देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

डा. अर्चना ने सुसाइड नहीं किया, यह दोषी सिस्टम के कारण हुई हत्या है: डा. आर.एन. सिंह

घटना का संज्ञान लेकर राजस्थान सरकार ने तत्काल अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की है पर इतने बड़े अपराध के लिये मात्र ट्रांसफर व सस्पेंशन का कदम पर्याप्त नहीं है। घटना में संलिप्त लोगों को दफा 302 के तहत मुजरिम बनाना ही यथोचित होगा।

आनंद सिंह
April 02 2022 Updated: April 02 2022 13:59
0 42830
डा. अर्चना ने सुसाइड नहीं किया, यह दोषी सिस्टम के कारण हुई हत्या है: डा. आर.एन. सिंह डा. आर.एन. सिंह

गोरखपुर। राजस्थान के दौसा की लेडी डाक्टर डा. अर्चना शर्मा ने खुदकुशी नहीं की वरन लोगों ने उन्हें मार डाला। सिस्टम तो बना हुआ था। सिस्टम चलाने वालों ने सिस्टम को तोड़ दिया। उसका नतीजा ये हुआ कि डा. अर्चना ने मौत को गले लगा लिया। मुझे लगता है, ये सिस्टम तोड़ने वालों की गलती है। अर्चना ने खुदकुशी नहीं की। उन्हें सिस्टम वालों ने जबरिया मार डाला।

आज से पांच साल पहले जस्टिस काटजू ने एक व्यवस्था दी थी कि अगर इस किस्म की कोई घटना हो जाए, जिसमें इलाज के दौरान मरीज की मौत हो जाए तो तब तक प्रथमिकी दर्ज न की जाए, जब तक डाक्टरों की एक टीम बना कर पूरे मामले की जांच न हो। टीम की अनुशंसा के मुताबिक ही आगे की कोई कार्रवाई की जाए। जस्टिस काटजू ने जो व्यवस्था दी थी, उसका एक रत्ती भी पालन नहीं किया गया। मुझे लगता है, डा. अर्चना के प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान ले सकता है क्योंकि इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की ही अवहेलना हुई है।

जहां तक मैं समझ पाया हूं, डा. अर्चना के केस में इस आदेश की सौ प्रतिशत अवमानना की गई है। राजस्थान में पुलिस और प्रशासन ने सत्ता की हनक में अपनी शक्तियों का वीभत्स मिसयूज किया है। चंद घंटों में एक चिकित्सक के ऊपर धारा 302 की जैसी कार्रवाई कर दी गई, उतनी तेजी तो कुख्यात बदमाशों पर भी कार्रवाई करने में नहीं दिखाई जाती। ठीक है कि प्रशासन पर दबाव था तो क्या उस दबाव से खुद को बचाने के लिए आप मनमानी करेंगे।

चंद अराजक तत्वों के धरना-दबाव-प्रताड़ना से तंग आकर आप एक सम्मानित महिला चिकित्सक के खिलाफ धारा 302 के तहत केस दर्ज कर लेंगे। अगर धारा 302 के तहत केस न होता तो आज डा. अर्चना हम लोगों के बीच होती। उनका ट्रैक रिकार्ड शानदार रहा है। लेकिन, इन बातों पर कानून के अंधे सिपाहियों ने ध्यान ही नहीं दिया। कर दिया धारा 302 के तबत मुदमा दर्ज और छोड़ दिया महिला चिकित्सक को घुट-घुट कर मरने के लिए। अंततः डिप्रेस्ड होकर उन्होंने एक सुसाइड नोट लिखा और अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

पूरे केस को देखने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि इस पूरे प्रकरण में गंभीर अपराध तो वहां की पुलिस और प्रशासन के अफसरों और अराजक तत्वों ने किया है। यह ठीक है कि घटना का संज्ञान लेकर राजस्थान सरकार ने तत्काल अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की है पर इतने बड़े अपराध के लिये मात्र ट्रांसफर व सस्पेंशन का कदम पर्याप्त नहीं है। संबंधित अपराधियों (प्रशासन व अराजक सामाजिक तत्व) पर दफा 302 के तहत उन्हें भी मुजरिम बनाना ही यथोचित होगा। फिर भी राजस्थान सरकार ने कम से कम कुछ दंड तो तत्काल दिया है। यह बात अलग है कि जुर्म के हिसाब से वह अपर्याप्त है। दरअसल यहां सिर्फ एक चिकित्सक की हत्या नहीं हुई है। यहां हजारों सम्मानित नागरिकों के भरोसे की हत्या हुई है जिनको जीवित रहते वह चिकित्सिका बचा सकती। बड़ा अपराध हुआ है यह राजस्थान में।

मैं मानता हूं और मांग करता हूं कि इस पूरे एपिसोड में केंद्र के शीर्ष सदन व नेताओं को चिकित्सकों की सुरक्षा के लिये बने हुए कानून को कड़ाई से लागू कराया जाए। यह सौ फीसद सत्य है कि जब चिकित्सक इलाज करेगा तो लोग स्वस्थ होंगे पर कभी-कभी वह हर प्रयास के बाद भी मरीज को नहीं बचा पायेगा। डाक्टर, सिर्फ डाक्टर होता है। वह अंतिम कोशिश यही करता है कि मरीज बच जाए। अगर वह नहीं बचा पाता है तो मानना पड़ेगा कि मौत शास्वत सत्य है। इसे सभी को स्वीकारना ही होगा

मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि चिकित्सक समुदाय व मीडिया को छोड़कर लोकतंत्र के सभी स्तंभों ने खामोशी ओढ़ रखी है। यह खामोशी खतरनाक है और सच मानिए, बेहद पीड़ादायक है। अगर याद करें तो यह वही चिकित्सक समुदाय है, जिसने करोना के त्रासद काल में लाखों लोगों की जान बचाने के लिये अपनी व अपने परिजनों की प्राणाहुति दी है। कोई 1300 चिकित्सक व इससे अधिक उनके परिजन, नागरिकों को करोना से उबारने में मृत्यु को प्राप्त हुए। इन फ्रंट वारियर्स के सम्मान में फूलों की बारिश, थाली बजाना, देश भर में दीपावली को भी मात देने वाला उजाला कराना आदि सम्मान की पराकाष्ठाएं अयोजित की गईं थीं पर मेरी अल्प जानकारी में अभीतक किसी बड़े राजनेता ने संवेदना के दो शब्द भी नहीं कहे हैं। इतना बदलाव चंद महीनों में आश्चर्यजनक व कष्टदायक है। क्यों, लोगों की जुबान पर ताला पड़ गया है?

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

केजीएमयू में एक और सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया

केजीएमयू में एक और सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया

आरती तिवारी February 26 2023 61942

एक महिला ने अपने 22 वर्षीय बेटे को अपनी एक किडनी दान कर दी। इससे उसे नया जीवन मिला। किंग जॉर्ज मेडिक

तगड़ी बॉडी बनाने के लिए महंगे प्रोटीन की बजाए 2 मिनट में घर पर ही बनाएं ये नैचुरल शेक

तगड़ी बॉडी बनाने के लिए महंगे प्रोटीन की बजाए 2 मिनट में घर पर ही बनाएं ये नैचुरल शेक

श्वेता सिंह August 22 2022 37444

मार्केट में कई तरह के प्रोटीन पाउडर हैं, जिनमें अक्सर मिलावट की खबरें आती हैं। जाहिर है इस तरह के उत

केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर ने 14 ने टीबी के मरीजों को गोद लिया

केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर ने 14 ने टीबी के मरीजों को गोद लिया

रंजीव ठाकुर April 16 2022 29122

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने ने बताया कि देश के प्रधानमन्त्री ने वर्ष 2025 तक भारत को ट

कौशल विकास कार्यक्रम के तहत सीएसआईआर और केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान संचालित करेगा रोजगारपरक कार्यक्रम।

कौशल विकास कार्यक्रम के तहत सीएसआईआर और केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान संचालित करेगा रोजगारपरक कार्यक्रम।

हे.जा.स. January 28 2021 20946

इन पाठ्यक्रमों को कौशल विकास कार्यक्रम के तहत संचालित किया जाएगा।जिनकी अवधि पूरी होने पर छात्र हेल्थ

अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल कॉलेज का सीएम खट्टर ने किया शुभारंभ

अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल कॉलेज का सीएम खट्टर ने किया शुभारंभ

हे.जा.स. April 08 2023 31015

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ किया। दो दिवसीय C 20 शिखर

स्वास्थ्यकर्मी सुधीर वर्मा का सराहनीय कार्य, जरूरतमंद को किया रक्तदान

स्वास्थ्यकर्मी सुधीर वर्मा का सराहनीय कार्य, जरूरतमंद को किया रक्तदान

विशेष संवाददाता March 29 2023 29997

गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल लाया गया था, लेकिन अचानक से डॉक्टरों ने खून की मांग की,

Effectiveness of an intervention for reducing sitting time and improving health in office workers: three arm cluster randomised controlled trial

Effectiveness of an intervention for reducing sitting time and improving health in office workers: three arm cluster randomised controlled trial

British Medical Journal January 16 2023 25446

Both SWAL and SWAL plus desk were associated with a reduction in sitting time, although the addition

लोहिया अस्पताल में कारगिल विजय दिवस पर बिना रिप्लेसमेंट मिलेगा रक्त और रक्त अवयव

लोहिया अस्पताल में कारगिल विजय दिवस पर बिना रिप्लेसमेंट मिलेगा रक्त और रक्त अवयव

रंजीव ठाकुर July 26 2022 27270

डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर जरूरतमन्द मरीजों को रक्

आचार्य मनीष ने लखनऊ में किया 100 बेड वाले हिम्स अस्पताल का उद्घाटन

आचार्य मनीष ने लखनऊ में किया 100 बेड वाले हिम्स अस्पताल का उद्घाटन

रंजीव ठाकुर August 23 2022 453732

किडनी फेल, लिवर फेल और कैंसर के मरीजों के लिए हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेस

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मिला आईएमए का प्रतिनिधि मंडल

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मिला आईएमए का प्रतिनिधि मंडल

रंजीव ठाकुर August 04 2022 27305

इण्डियन मेडिकल एसोसियेशन लखनऊ शाखा के एक प्रतिनिधि मंडल ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर स्

Login Panel