देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

रीजेंसी हॉस्पिटल ने डिफेकेशन डिसऑर्डर पर लोगों को जागरूक किया

इस जागरूकता पहल के माध्यम से रीजेंसी हॉस्पिटल लखनऊ लंबे समय से कब्ज की समस्या से ग्रसित खासकर वे लोग जो लैक्सेटिव पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं या जिनका इलाज बार-बार फेल हो रहा है, उनको समय पर मेडिकल जांच करवाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

हुज़ैफ़ा अबरार
December 27 2025 Updated: December 27 2025 12:21
0 4949
रीजेंसी हॉस्पिटल ने डिफेकेशन डिसऑर्डर पर लोगों को जागरूक किया प्रतीकात्मक

लखनऊ। रीजेंसी हॉस्पिटल लखनऊ मे डिफेकेशन डिसऑर्डर (मल त्याग संबंधी बीमारियों) पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डिफेकेशन डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति होती है जिसका अक्सर निदान नहीं हो पाता है, लेकिन अब इसे दीर्घकालिक कब्ज होने के एक बड़े मूक कारण के रूप में पहचाना जा रहा है।

इस समस्या पर बात करते हुए रीजेंसी हॉस्पिटल लखनऊ के कंसल्टेंट- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी डॉ. पीयूष कुमार ठाकुर ने कहा जब रूटीन दवाएं, फाइबर सप्लीमेंट्स और खानपान में बदलाव के बाद भी आराम नहीं मिलता तो कई मरीज़ निराश हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर समस्या मल नहीं होती, बल्कि मल त्याग के दौरान श्रोणि तल की मांसपेशियों का खराब तालमेल होता है। डिससिनर्जिक डेफिकेशन एक कार्यात्मक समस्या है जिसे अगर खास तौर पर जांचा न जाए तो आसानी से दरकिनार किया जा सकता है।

एक बार जब बीमारी की सही पहचान हो जाती है, तो इलाज कहीं ज़्यादा लक्षित, प्रभावी और टिकाऊ हो जाता है। ऐसा होने से मरीज़ों को सामान्य मल त्याग करने में मदद मिलती है और उनकी जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। रीजेंसी के डॉक्टरों ने कहा कि कब्ज यानी अपच की बीमारी ख़राब डाइट, कम पानी पीने और शारीरिक गतिविधि की कमी की वजह से से होती है। हालांकि बहुत सारे मरीज़ अपनी जीवनशैली आदतों में बदलाव करने और दवाइयों के सेवन के बाद भी लक्षणों का अनुभव करते हैं। इस तरह के कई केसों में इसका आंतरिक मूल कारण डिससिनर्जिक डेफिकेशन (मलत्याग के दौरान आंत और पेल्विक मांशपेशियों का तालमेल न होना) होता है। यह एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें मल त्याग के दौरान पेल्विक फ्लोर (श्रोणि तल) की मांसपेशियां ठीक से शिथिल नहीं होतीं, जिससे मल त्याग करना मुश्किल, अधूरा और कष्टदायक हो जाता है।

इस बीमारी से ग्रसित मरीज अक्सर मल त्याग के दौरान बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाने, पेट पूरी तरह सा$फ न होने का लगातार एहसास, टॉयलेट में ज़्यादा समय बिताने, और कुछ केसों में मल निकालने के लिए उंगलियों का इस्तेमाल करने की शिकायत करते हैं। नैदानिक साक्ष्यों के अनुसार, क्रोनिक कब्ज़ वाले लगभग 40 से 50 प्रतिशत मरीज़ों को डिससिनर्जिक डेफिकेशन हो सकता है। इतनी ज़्यादा आम होने के बावजूद कम जागरूकता और मरीज़ों में पेट से जुड़ी समस्याओं पर बात करने में झिझक के कारण इस बीमारी का निदान नहीं हो पाता है।

मल त्याग से जुड़ी समस्याओं का सही पता लगाने के लिए रीजेंसी हॉस्पिटल, लखनऊ एनोरेक्टल मैनोमेट्री का इस्तेमाल करता है। यह एक खास नैदानिक जांच है, जिसमें रेक्टल पुश प्रेशर को मापा जाता है और मल त्याग के दौरान गुदा की मांसपेशियां की शिथिलता की जांच की जाती है। यह टेस्ट यह पता करने में मदद करता है कि मल त्याग के दौरान श्रोणि तल की मांसपेशियां सही से काम कर रही हैं या नहीं।

निदान के आधार पर मरीज़ों का इलाज बायोफीडबैक थेरेपी से किया जाता है। यह थेरेपी एक गैर चीरफाड़ वाला इलाज का तरीका है। यह मरीज़ों को वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देता है ताकि वे सीख सकें कि मल त्याग के दौरान अवरोधिनी गुदा (एनल स्फिंक्टर) और श्रोणि तल की मांसपेशियों को कैसे शिथिल करें। यह थेरेपी आंतों के स्वाभाविक तालमेल को ठीक करने में मदद करती है और लैक्सेटिव पर लंबे समय तक निर्भरता को कम करती है।

इस जागरूकता पहल के माध्यम से रीजेंसी हॉस्पिटल लखनऊ लंबे समय से कब्ज की समस्या से ग्रसित खासकर वे लोग जो लैक्सेटिव पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं या जिनका इलाज बार-बार फेल हो रहा है, उनको समय पर मेडिकल जांच करवाने के लिए प्रोत्साहित करता है। डॉक्टर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि शुरुआती जांच और सही इलाज से लंबे समय तक होने वाली परेशानी को रोका जा सकता है और मरीज़ों को शर्म या गलत जानकारी की वजह से इलाज में देरी करने से बचाया जा सकता है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

जानिये, यूपी का कौन सा जिला नशे के कारोबार में है सबसे आगे

जानिये, यूपी का कौन सा जिला नशे के कारोबार में है सबसे आगे

श्वेता सिंह September 04 2022 30782

बिहार बॉर्डर से सटे इस जिले में शराब की तस्करी के मामले इस साल के आठ महीने में 1601 धंधेबाजों पर कार

मुंबई हाईकोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी को दिया बेबी पाउडर बेचने की इजाजत

मुंबई हाईकोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी को दिया बेबी पाउडर बेचने की इजाजत

विशेष संवाददाता January 14 2023 31498

महाराष्ट्र सरकार ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के बेबी पाउडर की मैन्युफैक्चरिंग के लाइसेंस को रद्द कर दिय

दिल्ली में ‘ओमीक्रोन’ संक्रमण का पहला मामला सामने आया।

दिल्ली में ‘ओमीक्रोन’ संक्रमण का पहला मामला सामने आया।

एस. के. राणा December 05 2021 25116

ओमिक्रोन संक्रमित मरीज का इस समय लोक नायक अस्पताल में उपचार किया जा रहा है और उसे बीमारी के मामूली ल

आयुर्वेद से कैंसर लिवर, किडनी फेल का इलाज संभव: डा पुनीत तिवारी  

हुज़ैफ़ा अबरार February 27 2023 41620

हिम्स में शरीर की अंदरूनी शक्ति बढ़ाकर किडनी, कैंसर, लिवर, शुगर, बीपी और दिल के रोगों को रिवर्स करने

गणतंत्र दिवस पर लगेगा कैंसर निवारण कैंप

गणतंत्र दिवस पर लगेगा कैंसर निवारण कैंप

विशेष संवाददाता January 25 2023 26818

जिला अस्पताल में 26 जनवरी को राष्ट्रीय कैंसर निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत नि:शुल्क कैंसर परामर्श तथा

होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व

होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व

लेख विभाग March 29 2021 37589

होली का त्यौहार एवं उससेे जुड़ी बसंत ऋतु दोनों ही पुरुषार्थ के प्रतीक हैं। इस अवसर पर प्रकृति सारी खु

प्रकृति के साथ जीवन व्यतीत करेंः डा. शाही

प्रकृति के साथ जीवन व्यतीत करेंः डा. शाही

आनंद सिंह April 07 2022 36435

आइएमए, गोरखपुर के तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। संदेश यही था कि अब अगर लोग प्रकृति क

कोरोना वायरस के एक्सई वैरिएंट से गंभीर खतरा नही: डॉ. एनके अरोडा

कोरोना वायरस के एक्सई वैरिएंट से गंभीर खतरा नही: डॉ. एनके अरोडा

एस. के. राणा April 11 2022 35615

कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट कई नए वैरिएंट को बढ़ावा दे रहा है। इनमें से एक्सई श्रृंखला के एक्सई व अन्

देश में मिला मंकीपाक्स संक्रमण यूरोप के वैरिएंट से अलग है: आईसीएमआर

देश में मिला मंकीपाक्स संक्रमण यूरोप के वैरिएंट से अलग है: आईसीएमआर

विशेष संवाददाता August 08 2022 28597

देश में मिले पहले दो मंकीपाक्स संक्रमण मामलों से पता चला है कि वैरिएंट यूरोप में फैले संक्रमण से अलग

दिल्ली में बना देश का सबसे बड़ा होम्योपैथिक संस्थान, केंद्रीय मंत्री ने किया लोकार्पण

दिल्ली में बना देश का सबसे बड़ा होम्योपैथिक संस्थान, केंद्रीय मंत्री ने किया लोकार्पण

विशेष संवाददाता August 27 2022 37198

दिल्ली के नरेला में निर्मित यह संस्थान देश का सबसे बड़ा होम्योपैथिक संस्थान होने के साथ ही उत्तरी भा

Login Panel