












































प्रतीकात्मक
लखनऊ। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (16 मार्च) पर 12 से 14 साल के बच्चों को कोविड टीके (कोर्वेवैक्स) की सौगात मिलने जा रही है, इसकी दूसरी डोज बच्चों को पहले टीके के 28 दिन बाद दी जायेगी । इसके तहत जल्द से जल्द प्रदेश के 12 से 14 साल के करीब 85 लाख बच्चों का टीकाकरण कर कोरोना से सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही अब 60 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को एहतियाती डोज लगायी जायेगी, अब को-मार्बिड की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया गया है ।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के महाप्रबन्धक- टीकाकरण डॉ. मनोज शुकुल का कहना है कि बच्चों को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित बनाने में टीकों की अहम् भूमिका है । राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनऍफ़एचएस-5) वर्ष 2019-21 के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में अब भी 12 से 23 माह के करीब 70 फीसद बच्चों (वैक्सीनेशन कार्ड व माँ से पूछताछ के आधार पर) को ही पूर्ण प्रतिरक्षित किया जा सका है, जिसे शत-प्रतिशत करने की सख्त जरूरत है । इससे इतर वैक्सीनेशन कार्ड के आधार पर देखें तो करीब 78 फीसद बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (King George's Medical University) के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के कोविड टीकाकरण के ब्रांड एम्बेसडर डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि टीके के बल पर ही देश को पोलियो और चेचक को ख़त्म करने में सफलता मिली है । टीके के बल पर ही खसरा, जापानी इन्सेफ़लाइटिस (जेई) व टिटनेस जैसी बीमारियों पर काफी हद तक नियन्त्रण पा लिया गया है । बच्चों को बीसीजी का टीका दिया जा रहा है ताकि टीबी का शरीर के अंदर फैलाव रोका जा सके । गलाघोंटू, काली खांसी, डिप्थीरिया, डायरिया जैसी तमाम बीमारियों से बच्चों को सुरक्षित बनाने के लिए आज हमारे पास टीके मौजूद हैं, जिन्हें नियमित टीकाकरण के तहत देकर बच्चों को पूर्ण प्रतिरक्षित बनाने की कोशिश चल रही है ।
डॉ. मनोज शुकुल का कहना है कि आज इस राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर हर किसी को जागरूक होने की जरूरत है कि वह बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण जरूर कराएँ ताकि उनके अंदर बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्यूनिटी) पैदा हो सके और उनका समुचित विकास सुनिश्चित हो सके । बच्चों को सुपोषित बनाने में भी टीकों की बड़ी भूमिका है क्योंकि टीके से वंचित बच्चा यदि लम्बे समय तक दस्त (डायरिया) का शिकार हो गया तो उसका समुचित विकास बाधित हो जाएगा । इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, जिससे इस तरह के बच्चे पढाई-लिखाई में भी पिछड़ जाते हैं जिससे उनका पूरा जीवन चक्र प्रभावित होता है ।
डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि कोरोना से लोगों को सुरक्षित बनाने के लिए पिछले साल 16 जनवरी से टीकाकरण की शुरुआत हुई थी, जो कि अब तक का सबसे तेज टीकाकरण अभियान साबित हुआ है । टीके की डोज ज्यादा जोखिम वालों को पहले देने के साथ अभियान शुरू हुआ था । इसी क्रम में स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर, 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, बीमार लोगों और फिर 45 साल से अधिक उम्र के लोगों का कोविड टीकाकरण किया गया । इसके बाद 18 साल से अधिक उम्र वाले वयस्कों और फिर 15 से 18 साल वालों को टीके की खुराक दी गयी । अब बुधवार से 12 से 14 साल (जनवरी 2008 से 15 मार्च 2010 के बीच जन्म वाले बच्चे) के बच्चों को भी कोरोना से सुरक्षित बनाने के लिए टीके की शुरुआत होने जा रही है । इसलिए बच्चों को कोरोना से सुरक्षित बनाने के लिए लोग आगे आयें और जल्दी से जल्दी टीकाकरण कराएँ । इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कोरोना अभी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है, इसलिए टीकाकरण के साथ ही कोविड प्रोटोकाल (Covid Protocol) का भी पूरी तरह से ख्याल रखा जाए । होली का त्योहार करीब है, इसलिए ध्यान रखें कि होली पर गले मिलने की जगह दूर से ही अभिवादन कर होली की मुबारकबाद दें । घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाकर रखें और हाथों की स्वच्छता का भी ख्याल रखें।
वर्ष 1995 से मनाया जा रहा दिवस:
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1995 में मुंह के जरिये दी जाने वाली पोलियो की खुराक की शुरुआत के साथ हुई थी, तब से हर साल 16 मार्च को हर किसी को बीमारियों से सुरक्षित बनाने के लिए टीके की अहमियत समझाई जाती है । डॉ. शुकुल का कहना है कि एक बड़ी त्रासदी के रूप में आये कोविड-19 से ही हम देश की बड़ी आबादी को कोरोना से सुरक्षित बनाने में सफल हो सके हैं । इसलिए समुदाय के हर वर्ग को अब जागरूक होना होगा कि देश के नौनिहालों का नियमित टीकाकरण कराने के साथ ही कोविड टीकाकरण भी कराएँ ताकि वह देश के विकास के भागीदार बन सकें।







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