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विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस: रीजेंसी हेल्थ कानपुर का समय पर जांच और शीघ्र पहचान पर जोर

चूंकि फेफड़ा कैंसर शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता इसलिए अधिकांश मरीजों में इसका पता बीमारी के उन्नत चरण में चलता है। ऐसे में समय पर जांच और शीघ्र पहचान उपचार के बेहतर परिणामों के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. अर्जुन भटनागर कंसल्टेंट पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने कहा फेफड़ा कैंसर के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। यदि 3 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहे खांसी के साथ खून आए बिना कारण वजन कम हो सीने में दर्द सांस लेने में तकलीफ आवाज बैठना बार-बार श्वसन संक्रमण हो तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

हुज़ैफ़ा अबरार
August 02 2026 Updated: August 02 2026 00:13
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विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस: रीजेंसी हेल्थ कानपुर का समय पर जांच और शीघ्र पहचान पर जोर Image Lung Cancer

कानपुर। विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के अवसर पर रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने फेफड़ा कैंसर के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने समय पर स्क्रीनिंग कराने और बीमारी की शुरुआती पहचान की आवश्यकता पर बल दिया है। अस्पताल का कहना है यदि फेफड़ा कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए तो उपचार अधिक प्रभावी होता है और मरीज के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस पहल से अस्पताल लोगों से अपील कर रहा है कि वे फेफड़ा कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानें और बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। फेफड़ा कैंसर आज विश्वभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के अनुसार 2022 में विश्व में 25 लाख लोगों में फेफड़ा कैंसर का निदान हुआ जबकि 18 लाख लोगों की इससेे मृत्यु हुई। भारत में 2024 के दौरान पुरुषों और महिलाओं में श्वासनली (ट्रेकिया) ब्रोंकस और फेफड़ों के कैंसर के अनुमानित 1,12,659 नए मामले दर्ज किए जो इस बीमारी के बढ़ते बोझ को दर्शाते हैं।

चूंकि फेफड़ा कैंसर शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता इसलिए अधिकांश मरीजों में इसका पता बीमारी के उन्नत चरण में चलता है। ऐसे में समय पर जांच और शीघ्र पहचान उपचार के बेहतर परिणामों के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. अर्जुन भटनागर कंसल्टेंट पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने कहा फेफड़ा कैंसर के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। यदि ३ सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहे खांसी के साथ खून आए बिना कारण वजन कम हो सीने में दर्द सांस लेने में तकलीफ आवाज बैठना बार-बार श्वसन संक्रमण हो तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। यदि फेफड़ा कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो सर्जरी टार्गेटेड थेरेपी इम्यूनोथेरेपी कीमोथेरेपी अथवा इन उपचारों के संयोजन के माध्यम से कैंसर के प्रकार और अवस्था के अनुसार प्रभावी इलाज संभव है।  

डॉ. अर्जुन ने बताया तंबाकू का सेवन आज भी फेफड़ा कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन अब धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी इस बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे वायु प्रदूषण परोक्ष धूम्रपान (पैसिव स्मोकिंग) कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों के संपर्क तथा आनुवंशिक कारण जैसी कई महत्वपूर्ण वजहें हैं। बदलते जोखिम कारकों को देखते हुए विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने बताया पिछले एक दशक में प्रिसिजन मेडिसिन मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा मिनिमली इनवेसिव सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों ने फेफड़ा कैंसर के उपचार में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं। इन प्रगतियों से मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराना संभव हुआ है, जिससे न केवल जीवित रहने की संभावना बढ़ी है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। अस्पताल ने लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले एवं धूम्रपान छोड़ चुके लोगों, परोक्ष धूम्रपान के संपर्क में रहने वालों, औद्योगिक प्रदूषण, एस्बेस्टस या रेडॉन गैस के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों तथा जिनके परिवार में फेफड़ा कैंसर का इतिहास रहा हो उन्हें चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी।

पात्र उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए लो-डोज़ सीटी (LDCT) स्क्रीनिंग एक प्रभावी जांच पद्धति है, जिससे बीमारी के लक्षण प्रकट होने से पहले ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है और समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है। समग्र कैंसर देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने कहा कि अस्पताल फेफड़ा कैंसर के मरीजों को अत्याधुनिक जांच सुविधाएं, बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) उपचार तथा रोगी-केंद्रित देखभाल उपलब्ध करा रहा है। अस्पताल ने लोगों से सभी प्रकार के तंबाकू से दूर रहने, नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाने, फल एवं सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेने, जहां तक संभव हो पर्यावरणीय प्रदूषण के संपर्क को कम करने तथा लगातार रहने वाले श्वसन संबंधी लक्षणों या अन्य चेतावनी संकेतों की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। अस्पताल ने दोहराया कि समय पर पहचान और शीघ्र उपचार ही फेफड़ा कैंसर से सफलतापूर्वक लड़ने और दीर्घकालिक बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है|

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