देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्य-स्तर पर कदम उठाना ज़रूरी: डा वेद प्रकाश 

सेप्सिस (Sepsis) एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जो तब होती है जब शरीर किसी संक्रमण के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रिया करता है। इस प्रतिक्रिया से शरीर के अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुँच सकता है तथा उनका काम प्रभावित हो सकता है। सेप्सिस को एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है और इसमें तुरंत उपचार आवश्यक होता है। प्रभावी सेप्सिस प्रबंधन रोगी के परिणामों में सुधार लाने और मृत्यु दर को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके लिए तेजी से हस्तक्षेप और समन्वित देखभाल की आवश्यकता होती है।

हुज़ैफ़ा अबरार
September 13 2026 Updated: September 13 2026 01:56
0 413
एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्य-स्तर पर कदम उठाना ज़रूरी: डा वेद प्रकाश  Prof. Dr. Ved Prakash and prof Dr Surukant

लखनऊ। सेप्सिस (Sepsis) जानलेवा स्थिति है, जो तब होती है जब शरीर किसी संक्रमण के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रिया करता है। इस प्रतिक्रिया से शरीर के अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुँच सकता है तथा उनका काम प्रभावित हो सकता है। यह जानकारी केजीएमयू में आयोजित प्रेस वार्ता में विशेषज्ञ प्रो. डॉ.वेद प्रकाश हेड पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन ने दी। उन्होने बताया कि सेप्सिस को एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है और इसमें तुरंत उपचार आवश्यक होता है। प्रभावी सेप्सिस प्रबंधन रोगी के परिणामों में सुधार लाने और मृत्यु दर को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके लिए तेजी से हस्तक्षेप और समन्वित देखभाल की आवश्यकता होती है।

प्रो.डा. सूर्यकान्त हेड रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू ने प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ल्ड सेप्सिस डे के मौके पर केजीएमयू लखनऊ का पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग पल्मोक्रिट फाउंडेशन की देखरेख में सोसाइटी ऑफ़ प्रिसिजन मेडिसिन एंड इंटेंसिव केयर और नेशनल एकेडमी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (उत्तर प्रदेश चैप्टर) के साथ मिलकर 12 और 13 सितंबर को दो दिन की कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के बीच सेप्सिस मैनेजमेंट को लेकर जागरूकता बढ़ाना और बेहतर तरीकों को बढ़ावा देना है। उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मेडिकल हेल्थ परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. अमित कुमार घोष शामिल हुए। 

डा वेद प्रकाश ने कहा सेप्सिस प्रबंधन में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने सेप्सिस के बेहतर इलाज की तत्काल आवश्यकता को उजागर करने पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में नए मानदंड स्थापित करने के लिए विभाग के सतत प्रयासों को प्रस्तुत करने का एक मंच दिया। इस कार्यक्रम में डा सचिन कुमार डा मों आरिफ डा अनुराग ,डॉ. ऋचा त्यागी डॉ. यश जगधारी डा दीपक डा. नन्दनी दिक्षित डा सुभ्रा, डा संदीप डा अपर्णा, डा दीपक डा हर्षिता एवं अन्य डाक्टर स्टाफ उपस्थित रहे।


शीघ्र पहचानः सेप्सिस की शीघ्र पहचान महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को तेजी से उपचार शुरू करने के लिए बदली हुई मानसिक स्थिति तेजी से सांस लेने और हाइपोटेंशन सहित शुरुआती संकेतों और लक्षणों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। संक्रमण स्रोत नियंत्रणः संक्रमण के स्रोत का प्रबंधन करना आवश्यक है। इसमें फोड़े-फुन्सियों को निकालने संक्रमित ऊतक को हटाने या सेप्सिस के अंतर्निहित कारण को संबोधित करने के लिए सर्जिकल प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। रक्तचाप को बनाए रखने बीपी को बढाने की दवाइयों के समुचित उपयोग किया जाता है जिससे नाॅरइपिनेफ्रेसिन जैसी दवाइयां सम्मिलित हैं।


ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्सः अंतर्निहित संक्रमण को लक्षित करने के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दवाओं का तेजी से प्रशासन आवश्यक है। 
एंटीबायोटिक प्रबंधनः एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रोगी की प्रतिक्रिया की निरंतर निगरानी आवश्यक है। ऑक्सीजन थेरेपीः पर्याप्त ऑक्सीजन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। यदि आवश्यक हो तो यांत्रिक वेंटिलेशन सहित ऑक्सीजन थेरेपी रोगी के श्वसन कार्य का समर्थन करती है।
अंग समर्थनः जैसे गुर्दे की विफलता के लिए डायलिसिस या हृदय समर्थन करने के लिए दवाएं इत्यादि सम्मिलित हैं। ग्लूकोज नियंत्रणः सेप्सिस देखभाल में रक्त ग्लूकोज के स्तर को प्रबंधित करना महत्वपूर्ण है। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्सः कुछ मामलों में सूजन को कम करने और हेमोडायनामिक्स को स्थिर करने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का उपयोग किया जा सकता है।


 सेप्सिस देखभालः सेप्सिस से बचे लोगों को अक्सर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बीमारियां से निपटने के लिए निरंतर चिकित्सा और पुनर्वास सहायता की आवश्यकता होती है, जिसे पोस्ट-सेप्सिस सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। विभाग ने सेप्सिस मामलों के असाधारण प्रबंधन के लिए एक विशिष्ट प्रतिष्ठा अर्जित की है, जो भारत की सबसे बड़ी श्वसन गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की उपस्थिति से रेखांकित होती है। 26 आई.सी.यू. बिस्तरों से सुसज्जित यह अत्याधुनिक सुविधा 10 प्रतिशत से कम की वेंटिलेटर-एसोसिएटेड निमोनिया (वीएपी) दर का दावा करती है जो नैदानिक उत्कृष्टता का एक बेंचमार्क है। विभाग ने 85 प्रतिशत के करीब मरीजों का ठीक कर उपलब्धि हासिल किया है, जो बेहतर रोगी परिणामों और अत्याधुनिक देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य
सेप्सिस जैसी गम्भीर बीमारी से प्रत्येक 3 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु होती है।
सेप्सिस हर साल पूरे विश्व में 4 करोड़ 89 लाख लोगों को प्रभावित करता हैं।
पूरे विश्व में हर 5 मृत्यु में 1 मृत्यु सेप्सिस के कारण होती है। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल 1 करोड़ 10 लाख लोगों की मृत्यु सेप्सिस के कारण होती हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2021 में 2 करोड़ 10 लाख लोगों की मृत्यु हुईं।
विश्वभर में सेप्सिस के 85ः मामले ग्लोबल साउथ में होते है, जिसमें अफ्रीका एशिया और लैटिन अमेरिका के निम्न और मध्यम आय वाले देश शामिल हैं।  अमेरिका जैसे उच्च आय वाले देषों में भी अस्पतालांे में होने वाली सभी मृत्यु का एक प्रमुख कारण सेप्सिस है।
सेप्सिस से 5 साल के कम उम्र के लगभग 2 करोड बच्चों की मृत्यु होती है जिसमें मुख्यतः नवजात षिषु प्रभावित होते है। महिलाएं, वृद्ध और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग सेप्सिस के उच्च जोखिम पर होते हैं।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

केजीएमयू ने रचा इतिहास, एक साथ इमरजेंसी मेडिसिन को मिली एमडी की पांच सीटे

केजीएमयू ने रचा इतिहास, एक साथ इमरजेंसी मेडिसिन को मिली एमडी की पांच सीटे

रंजीव ठाकुर September 21 2022 32103

राजधानी के केजीएमयू ने एक बार फिर स्वास्थ्य जगत में प्रदेश का नाम ऊँचा किया है। ऐसा पहली बार हुआ है

डॉ रेड्डीज लैब्स ने कैंसर की जेनेरिक दवा Capecitabine अमेरिकी बाज़ार में उतारी। 

डॉ रेड्डीज लैब्स ने कैंसर की जेनेरिक दवा Capecitabine अमेरिकी बाज़ार में उतारी। 

हे.जा.स. February 17 2021 39212

डॉ रेड्डी की Capecitabine टैबलेट, यूएसपी 150 मिलीग्राम और 500 मिलीग्राम  क्रमशः 60 और 120 मिली की बो

डेंगू का बढ़ता कहर, दो नए मरीज मिले

डेंगू का बढ़ता कहर, दो नए मरीज मिले

विशेष संवाददाता August 27 2023 35692

सुल्तानपुर जिले में डेंगू का कहर बढ़ता ही जा रहा है। जबकि बीते दिन फिर दो मरीज सामने आए जिन्हें मेडि

गर्भावस्था के दौरान खान-पान के बारे में जानिए डॉ. परितोष त्रिवेदी से

गर्भावस्था के दौरान खान-पान के बारे में जानिए डॉ. परितोष त्रिवेदी से

लेख विभाग April 29 2022 52692

फूड व न्यूट्रीशन बोर्ड के अनुसार सगर्भा महिला को आहार के माध्यम  से 300 कैलोरीज अतिरिक्त मिलनी ही चा

Efficacy of awake prone positioning in patients with covid-19 related hypoxemic respiratory failure: systematic review and meta-analysis of randomized trials

Efficacy of awake prone positioning in patients with covid-19 related hypoxemic respiratory failure: systematic review and meta-analysis of randomized trials

British Medical Journal December 09 2022 25568

Awake prone positioning compared with usual care reduces the risk of endotracheal intubation in adul

कानपुर में ज़ीका की दहशत, दो हेल्‍थ वर्कर सहित 25 मिले संक्रमित।

कानपुर में ज़ीका की दहशत, दो हेल्‍थ वर्कर सहित 25 मिले संक्रमित।

हे.जा.स. November 03 2021 28912

जीका वायरस का जाल शहर में कई किलोमीटर तक फैल गया है। अभी तक परदेवनपुरवा तक ही संक्रमित मिल रहे थे ले

  यूपी में अनोखा मामला: महिला ने 5 दिनों में 4 बच्चों को जन्म दिया डॉक्टर हैरान  

यूपी में अनोखा मामला: महिला ने 5 दिनों में 4 बच्चों को जन्म दिया डॉक्टर हैरान  

हुज़ैफ़ा अबरार May 16 2026 2261

संभल जिले की अमीना ने सिर्फ 5 दिनों के भीतर 4 बच्चों को जन्म दिया। इनमें 2 लड़के और 2 लड़कियां शामिल

जीएनएम  प्रथम वर्ष अंग्रेजी एवं कंप्यूटर की परीक्षा अब 22 फरवरी को होगी।

जीएनएम  प्रथम वर्ष अंग्रेजी एवं कंप्यूटर की परीक्षा अब 22 फरवरी को होगी।

अखण्ड प्रताप सिंह January 23 2021 23104

जीएनएम  प्रथम वर्ष संस्थान द्वारा संचालित मुख्य और पूरक परीक्षा के विषय अंग्रेजी एवं कंप्यूटर की परी

स्कैन और शेयर कार्यप्रणाली से एबीडीएम के तहत हजारों रोगियों को मिल रहा लाभ: डॉ. आर.एस. शर्मा

स्कैन और शेयर कार्यप्रणाली से एबीडीएम के तहत हजारों रोगियों को मिल रहा लाभ: डॉ. आर.एस. शर्मा

विशेष संवाददाता December 22 2022 28847

इस स्कैन और शेयर कार्यप्रणाली के माध्यम से ओपीडी पंजीकरण को सहज, सुगम और सटीक बनाया गया है। साथ ही,

सूरजमुखी के बीज में है सेहत का खजाना

सूरजमुखी के बीज में है सेहत का खजाना

आरती तिवारी September 30 2022 55708

सूरजमुखी एक वानस्पतिक पौधा है। अंग्रेजी में इसे सनफ्लॉवर कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधि माना जा

Login Panel