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लखनऊ। शरीर के किसी हिस्से पर होने वाले गड्ढ़े और चेहरे की सुंदरता बढ़ाने की प्रक्रिया अब बगैर सर्जरी (surgery) पूरी की जा सकेगी। फिलर के नाम से जानी जाने वाली ये प्रक्रिया एसजीपीजीआई (SGPGI) में शुरू होने जा रही है। इससे गैर जरूरी सर्जरी से बचा जा सकेगा। इसका असर छह महिने से एक तक होता है।

एसजीपीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी (plastic Surgery) के विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव अग्रवाल ने कहा कि फिलर तकनीक में हयालूरॉनिक एसिड (hyaluronic acid) का उपयोग किया जाता है। चेहरे के उस हिस्से जहां गड्ढ़ा या त्वचा को वो हिस्सा ऊपर आ जाता है। फिलर तकनीक का त्वचा के ऊपर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है। छह महीने से एक साल तक इस इंजेक्शन (injection) का प्रभाव रहता है। इसकी कीमत करीब 14 रुपये के करीब बताई जा रही है।
एसजीपीजीआई में ये तकनीक उपलब्ध है। इसकी खास बात ये भी है कि एक बार में त्वचा उभरने के बाद इंजेक्शन लगाकर उसे उसी रूप में लाया जा सकता है। बता दें कि प्लास्टिक सर्जरी का क्रेज लोगों में तेजी से बढ़ा है। पतले होठों (thin lips) को मोटा कराने का भी खूब चलन है। हालांकि फिलर तकनीक में इंजेक्शन से भी यह काम हो सकता है।







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