्बा दिखाई दिया। यह सफ़ेद धब्बा ओरल कैंसर की शुरुआती चेतावनी माना जाता है। डॉक्टरों की सलाह और कैंसर के खतरे की जानकारी मिलने के बावजूद उसने तंबाकू छोड़ने और नियमित जांच कराने पर ध्यान नहीं दिया। 46 साल की उम्र में उसे मुंह में दर्दनाक छाले खाना चबाने में दिक्कत और लगातार दर्द रहने लगा। जांच और बायोप्सी में बुक्कल म्यूकोसा का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा पाया गया। ओरल कैंसर का यह प्रकार भारत में तंबाकू से जुड़ा सबसे प्रचलित कैंसर है।
मरीज़ की इससे पहले अप्रैल 2021 में मॉडिफाइड नेक डाइसेक्शन और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के साथ वाइड लोकल एक्सिशन हुआ था। इसके बाद एडजुवेंट रेडिएशन थेरेपी हुई। हालांकि शुरु में थोड़ा सुधार दिखा लेकिन 2022 में बीमारी फिर से हो गई। इस बार बुक्कल म्यूकोसा और सर्वाइकल लिम्फ नोड्स भी प्रभावित थे। इसलिए इसमें सर्जरी करना सुरक्षित नहीं माना गया। दुबारा कैंसर होने पर मरीज़ को मुंह में बहुत दर्द, मुंह खोलने में दिक्कत, ठोस खाना न खा पाना, लिक्विड पीने में भी दिक्कत, और पोषण में काफी कमी महसूस हुई। इन सब समस्याओं की वजह से उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।
रीजेंसी हेल्थ कानपुर के मेडिकल ऑन्कोलॉजी सीनियर कंसलटेंट डॉ विकास तलरेजा ने कहा यह मामला बहुत ख़ास है क्योंकि कैंसर सर्जरी और रेडिएशन के बाद दुबारा हो गया था और इस बार इलाज़ के विकल्प बहुत कम बचे थे। कीमोथेरेपी, कम डोज़ वाली इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी की सावधानीपूर्वक योजना से हमने मरीज़ की जीवन की गुणवत्ता में लगातार काफ़ी सुधार और अच्छी रिकवरी सुनिश्चित की। यह परिणाम इस बात पर भी ज़ोर देता है कि ल्यूकोप्लाकिया जैसे शुरुआती चेतावनी के संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जिससे बीमारी बढ़ जाती है और इलाज कहीं ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। अभी भी तंबाकू छोड़ना और जल्दी डायग्नोसिस करवाना इलाज़ के नतीजों को बेहतर बनाने में सबसे ज़रूरी तत्व बने हुए हैं।
रीजेंसी हेल्थ कानपुर में जांच करने के बाद PET-CT से बार-बार होने वाली मेटाबोलिक रूप से सक्रिय बीमारी की पुष्टि हुई, और मरीज़ को हर हफ़्ते कीमोथेरेपी के साथ Nivolumab 40 mg का इस्तेमाल करके कम डोज़ वाली इम्यूनोथेरेपी दी जाने लगी। 12 साइकिल के बाद सितंबर 2022 में PET-CT ने काफ़ी हद तक असर दिखाया। इसके बाद Cetuximab के साथ टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जारी रखी गई। इससे बीमारी और कम हुई, और जनवरी 2023 में स्कैन में बीमारी सिर्फ़ बुक्कल म्यूकोसा तक ही दिखी। इलाज के बाद मरीज में काफी राहत देखने को मिली। उसे अब दर्द से पूरी तरह आराम मिल चुका है, वह मुंह से खा-पी सकता है, उसका मुंह अब खुलने लगा है और स्वस्थ वजन भी उसका बढ़ा हुआ है।
सितंबर 2023 में हुए PET-CT ने बिना किसी सक्रिय बीमारी के सबूत के साथ मेटाबॉलिक क्रियाओं को सामान्य दिखाया। जुलाई 2024 और सितंबर 2025 में फॉलो अप स्कैन सामान्य रहे हैं, जोकि बीमारी अब न होने की पुष्टि करते हैं। मरीज़ में अभी कोई लक्षण नहीं हैं और रेगुलर फ़ॉलो-अप के तहत वह अपनी रोज़मर्रा के जीवन में लौट आया है। इलाज और काउंसलिंग के बाद मरीज़ ने धूम्रपान और तंबाकू चबाना पूरी तरह छोड़ दिया उसे कोई लत नहीं है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस से पहले यह मामला तंबाकू से होने वाले मुंह के घावों में देर से पता चलने के प्रभाव को दिखाता है, साथ ही यह भी दिखाता है कि कैसे समय पर इलाज मल्टीडिसिप्लिनरी कैंसर केयर इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी से बार-बार होने वाले मुंह के कैंसर में भी नतीजों में सुधार हो सकता है।
हॉस्पिटल ने उन लोगों को सलाह दी है जिन्हें लगातार मुंह के छाले, सफेद धब्बे, मुंह कम खुलने या चबाने में दिक्कत हो रही है, ताकि वे समय पर मेडिकल जांच करवाएं। साथ ही डॉक्टरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुंह के कैंसर के खिलाफ़ शुरुआती पहचान ही सबसे मजबूत सुरक्षा है। रीजेंसी हेल्थ कानपुर, मल्टीडिसिप्लिनरी विशेषज्ञ और नई ऑन्कोलॉजिकल थेरेपी तक उपलब्धता के ज़रिए पूरे कैंसर केयर को मजबूत कर रहा है। हॉस्पिटल का उद्देश्य मरीजों को लंबे समय तक आराम देना और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।







हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 476
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 350
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 329
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 322
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 259
हुज़ैफ़ा अबरार November 02 2026 0 245
हुज़ैफ़ा अबरार November 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 224
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 476
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 350
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 329
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 322
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 259
हुज़ैफ़ा अबरार November 02 2026 0 245
हुज़ैफ़ा अबरार November 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 224
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10626
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 7042
एस. के. राणा February 01 2026 0 6818
एस. के. राणा January 20 2026 0 6552
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 6160
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5943
एस. के. राणा January 13 2026 0 5495
सौंदर्य
सौंदर्या राय March 05 2022 0 34978
सौंदर्या राय February 26 2022 0 42866
सौंदर्या राय February 25 2022 0 78714
सौंदर्या राय February 08 2022 0 33963
admin January 15 2022 0 35820
सौंदर्या राय September 02 2021 0 61277
केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर के बताया कि आज पांचवां जन औषधि दिवस द
इस मौसम में भारत के कई राज्यों में डेंगू और मलेरिया का कहर बरप रहा है। यह बीमारी एडीज नामक मच्छर के
कोरोना अभी ख़त्म नहीं हुआ है, इसलिए त्योहारों की खुशियाँ बरक़रार रखने के लिए उन जरूरी बातों का जरूर ख्
दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग के लाभों को बढ़ावा देने के लिए किया
श्रीलंका मेडिकल एसोसिएशन ने राजपक्षे को लिखे पत्र में कहा कि अस्पतालों ने चिकित्सा सामग्री के उपयोग
लैक्टोज इंटॉलरेंस, पाचन से जुड़ी समस्या होती है, जिसमें लोगों को दूध या डेयरी प्रॉडक्ट्स को पचाने में
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय डॉ.मनसुख मांडविया इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। मनसुख मांडविया
दंत संवेदनशीलता बीस से चालीस वर्ष की आयु के लोगों में बेहद सामान्य है। यह तीस वर्ष की उम्र में अधिक
सफल नाम से नैपकिन बनाकर इन महिलाओं ने तीन माह में ही अपने उत्पाद की साख बना ली है। इससे आकर्षित होकर
मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जिस तरह अलग-अलग पैथी ने एक साथ काम किया, इससे आगे भी स्वा

COMMENTS