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रीजेंसी हेल्थ  में पुराने हार्ट स्टेंट का दोबारा हुआ ब्लॉकेज का इलाज

जिन मरीजों का पहले कोरोनरी इंटरवेंशन हो चुका है, उनमें इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस एक जटिल स्थिति हो सकती है। इस मामले में मरीज के लक्षणों और जांच से दो कोरोनरी आर्टरीज में गंभीर बीमारी का पता चला, जिसके लिए अलग-अलग उपचार रणनीति की आवश्यकता थी।  लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग  की रुकावट के लिए नया स्टेंट लगाया गया जबकि लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स में पहले से मौजूद स्टेंट के भीतर विकसित रेस्टेनोसिस के उपचार के लिए ड्रग-एल्यूटिंग बैलून का इस्तेमाल किया गया।

हुज़ैफ़ा अबरार
October 01 2026 Updated: October 16 2026 19:35
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रीजेंसी हेल्थ  में पुराने हार्ट स्टेंट का दोबारा हुआ ब्लॉकेज का इलाज Dr. Harshit Gupta Senior Interventional Cardiologist

लखनऊ। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय स्वास्थ्य और नियमित कार्डियक फॉलो-अप के महत्व के बीच रीजेंसी हेल्थ लखनऊ में 61 वर्षीय महिला के जटिल हृदय रोग का सफल उपचार किया गया मरीज के पहले से लगाए गए हार्ट स्टेंट के भीतर लगभग 95% दोबारा ब्लॉकेज विकसित हो गई थी। इस स्थिति को इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस कहा जाता है। इसका उपचार ड्रग-एल्यूटिंग बैलून  तकनीक से किया गया। मरीज को सीने में दर्द मामूली शारीरिक गतिविधि पर सांस फूलने और पूरे शरीर में कमजोरी की शिकायत थी। वह पिछले करीब 10 वर्षों से टाइप-2 डायबिटीज और हाइपरटेंशन से पीड़ित थीं। वर्ष 2016 में उनकी परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन  की जा चुकी थी।

इसके बाद जुलाई 2023 में उनकी लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग और लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स कोरोनरीआर्टरीज से संबंधित उपचार किया गया था।  रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के कार्डियोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. हर्षित गुप्ता ने कहा “जिन मरीजों का पहले कोरोनरी इंटरवेंशन हो चुका है, उनमें इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस एक जटिल स्थिति हो सकती है। इस मामले में मरीज के लक्षणों और जांच से दो कोरोनरी आर्टरीज में गंभीर बीमारी का पता चला, जिसके लिए अलग-अलग उपचार रणनीति की आवश्यकता थी।  लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग  की रुकावट के लिए नया स्टेंट लगाया गया, जबकि लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स  में पहले से मौजूद स्टेंट के भीतर विकसित रेस्टेनोसिस के उपचार के लिए ड्रग-एल्यूटिंग बैलून का इस्तेमाल किया गया।  

 रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के कार्डियोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. हर्षित गुप्ता ने कहा जिन मरीजों का पहले कोरोनरी इंटरवेंशन हो चुका है, उनमें इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस एक जटिल स्थिति हो सकती है। इस मामले में मरीज के लक्षणों और जांच से दो कोरोनरी आर्टरीज में गंभीर बीमारी का पता चला, जिसके लिए अलग-अलग उपचार रणनीति की आवश्यकता थी।  लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग  की रुकावट के लिए नया स्टेंट लगाया गया, जबकि लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स  में पहले से मौजूद स्टेंट के भीतर विकसित रेस्टेनोसिस के उपचार के लिए ड्रग-एल्यूटिंग बैलून का इस्तेमाल किया गया। यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि ब्लॉकेज की स्थिति और प्रकृति को समझते हुए उपचार का चयन करने के साथ विस्तृत जांच और नियमित फॉलो-अप भी महत्वपूर्ण हैं।

मरीज की जांच में कोरोनरी आर्टरी डिजीज और नॉन-एसटी एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन के साथ इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस की पुष्टि हुई। 16 अप्रैल-26 को दाहिनी रेडियल आर्टरी के माध्यम से की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में  मिड- लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग  में 80% संकुचन और मिड- लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स  में गंभीर फोकल इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस पाया गया। जांच से दोनों प्रमुख कोरोनरी आर्टरीज में महत्वपूर्ण संकुचन का पता चला। इसके अलावा, पहले लगाए गए  लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स  स्टेंट के भीतर भी दोबारा संकुचन हो गया था। स्थिति को देखते हुए कार्डियोलॉजी टीम ने दोनों प्रभावित आर्टरीज के लिए अलग-अलग इंटरवेंशनल उपचार रणनीति अपनाई। मिड- लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग  की रुकावट के उपचार के लिए 2.75 × 24 mm एवरमाइन  स्टेंट लगाया गया। वहीं, पहले से लगाए गए लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स  स्टेंट के भीतर विकसित रेस्टेनोसिस के उपचार के लिए 3.0 × 30 mm ड्रग-एल्यूटिंग बैलून का इस्तेमाल किया गया।

ड्रग-एल्यूटिंग बैलून तकनीक में बैलून की मदद से संकरी हुई रक्त वाहिका को खोला जाता है और उसी दौरान दवा को प्रभावित हिस्से तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया से प्रभावित हिस्से में दोबारा संकुचन के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर दवा पहुंचाई जाती है। पूरी प्रक्रिया दाहिनी रेडियल आर्टरी के रास्ते सफलतापूर्वक पूरी की गई। प्रक्रिया के बाद मरीज को निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया। हीमोडायनामिक रूप से स्थिर होने के बाद उन्हें वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें 19 अप्रैल-26 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय उन्हें सात दिनों के बाद कार्डियोलॉजी फॉलो-अप की सलाह दी गई।

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