












































प्रतीकात्मक
मुंबई। एक नए अध्ययन से पता चला है कि बादाम खाने से भारत में किशोरों और युवा वयस्कों में सामान्य से ज्यादा ब्लड शुगर वाली स्थिति में ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद मिली। रैंडम तरीके से कंट्रोल किए गए इस क्लिनिकल ट्रायल का उद्देश्य मेटाबॉलिक कार्यप्रणाली पर बादाम खाने के असर को जानना था।
इसमें मुंबई में रहने वाले 16 से 25 साल के किशोरों और नौजवानों में ब्लड ग्लूकोज, लिपिड, इंसुलिन, और चयनित भड़काऊ मार्कर्स का प्रभाव देखा गया।
यह स्टडी रैंडम और समानांतर तरीके से की गई है, जिसमें बिगड़े हुए ग्लूकोज मेटाबॉल्जिम से पीड़ित 275 भागीदारों पर स्टडी की गई।
अध्ययन में बादाम खाने वाले ग्रुप ने तीन महीने तक 56 ग्राम प्रतिदिन बिना भुना हुआ बादाम खाया और कंट्रोल ग्रुप ने इसी कैलोरी के एक नमकीन स्नैक का सेवन किया। बादाम के रूप में स्नैक्स की खपत का परीक्षण आल्मंड ग्रुप में किया गया था, जबकि कंट्रोल ग्रुप ने एक नमकीन स्नैक का सेवन किया था, जो आमतौर पर भारत में इस आयु वर्ग की ओर से खाया जाता है।
सर विट्ठल्डिस ठाकरसी कॉलेज ऑफ होम साइंस (स्वायत्त) एसएनडीटी वुमन यूनिवर्सिटी (मुंबई) के प्रिंसिपल, प्रमुख जांचकर्ता और पीएचडी, प्रोफेसर डॉ. जगमीत मदान ने कहा, “किशोरों और युवाओं की जीवन शैली में सुधार से, जिसमें पोषण और व्यायाम शामिल है, सामान्य से अधिक ब्लड कंट्रोल वाले लोगों में डायबिटीज की प्रगति रोकने की क्षमता है। इस स्टडी के नतीजों से पता चलता है कि बदलाव बड़ा ही हो, यह जरूरी नहीं है। बस दिन में दो बार बादाम खाने से भी फर्क पड़ सकता है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय मर्सिड के शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया के बादाम बोर्ड की ओर से वित्त पोषित एक स्टडी में दिखाया गया कि कि कॉलेज के जो छात्र सुबह नाश्ता नहीं करते, उनके लिए सुबह बादाम खाना एक स्मार्ट विकल्प हो सकता है। मुख्य रूप से नाश्ता न करने वाले कॉलेज के नौजवानों ने या तो बादाम या ग्रैहम क्रैकर्स का सेवन किया। इससे उनके कोलेस्ट्रोल में कमी आई और ब्लड ग्लूकोज में भी सुधार देखने में मिला। रक्त शर्करा के स्तर में सुधार किया, लेकिन बादाम के लाभ अधिक थे।
जिन लोगों ने बादाम का नाश्ता किया, उन्होंने 8 सप्ताह के अध्ययन में अच्छे एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाए रखा और ब्लड शुगर में सुधार किया।







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