











































लखनऊ। मेदांता सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में एडवांस न्योनेटल रिसेसीटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों से पीडियाट्रिशियंस व नर्सों (nurses) को ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया।
ट्रेनिंग प्रोग्राम में फर्स्ट गोल्डन मिनट प्रोजेक्ट (First Golden Minute Project) की जानकारी दी गई जिसमें प्रदेश भर से आए पीडियाट्रिशियन (paediatricians) व नर्सों को पैदा होने वाले बच्चों के पहले महत्वपूर्ण एक मिनट के बारे में लाइव डेमो ट्रेनिंग दी गई। कार्यक्रम के समन्वयक मेदांता अस्पताल के नियोनेटल यूनिट (Neonatal Unit) के हेड एवं सीनियर कंसल्टेंट डॉ आकाश पंडिता थे।

डॉ आकाश पंडिता ने बताया कि ये प्रोग्राम इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड नेशनल न्यूनेटोलॉजी फोरम की ओर से आयोजित किया जाता है। चार वर्ष के बाद ये ट्रेनिंग कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित हुआ है। इसे इस बार मेदांता सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल (Medanta Superspecialty Hospital) ने आयोजित करवाया है।
डॉ पंडिता ने बताया कि कई बार पैदा होते समय नवजात रोते नहीं है इसका कारण होता है कि किसी न किसी वजह से उनके ब्रेन में ऑक्सीजन (oxygen) नहीं पहुंच पाती है। इसे बर्थ एस्फिक्सिया (asphyxia) कहते हैं। ऐसे में अगर कोई ट्रेंड पीडियाट्रिशिन मौजूद न हो तो बच्चे की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने जानकारी दी कि निओनेटल डेथ (neonatal death) के प्रमुख कारण हैं प्रीमैच्योरिटी इंफेक्शन बर्थ एस्फिक्सिया होते हैं। यूपी में बर्थ एस्फिक्सिया से नवजातों की मरने का प्रतिशत 20 से 25 प्रतिशत तक है। उन्होंने ट्रेनिंग में बताया कि डिलीवरी (delivery) कराने के बाद बच्चे का पहला मिनट गोल्डन मिनट होता है।

अगर बच्चा पैदा होने के बाद रोया नहीं तो ये बर्थ एक्फेक्सिया के कारण होता है। ऐसे में नवजात के लिए ये गोल्डन पीरयड होता है ये एक मिनट बर्बाद हो गया तो उसकी मौत भी हो सकती है। अगर बच्चा किसी तरह से बच भी जाता है तो वह मानसिक रूप से अक्षम हो जाता है। साथ ही कहा कि डिलीवरी के समय एक प्रशिक्षित पीडियाट्रिशियन व नर्स की जरूरत होती है। अगर पैदा होने पर बच्चे को ये समस्या हो
इसके बाद पीडियाट्रिशियन को बुलाया जाए तो वो एक मिनट का गोल्डन समय चला जाता है। ऐसे में बच्चे की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
डॉ पंडिता ने बताया हमारे हॉस्पिटल में हर डिलीवरी के समय एक प्रशिक्षित पीडियाट्रिशियन व ट्रेंड नर्सेस मौजूद रहती हैं। साथ ही हमारे यहां नियोनेटल केयर की पूरी यूनिट भी है। हमारा हॉस्पिटल समय समय पर इस तरह की वर्कशाप आयोजित करता रहता है।

हमारा मकसद अभिभावकों को भी जागरूक करना है कि वो जब भी डिलीवरी के लिए जाएं तो हॉस्पिटल में इन हाउस पीडियाट्रिशियन्स भी देंखे ताकि नवजात को किसी भी तरह की समस्या होने पर रेफर करने की नौबत न आए। अमूमन 90 फीसद डिलीवरी में नवजात को रिससिटेशन (resuscitation) की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन 10 फीसद मामलों में पड़ती है। बर्थ एस्फिक्सिया नार्मल डिलीवरी में भी हो सकता है।
इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि बर्थ एस्फिक्सिया से ग्रसित बच्चे को 72 घंटे तक हाइपोथर्मिया की थेरेपी दी जाती है। शहर में मेदांता हास्पिटल मात्र ऐसा हॉस्पिटल है जहां ये सुविधा मौजूद है। कार्यक्रम में प्रदेश भर से 50 से ज्यादा पीडियाट्रिशियन व नर्सेस ने भाग लिया।







एस. के. राणा January 13 2026 0 3556
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3556
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3381
एस. के. राणा January 20 2026 0 3346
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3101
एस. के. राणा February 01 2026 0 2786
एस. के. राणा February 04 2026 0 2583
उत्तर प्रदेश
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102418
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106946
सौंदर्या राय March 03 2023 0 107199
admin January 04 2023 0 107054
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97530
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85925
आयशा खातून December 05 2022 0 140525
लेख विभाग November 15 2022 0 109596
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158834
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109788
लेख विभाग October 23 2022 0 94674
लेख विभाग October 24 2022 0 98055
लेख विभाग October 22 2022 0 103778
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106718
लखनऊ शहर के लगभग सभी इलाकों में डेंगू और डायरिया के मामले प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल के
टमाटर या फिर इससे बने प्रोडक्ट्स के सेवन से हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, मधुमेह, फेफड़े, स्तन और पेट के
दही वैसे खुद ही बहुत गुणों से भरपूर है। आपके फ्रिज से लेकर किचन में ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो मिनटों
कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव जिम में वर्कआउट करने के दौरान हार्ट अटैक के शिकार हो गए थे और पूरा बॉलीवुड
दो अरब टीकों में से चीन, भारत और अमेरिका को मिली 60 प्रतिशत खुराकों को ‘‘घरेलू रूप से खरीदा और इस्ते
मिली जानकारी ने मुताबिक लोहिया अस्पताल में शाम 5 बजे तक जांच के सैंपल लिए जाएंगे। इससे मरीजों को निज
पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन बताते हैं कि ट्रामा सेंटर के संचालन की मंजूरी दे दी गई है। यहां बने कोवि
मरीज "मीडियन एरोकवयूट लिगामेन्ट सिन्डरोम" से पीड़ित था। डॉ अजय यादव ने दूरबीन विधि द्वारा सफलतापूर्वक
अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने से मसल मास बढ़ता है और Metabolism भी बढ़ता हैं। इसलिए हर भोजन में प्रोटीन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए कोविड प्रोट

COMMENTS