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लखनऊ। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी) पर चार दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। गुरुवार को शिविर के पहले दिन 200 से अधिक ग्राउंड स्टाफ एवं कर्मचारियों की टीबी स्क्रीनिंग की गई तथा उन्हें रोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अमौसी एयरपोर्ट पर इस प्रकार का यह संभवतः पहला व्यापक स्क्रीनिंग अभियान है।
यह शिविर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एवं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) के अवसर पर शुरू किए गए 100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान के तहत आयोजित किया गया है। शिविर में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. निश्चय केसरी, एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. जय यादव लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के इंफ्रा लीड शशि कुमार राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना उपस्थित रहे। राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने ग्राउंड स्टाफ को टीबी के लक्षण, बचाव और समय पर जांच की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा आप लोग प्रतिदिन हजारों यात्रियों के संपर्क में आते हैं, ऐसे में स्वयं सुरक्षित रहना और लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके।
डॉ. ऋषि कुमार ने बताया कि 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान जोखिम वाले समुदायों की सक्रिय स्क्रीनिंग के माध्यम से टीबी की शीघ्र पहचान और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल है। बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों जैसे उच्च-आवागमन वाले सार्वजनिक स्थलों पर शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों तक जांच, परामर्श और जागरूकता सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
अभियान के तहत हाई-रिस्क समूहों की सक्रिय स्क्रीनिंग के साथ एआई आधारित एक्स-रे जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है तथा मरीजों का नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते समय पर पहचान हो और मरीज पूरा उपचार ले। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अतुल कुमार सिंघल ने टीबी के लक्षणों, निक्षय पोषण योजना एवं निक्षय मित्र योजना के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत आगे भी सार्वजनिक स्थलों और हाई-रिस्क क्षेत्रों में इसी प्रकार स्क्रीनिंग और जागरूकता गतिविधियां निरंतर संचालित की जाएंगी ताकि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सके।







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