












































लखनऊ। आम लोगों के बीच यह धारणा बनी कि कोरोना काल में दवा विक्रेताओं ने जम कर कमाई की। आज केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट से जुड़े ऐसे ही कुछ अनसुलझे सवाल लेकर हेल्थ जागरण राजधानी की अमीनाबाद स्थित दवा की होलसेल मण्डी पहुंचा। यहां हमारी मुलाकात हुई दवा विक्रेता समिति, लखनऊ के महासचिव ओ पी सिंह से, जिन्होंने दवा विक्रेताओं से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिए।
गौरतलब है कि दवा विक्रेता समिति, लखनऊ, आल इण्डिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट से सम्बद्ध है जो कि ना केवल देश का बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में प्रमुख स्थान रखता है। आइए देखते हैं बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल और जवाब।
हेल्थ जागरण - कोरोना से पहले और बाद में दवा के दामों (price of medicine) में क्या अंतर आया है? और बिक्री में क्या अंतर आया है?
ओ पी सिंह - कोविड 19 के समय अचानक दवाओं की डिमांड बढ़ी थी फिर दवा कम्पनियों (pharmaceutical companies) ने सप्लाई बढ़ा कर मांग को पूरा किया। क्राइसेस के समय जरूर कुछ लोगों ने अनुचित लाभ उठाया लेकिन हमारी समिति ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस पर काम किया था। हमने दवा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दवाओं के दाम बढ़ा कर नहीं लेने हैं। बाद में दवा फिर से शार्ट ना हो जाएं इसलिए व्यापारियों ने जम कर खरीदारी की और कम्पनियों ने नॉट रिफंडेबल कह कर दवाएं भेजी।
हेल्थ जागरण - क्या कोरोना काल में दवाएं एक्सपायर (expired) हुईं हैं? इन दवाओं का एडजेस्टमेंट कैसे किया गया?
ओ पी सिंह - जी हां! दवाएं एक्सपायर हुईं हैं। कम्पनियों ने नॉट रिफंडेबल कह कर दवाएं भेजी। कोरोना वायरस (coronavirus) की लहर थमने के बाद लाखों करोड़ों की दवाएं डम्प हो गई जो व्यापारियों का नेट लॉस (net loss) है।
हेल्थ जागरण - सुना है कि भारत में दवाओं के साल्ट नहीं बनते हैं, ऐसे में कहां से दवाओं की आपूर्ति होती है?
ओ पी सिंह - ये सही है कि देश में दवाओं के साल्ट नहीं बनते हैं, ये सब चायना (China) से इम्पोर्ट किया जाता है।
हेल्थ जागरण - चीन से आने वाली कौन कौन सी दवाएं शार्ट चल रही है जिनका असर मरीजों और दवा व्यापारियों पर पड़ रहा है?
ओ पी सिंह - असर तो पड़ रहा है। दवाओं के नाम गिनाना तो उचित नहीं लेकिन बहुत सी दवाएं खास तौर पर एंटीबायोटिक दवाओं की आपूर्ति सही नहीं है।
हेल्थ जागरण - भारत सरकार के जन औषधि केन्द्र (Jan Aushadhi Kendras) पर मिलने वाली दवा और मेडीकल स्टोर पर मिलने वाली दवा के दामों में अंतर क्यों होता है? क्या जन औषधि केन्द्र खुलने से दवा के खुदरे व्यापार पर असर पड़ा है?
ओ पी सिंह - देखिए जन औषधि केन्द्र सरकार का उपक्रम है जहां सरकार अपने रिसोर्स से दवाएं उपलब्ध करवाती है जबकि दवा के डीलर या आम विक्रेता को दवा बाजार से खरीदनी होती है। हमारे व्यापार पर ऑनलाइन बिक्री का असर दिखना शुरू हो गया है। हालांकि सभी तरह के बाजारों पर ऑनलाइन बिक्री का असर है लेकिन कोर्ट ने भी ऑनलाइन दवा बिक्री (sale of online medicines) को गलत ठहराया है।
हेल्थ जागरण - जैसा आपने ऑनलाइन दला बिक्री से असर पड़ना बताया है, क्या सरकार से कुछ कहना चाहेंगे?
ओ पी सिंह - बिल्कुल हमारी संस्था ने देश के आला अधिकारियों से अपील की है कि इस पर रोक लगाई जाए। मेरी सरकार से अपील है कि भारत अमेरिका, जापान या ब्रिटेन नहीं है, यहां 130 लोग रहते हैं जिनको रोजगार की जरूरत है। इसलिए ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगानी चाहिए जिससे रोजगार और गुणवत्ता दोनों बरकरार रहें।
तो ये ओ पी सिंह जिन्होंने दवा विक्रेताओं का वो पक्ष सामने रखा जिससे आम आदमी अभी तक अनभिज्ञ था।







हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1218
हुज़ैफ़ा अबरार October 18 2026 0 1071
विशेष संवाददाता October 21 2026 0 903
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 693
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 623
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6580
हुज़ैफ़ा अबरार October 13 2026 0 1491
हुज़ैफ़ा अबरार October 08 2026 0 1477
हुज़ैफ़ा अबरार October 14 2026 0 1435
हुज़ैफ़ा अबरार October 06 2026 0 1344
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1218
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10241
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6580
एस. के. राणा February 01 2026 0 6461
एस. के. राणा January 20 2026 0 6314
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5880
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5775
एस. के. राणा January 13 2026 0 5320
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87652
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35918
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38825
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36323
लेख विभाग March 19 2022 0 35889
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73897
एसआईआई ने 180 लाख डोज की आपूर्ति के लिए प्रति खुराक 188 रुपए कीमत बतायी है, जिसमें टैक्स शामिल नहीं
रकाश नेत्र केंद्र लखनऊ के चिकित्सा निदेशक और मुख्य विट्रोरेटिनल सलाहकार डॉ शोभित चावला ने कहा डायबिट
जून 2022 तक देश में पंजीकृत एलोपैथी डॉक्टरों की कुल संख्या 13,08,009 है। साथ ही 5.65 लाख आयुष डॉक्टर
शहरी क्षेत्रों में दैनिक रूप से कार्य कर अपना जीविकोपार्जन करने वालों को एक माह के लिए 1,000 रुपए का
भोजन करने के 8 घंटे पश्चात या खाली पेट, रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर 80 मिली ग्राम प्रति डेसी लिटर रहता
प्रस्ताव के अनुसार एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को केंद्र सरकार केे अनुरूप प्रदेश में भी मान्यता दी जाए
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते चौबीस घंटे में कोरोना वायरस के 40,953 नए केस सामने आए
स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक हर स्तर पर प्रदेश की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर सजग दिख रहे है। सोशल मीड
राज्य सरकार ने कहा कि वह अगले साल से मराठी में मेडिकल एजुकेशन की शुरुआत करेगी। राज्य के मेडिकल एजुके
सनस्क्रीन एक ऐसी तरह की तैयारी होती है जो धूप से आपको बचाती है। यह त्वचा के ऊपर की सतह पर एक लेयर बन

COMMENTS