











































प्रतीकात्मक चित्र
कानपुर (लखनऊ ब्यूरो)। मोबाइल और लैपटॉप बीते कुछ सालों में एक ऐसी जरूरत बन गई है कि लोगों का काम इनके बिना चलना मुश्किल हो जाता है। कोरोना काल के दौरान पिछले दो साल से लैपटॉप और मोबाइल का प्रयोग लगभग दस गुना बढ़ गया है। फोन के एक हद तक इस्तेमाल करने की बात तो ठीक है लेकिन कुछ लोग टॉयलेट तक में फोन लेकर जाते हैं तो खाना खाते हुए भी एक हाथ फोन की स्क्रीन पर होता है। एक बड़ी आबादी की इन आदतों ने उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में जकड़ दिया है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज (GSVM Medical College) के ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग की स्टडी (study) के अनुसार ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करने वाले लगभग 80 फीसदी लोग न्यूरॉलजिया (नसों के दर्द) का शिकार हो चुके हैं। शोध में 170 मरीजों को लिया गया, जिनमें 13 से 17 साल के किशोर और 22 से 49 साल के युवा रहे। ऐसे मरीजों के हाथों और कोहनी में असहनीय दर्द की शिकायतें रहीं।
शोध से मालूम चला कि लैपटॉप और मोबाइल (Mobile) के अत्यधिक प्रयोग से लोगों की गर्दन से लेकर कोहनी-पंजे तक में दर्द शुरू हो गया। कंधे में सुन्नता का अहसास होने लगा। बड़ी संख्या में ऐसी दिक्कतों को लेकर डॉक्टरों (doctor) के पास भीड़ पहुंचने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने रिसर्च (research) शुरू की।
ऐसे मरीजों को पहले पेन किलर (pain killer) और अन्य दवाएं दी गईं। इसके बावजूद एक महीने तक दर्द खत्म नहीं हुआ। सभी का एमआरआई और सीटी स्कैन कराया गया तो पता चला कि मोबाइल और लैपटॉप में घंटों काम करने से गर्दन की डिस्क बल्ज की वजह से विभिन्न नर्व रूटों पर दबाव पाया गया। सबसे ज्यादा दबाव गर्दन की सी 5-6, सी 6-7 की नर्व रूटों पर मिला।
जीएसवीएम के एनेस्थीसिया एंड हेड पेन क्लीनिक के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि 20 मरीजों की पेन क्लीनिक में हर दिन न्यूरॉलजिया (neuralgia) के दस रोगी आ रहे हैं। अधिकांश की समस्या गर्दन की डिस्क सी 5-6, 6-7 में है पर हर कोई समझ नहीं पा रहा है। लोगों को अलर्ट (alert) होना होगा क्योंकि लंबे समय तक यह बीमारी (disease) दूसरी समस्याएं पैदा करेगी।
ऐसे करें बचाव- To prevent neuralgia
न्यूरॉलजिया से बचाव के लिए लैपटॉप (laptop) के प्रयोग में पोजिशन ऐसी रखें कि गर्दन और कमर एक लाइन में और सीधी रहें। बीच-बीच में उठकर टहलें जरूर। मोबाइल की पोजिशन आंखों के स्तर पर लाकर दर्द कम किया जा सकता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम करने से गर्दन और कमर के दर्द से बचा जा सकता है।







हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 672
हुज़ैफ़ा अबरार May 31 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार May 31 2026 0 0
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4011
एस. के. राणा January 20 2026 0 3906
एस. के. राणा January 13 2026 0 3892
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3892
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3577
एस. के. राणा February 01 2026 0 3255
एस. के. राणा February 04 2026 0 3122
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86406
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34126
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37278
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35007
लेख विभाग March 19 2022 0 34489
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71783
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि योग अनेक बीमारियों के उपचार, रोकथाम और नियंत्रण में प्रभावी है। स्वस्थ जीवन
एचएएल-यूपी कोविड अस्पताल के सभी 255 बेड ऑक्सीजन सुविधाओं से सुसज्जित हैं। 130 बेड ऑक्सीजन से लैस हैं
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कैंटोनमेंट जरनल हॉस्पिटल में आज टीबी मरीजों को गोद ल
दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को फाइलेरिया की दवा नह
आवेदन के इच्छुक अभ्यर्थी इस लिंक पर जाकर http://uppsc.up.nic.in/Notifications.aspx पर जाकर निर्देशों
अपराधी पहले डॉक्टरों की फर्जी मार्कशीट बनाते फिर उसके आधार पर फाइनेंस कंपनी से 20,00,000 का लोन लेते
शीर्ष अदालत ने कहा कि एम्स रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे में कोई असमान्यता नहीं है। तय समय पर एम्स डिलीवर
11 साल की लड़की के पेट में जब दर्द हुआ तो उसकी जांच में होश उड़ गए। पेट में बालों का गुच्छा देखकर डॉ
"लोग सिर्फ इसलिए सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते कि टीके के दो खुराक लगवा लिए हैं। उन्हें अभी भी खुद को
साथ ही स्टडी में बताया गया है कि एस्ट्राजेनेका की पहली डोज लेने के बाद 28 दिनों में कुल 862 युवाओं म

COMMENTS