












































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। भारत में 77 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज के शिकार हैं और इनमें से अनुमानित 18 प्रतिशत लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी डीआर से पीडि़त हैं। इस चिंताजनक आँकड़े के बावजूद भारत में डायबिटीज के तीव्र और अपरिवर्तनीय परिणामों जैसे कि डायबिटिक रेटिनोपैथी डीआर के बारे में जागरूकता का स्तर निराशाजनक है। डीआर कामकाजी 20 से 65 वर्ष आयु के वयस्कों में दृष्टि.दोष का प्रमुख कारण है।
विश्व स्तर पर डायबिटीज के हर 3 मरीजों में से 1 को डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा (DME) होने की आशंका रहती है। आँखों की, विशेषकर डायबिटीज से पीडि़त (diabetic patients) और बुजुर्गों के लिए सामान्य जाँच से रोग का समय पर निदान और प्रबंधन करना आसान होता है।
डायबिटिक रेटिनोपैथी (diabetic retinopathy) का पता चलने पर, डायबिटीज के प्रभावकारी प्रबंधन और नेत्ररोगों (eye diseases) की वृद्धि रोकने के लिए उपचार का पालन करना और स्वास्थ्यकर जीवनचर्या बनाए रखना ज़रूरी हो जाता है।
प्रकाश नेत्र केंद्र लखनऊ के चिकित्सा निदेशक और मुख्य विट्रोरेटिनल सलाहकार (Vitreoretinal Consultant) डॉ शोभित चावला ने कहा डायबिटीज (diabetes) की बढ़ती घटना के साथ अनुमान है कि डायबिटीज के शिकार हर 3 लोगों में से 1 व्यक्ति डायबिटिक रेटिनोपैथी से प्रभावित है और युवा कामकाजी आयु वाले वयस्कों में यह अंधापन का प्रमुख कारण है।
भारत में महामारी की दूसरी लहर के बाद डायबिटीज के नए मामले आए। डायबिटीज के सभी मरीजों में से अनुमानित 16 प्रतिशत लोगों को रेटिनोपैथी हो जाता है, जिनमें 5 प्रतिशत को उन्नत अवस्था की रेटिनोपैथी है जिसके कारण स्थाई अंधापन (permanent blindness) हो सकता है।
डा. शोभित ने कहा कि अनियंत्रित डायबिटीज के कारण आँखों के अनेक रोग हो सकते हैं। इन रोगों में डीआर और कैटरेक्ट मोतियाबिंद (Cataract Glaucoma) जिसमें आँखों के लेंस पर झिल्ली बन जाती है और ग्लूकोमा शामिल हैं जिससे ऑप्टिक नर्व दृग तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो सकती है। डायबिटीज के कारण आप आँखों से जुड़े रोगों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो सकते हैं या फि र कम उम्र में ही इसके शिकार हो सकते हैं।







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