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आईएमए लखनऊ (IMA Lucknow) के सचिव डॉ संजय सक्सेना ने बताया कि साल में दो बार स्टेट लेवल रिफ्रेशर कोर्स (Refresher Course) और सीएमई (CME) का आयोजन किया जाता है। इसमें केजीएमयू (KGMU), एसजीपीजीआई (SGPGI), प्राइवेट हॉस्पिटल्स जैसे चरक (Charak hospital), अपोलो (Apollo hospital) और मेदांता (Medanta hospital) आदि के डॉक्टर्स शामिल हुए। दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) से डॉ ममता भूषण सिंह, न्यूरो फिजीशियन (Neuro Physician) ने नयी तकनीक की जानकारी दी।
इस सीएमई में लखनऊ और पूरे प्रदेश से डॉक्टर्स आएं थे, एक दूसरे के बीच नॉलेज का आदान-प्रदान हुआ। डॉ अमित यादव और डॉ एलाय मजूमदार ने आँखों को लेकर डायबटीज (diabetes complications) तथा कॉम्प्लीकेशंस के बारे में जानकारियां दी। डॉ अनीता सिंह ने गायनी के अच्छे टॉपिक्स उठाए और सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) पर जानकारी दी। डॉ पूनम मिश्रा ने कॉस्मेटिक गायनकॉलजी (Cosmetic Gynecology) पर बोला। इसमें बहुत से टॉपिक्स कवर हुए।
इसके बाद आंकोलॉजी (oncology) के डॉक्टर्स ने सेशन किए। चरक हॉस्पिटल के आंको सर्जन्स भी आए और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ अरुण कुमार ने अपना व्याख्यान दिया।
कैंसर सर्जन (Cancer Surgeon) डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव, एसोशिएट प्रो हिन्द मेडिकल कॉलेज (Hind Medical College) ने कहा कि सीएमई में नए डेवलेप्मेंट्स और नयी तकनीक की जानकारियां डॉक्टर्स को दी गई। यूपी में कैंसर स्पेशलिट्स (cancer specialists) की भारी कमी हैं जिसके कारण कैंसर मरीजों का इलाज समुचित रूप से नहीं हो पा रहा है। इसके कारण कैंसर लेट डायग्नोस्ट होता है और तब तक लास्ट स्टेज आ जाती है।
यूपी सरकार का ध्यानाकर्षित करते हुए डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यहाँ 75 जिले हैं जिनमें से केवल 8 जिलों में कैंसर का इलाज हो रहा है। पूरे प्रदेश में कैंसर सर्जरी की ट्रेनिंग (Cancer surgery training) केवल लखनऊ के केजीएमयू और लोहिया अस्पताल (Lohia Hospita) में होती है। इसके अलावा कहीं भी यह ट्रेनिंग नहीं होती है, ये काफी कम है।
प्रदेश में कैंसर स्पेशलिट्स की भारी कमी के चलते नॉन कैंसर स्पेशलिट्स को इलाज करना पड़ता है। इससे मरीज का समुचित इलाज नहीं हो पाता और मरीज असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। सरकार से निवेदन करते हुए डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिकल कॉलेज तो खूब बन रहें हैं लेकिन उनमे कैंसर सर्जरी और रेडियो थैरेपी (radiotherapy) विभाग नहीं है। प्रदेश में लगातार बढ़ रहें कैंसर रोगियों के इलाज के लिए डॉक्टर्स की संख्या भी बढ़नी चाहिए।







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