












































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। प्रदेश में कोरोना के बाद मंकी पॉक्स, टोमैटो पॉक्स, लम्पी वायरस के बीच संक्रामक रोगों के साथ डेंगू, मलेरिया, वाइरल फीवर ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर चिंतित है और जापानी इंसेफेलाइटिस के सम्भावित खतरे को देखते हुए डीजी हेल्थ ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को सतर्क हो जाने के लिए कहा है।
प्रदेश में कोरोना (corona) पूरी तरह से गया नहीं था कि मंकी पॉक्स (monkey pox), टोमैटो पॉक्स (tomato pox) और लम्पी वायरस (lumpy virus) ने दस्तक दे दी। इसी बीच बेमौसम की बेहिसाब बारिश ने भी कहर ढाया और डेंगू (dengue), मलेरिया (malaria), वाइरल फीवर (viral fever) और हर साल की तरह बिना बुलाए पहुंच गए। ज्यादातर बच्चे इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं जिससे जेई व एईएस रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
तमाम बीमारियों का गठबंधन देख कर स्वास्थ्य विभाग चिंतित है तिस पर जेई (Japanese encephalitis) व एईएस (AES) का खतरा अलग से मंडरा रहा है। डीजी हेल्थ (DG Health) ने सभी चिकित्सा अधिकारियों (medical officers) को सतर्क हो जाने के लिए कहा है। प्रदेश के लगभग दर्जन भर जिलों में बुखार का भयंकर प्रकोप है और संक्रामक बीमारियां फैलती ही जा रही हैं।
डीजी हेल्थ डॉ लिली सिंह (Dr Lilly Singh) ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को निर्देशित किया है कि बुखार के हर मरीज की जांच की जाए और जो बीमारी निकल कर आए वो फैलनी (disease spread) नहीं चाहिए। बीमारी की पुष्टि होने पर आस-पास के इलाकों में वृहद बचाव कार्य चलाया जाए।
डॉ लिली सिंह ने साफ कहा कि जहां भी डिप्थीरिया (diphtheria), जेई, एईएस आदि के लक्षण मिले उनके बारे में तत्काल प्रदेश मुख्यालय को सूचना दें। जहां दवा अथवा अन्य सामग्री कम हो, उसका तत्काल इंतजाम किया जाए। जेई और एईएस पीड़ितों के उपचार के लिए बने वार्ड को तुरन्त ठीक कर लें और अस्पतालों (hospitals) में दवाओं (medicines) की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें।
हालाँकि मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा (Durga Shankar Mishra) ने 1 अक्टूबर से विशेष संचारी रोग (communicable disease) अभियान चलाने का आदेश दिया है लेकिन इसमें अभी एक पखवाड़ा बाकी है।







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