












































प्रतीकात्मक

लखनऊ। बहू के गर्भवती होने की खबर पूरे परिवार को खुशियों से सराबोर कर देती है। खुशियों के इन पलों को पूरे गर्भावस्था के दौरान सँजोये रखने और जच्चा-बच्चा को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि परिवार के हर सदस्य गर्भवती की बेहतर देखभाल की समुचित जिम्मेदारी भी निभाएं। इस बारे में समुदाय में जागरूकता लाने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते रहते हैं। इसके तहत गर्भवती और परिवार वालों को स्वास्थ्य विभाग की उन योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाता है जिनका लाभ उठाकर वह गर्भावस्था को सामान्य और सुरक्षित बना सकें।
संयुक्त निदेशक- मातृत्व स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजरी टंडन का कहना है कि गर्भावस्था के तीसरे-चौथे महीने में प्रशिक्षित चिकित्सक से जांच अवश्य करानी चाहिए। गर्भावस्था
की सही जांच-पड़ताल के लिए ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है। इसके तहत हर माह की नौ तारीख को स्वास्थ्य केन्द्रों पर विशेष आयोजन होता है। जहाँ पर एमबीबीएस चिकित्सक या स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा गर्भवती की सम्पूर्ण जांच मुफ्त की जाती है अगर कोई जटिलता नजर आती है तो उन महिलाओं को चिन्हित कर उन पर खास नजर रखी जाती है।
इसके साथ ही गर्भवती के खानपान का खास ख्याल रखें और खाने में हरी साग-सब्जी, फल आदि का ज्यादा इस्तेमाल करें, आयरन और कैल्शियम की गोलियों का सेवन चिकित्सक के बताये अनुसार करें। प्रसव का समय नजदीक आने पर सुरक्षित प्रसव के लिए पहले से ही निकटतम अस्पताल का चयन कर लेना चाहिए और मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड, जरूरी कपड़े और एम्बुलेंस का नम्बर-102 याद रखें। समय का प्रबन्धन भी अहम् होता है क्योंकि एम्बुलेंस को सूचित करने में विलम्ब करने और अस्पताल पहुँचने में देरी से जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा पहली बार गर्भवती होने पर सही पोषण और उचित स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत तीन किश्तों में 5000 रूपये दिए जाते हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रूपये व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रूपये दिए जाते हैं। प्रसव के तुरंत बाद बच्चे की उचित देखभाल के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ भी उठाया जा सकता है।
गर्भावस्था की सही देखभाल में आशा कार्यकर्ता भी अहम भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो अब वह ‘सेहत की आशा’ के रूप में उभरकर सामने आई हैं। गर्भ का पता चलते ही महिला का स्वास्थ्य केंद्र पर पंजीकरण कराने के साथ ही गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करती हैं। प्रसव पूर्व जांच कराने में मदद करती हैं। संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करतीं हैं और प्रसव के लिए साथ में अस्पताल तक महिला का साथ निभाती हैं।
इसी तरह एएनएम भी जरूरी टीका की सुविधा प्रदान करने के साथ ही आयरन-कैल्शियम की गोलियों के फायदे बताती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती के सही पोषण का ख्याल रखती हैं।
इस तरह ट्रिपल ए (आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) के साथ ही हर किसी का पूरा प्रयास होता है कि हर मां की बांहों में हो स्वस्थ व खुशहाल बच्चा।
गर्भवती को पहले से यह बीमारी हो तो विशेष देखभाल करें :
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) या मधुमेह (डायबीटीज)
दिल की या गुर्दे की बीमारी , टीबी या मिर्गी की बीमारी
पीलिया, लीवर की बीमारी या हाईपो थायराइड
जानें गर्भावस्था के जोखिम :
गंभीर एनीमिया - सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन
ब्लड प्रेशर -140/90 से अधिक
गर्भ में आड़ा/तिरछा या उल्टा बच्चा
चौथे महीने के बाद खून जाना
गर्भावस्था में डायबिटीज का पता चलना
एचआईवी या किसी अन्य बीमारी से ग्रसित होना







हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1218
हुज़ैफ़ा अबरार October 18 2026 0 1085
विशेष संवाददाता October 21 2026 0 938
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 700
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 623
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6601
हुज़ैफ़ा अबरार October 08 2026 0 1491
हुज़ैफ़ा अबरार October 13 2026 0 1491
हुज़ैफ़ा अबरार October 14 2026 0 1435
हुज़ैफ़ा अबरार October 06 2026 0 1351
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1218
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10241
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6601
एस. के. राणा February 01 2026 0 6475
एस. के. राणा January 20 2026 0 6314
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5880
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5775
एस. के. राणा January 13 2026 0 5320
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87659
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35918
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38825
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36323
लेख विभाग March 19 2022 0 35896
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73897
आयुर्वेद में नीम का बहुत महत्व है। नीम का पेड़ अच्छे पर्यावरण के लिए जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अच
डर्माफिक बायो सेल्यूलोज चारकोल मास्क प्रदूषकों के डिबेसिंग प्रभाव को कम करने में मदद करता है और त्वच
ब्रजेश पाठक, उप-मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा के कर कमलों द्वारा संस्थान के पुनर्निमित आर्थोपेडिक्स इ
उत्तर प्रदेश में डॉक्टर्स के हुए स्थानांतरणों भले ही लोग और सरकार भूल गए हो लेकिन पीएमएस एसोसिएशन आज
शुक्रवार को दिन के दौरान 27 बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया और 25 बच्चों का स्वास्थ्य ठीक हो
डॉक्टर से परामर्श के लिए धन्वन्तरि चिकित्सा संवाद लखनऊ द्वारा हेल्पलाइन नंबर –7311144450, 7311144451
राष्ट्रपति मैक्रॉन के फैसले के मुताबिक, नए साल से यानी 1 जनवरी 2022 से 18 साल से 25 साल के बीच के यु
मीडिया से रूबरू हुई सांसद मेनका गांधी ने स्वास्थ्य कार्यकत्रियों को बधाई दी, साथ ही ईमानदारी से कार्
अभी तक जितने भी स्वरूप पता चले हैं उनमें डेल्टा सबसे अधिक संक्रामक है और कम से कम 85 देशों में इसकी
आज की शिक्षा आदमी को सजा कर छोड़ देती है, लेकिन उसके जीवन के संगीत को बजाने की संभावना उससे पैदा नहीं

COMMENTS