











































Dr. Akash Pandita
लखनऊ। बारिश के मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण का खतरा बढ़ने लगा है। लखनऊ में चार नए मरीज मिलने के बाद पुष्ट मामलों की संख्या 17 तक पहुंच गई है। प्रदेश के कई अन्य जिलों से भी संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को सतर्क रहने विशेष वार्ड बनाने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मेदांता अस्पताल के बाद रोग विशेषज्ञ डॉ आकाश पंडिता ने बताया कि बच्चों को इंफेक्शन जल्दी लगने का खतरा रहता है। स्वाइन फ्लू सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से शुरू हो सकता है। तेज बुखार खांसी गले में दर्द सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों छोटे बच्चों तथा मधुमेह हृदय या सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह संक्रमण अधिक घातक हो सकता है। इसलिए समय पर जांच और उपचार अत्यंत आवश्यक है।
स्वाइन फ्लू (H1N1) बच्चों को प्रभावित कर सकता है
लेकिन अधिकांश बच्चे उचित देखभाल से ठीक हो जाते हैं। छोटे बच्चों और कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले बच्चों में जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। बच्चों में सामान्य प्रभाव/लक्षण
तेज बुखार या बुखार खांसी गले में खराश नाक बहना या बंद होना शरीर दर्द और थकान सिरदर्द उल्टी या दस्त (बच्चों में अपेक्षाकृत अधिक दिख सकते हैं) भूख कम लगना
डॉ आकाश पंडिता ने बताया 5 वर्ष से कम उम्र, विशेषकर 2 वर्ष से कम अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी हृदय रोग कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली अन्य गंभीर पुरानी बीमारियाँ संभावित गंभीर प्रभाव कुछ मामलों में स्वाइन फ्लू से निमोनिया, सांस लेने में परेशानी, निर्जलीकरण जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि बच्चा तेजी से या कठिनाई से सांस ले रहा हो होंठ या चेहरा नीला पड़ रहा हो बहुत सुस्त या बेहोशी जैसा व्यवहार कर रहा हो पानी/दूध नहीं पी पा रहा हो लगातार उल्टी हो रही हो दौरे पड़ें लक्षण बेहतर होने के बाद अचानक फिर बिगड़ जाएँ
स्वाइन फ्लू (H1N1) से बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय
डॉ आकाश पंडिता ने बताया हाथ बार-बार धोएँ साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड। खाँसते/छींकते समय रुमाल या कोहनी का इस्तेमाल सिखाएँ। बीमार व्यक्ति से दूरी रखें खासकर जिसे बुखार खाँसी या जुकाम हो। बच्चे की आँख नाक और मुँह बार-बार छूने की आदत कम कराएँ।
घर में हवादार वातावरण रखें और अक्सर छुई जाने वाली सतहें साफ करें। बच्चे को पर्याप्त नींद पौष्टिक भोजन और पानी दें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू वैक्सीन लगवाने पर विचार करें विशेषकर छोटे बच्चों या अस्थमा जैसी पुरानी समस्याओं वाले बच्चों के लिए ये लक्षण तेज बुखार लगातार खाँसी सांस लेने में तकलीफ बहुत ज्यादा सुस्ती खाना/पानी न लेना या होंठ नीले पड़ना हों तो डॉक्टर से संपर्क करें
सावधानी साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों विद्यालयों और सार्वजनिक परिवहन में बचाव संबंधी जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। लोगों को खांसते-छींकते समय मुंह ढकने, हाथ साफ रखने और लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जाए। स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं लेकिन लापरवाही की कोई गुंजाइश भी नहीं है। संक्रमण बढ़ने की प्रतीक्षा करने के बजाये तुरंत नजदीक स्वास्थ केन्द्र में जांच कराने के बाद पूरा उपचार और निगरानी का मजबूत तंत्र सक्रिय किया गया है। सही समय पर की गई तैयारी ही बड़े स्वास्थ्य संकट को रोक सकती है।







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