











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। ठंड बढ़ने के बावजूद डेंगू मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। राजधानी के अस्पतालों में प्लेटलेट्स का संकट भी गहराने लगा है। गंभीर डेंगू मरीजों की जान बचाने में मददगार सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) की किट का संकट भी गहराने लगा है। ऐसे में केजीएमयू में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती डेंगू मरीजों की एसडीपी पर रोक लगा दी गई है।
अकेले लखनऊ में अब तक 1300 से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। रोजाना 25 से अधिक लोगों में डेंगू की पुष्टि हो रही है। ज्यादातर सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू के मरीज भर्ती हैं। बहुत से मरीजों का प्लेटलेट्स काउंट सामान्य से काफी कम है। केजीएमयू में रोजाना 100 से 150 यूनिट प्लेटलेट्स की खपत हो रही है। बलरामपुर, लोहिया, सिविल अस्पताल से रोजाना 80 से 100 यूनिट प्लेटलेट्स की आपूर्ति हो रही है। पीजीआई का भी यही हाल है। वहीं गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए केजीएमयू में एसडीपी की सुविधा भी है। इसमें मरीज के ब्लड ग्रुप डोनर से मशीन के माध्यम से प्लेटलेट्स लेकर सीधे मरीज में चढ़ा देते हैं। इससे मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स काउंट तेजी से बढ़ता है। खास बात यह है कि बार-बार मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।
नहीं मिल रही है किट
केजीएमयू में रोजाना 10 से 12 मरीजों की एसडीपी हो रही थी। एसडीपी किट का संकट खड़ा हो गया। डॉक्टर कंपनियों से किट की मांग कर रहे हैं लेकिन कंपनी किट उपलब्ध नहीं करा पा रही है। यह संकट पूरे यूपी में छाया है। नतीजतन रोजाना एक से दो गंभीर डेंगू मरीजों की ही एसडीपी हो पा रही है। केजीएमयू में ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा के मुताबिक एसडीपी किट की कमी है। लिहाजा 20 हजार से कम प्लेटलेट्स काउंट वाले मरीज को ही एसडीपी की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। रक्तस्राव की दशा में भी मरीज की एसडीपी की जा रही है। पर, प्लेटलेट्स की कमी नहीं है। जरूरतमंद लोगों को प्लेटलेट्स दिया जा रहा है।
सरकारी में मुफ्त प्लेटलेट्स
सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को लोहिया, सिविल, बलरामपुर अस्पताल से मुफ्त प्लेटलेट्स मुहैया करा रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीजों को इन अस्पतालों से प्रति यूनिट प्लेटलेट्स के एवज में 300 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों ही अस्पतालों में भर्ती मरीज के लिए डोनेशन जरूरी है। लोहिया संस्थान में अभी सिर्फ संस्थान में भर्ती मरीजों के लिए एसडीपी की सुविधा है। केजीएमयू में अभी तक सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों की एसडीपी हो रही थी। अब मरीज प्राइवेट अस्पतालों में एसडीपी कराने को मजबूर हैं। आठ से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों में एसडीपी की सुविधा है।
300 यूनिट से ज्यादा की है मांग
राजधानी में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्लेटलेट्स की मांग में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोजाना करीब 300 यूनिट से ज्यादा प्लेटलेट्स की खपत है। इसमें सरकारी व प्राइवेट अस्पताल दोनों शामिल हैं। लोहिया संस्थान प्रशासन का कहना है कि प्लेटलेट्स पर्याप्त मात्रा में है। रोज प्लेटलेट्स का निर्माण भी हो रहा है। बलरामपुर अस्पताल में करीब 30 यूनिट प्लेटलेट्स स्टॉक में है।







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