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मुंबई। एपिलेप्सी (Epilepsy) यानी मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे (Seizures) आते हैं। दिमाग में तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) द्वारा अचानक और असामान्य रूप से बहुत तेज़ इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने के कारण यह समस्या होती है। एक बार दौरा आना एपिलेप्सी नहीं कहलाता है इसके लिए बिना किसी स्पष्ट कारण के कम से कम दो बार दौरे आना ज़रूरी है। मुख्य लक्षणशरीर या हाथ-पैरों में अचानक झटके या कंपन होना।कुछ सेकंड या मिनट के लिए होश खो देना या बेहोश हो जाना।मुंह से झाग निकलना या जीभ कट जाना।कुछ पलों के लिए शून्य हो जाना या एक ही तरफ लगातार देखते रहना। भारत में नई दवा लॉन्च: Alkem Laboratories ने NeuCeno (cenobamate) लॉन्च की है। यह वयस्कों में partial-onset seizures के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है। रिपोर्ट के अनुसार क्लिनिकल अध्ययनों में अन्य दवाओं के साथ इस्तेमाल करने पर दौरे की आवृत्ति में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। एपिलेप्सी (Epilepsy) जिसे आम बोलचाल में मिर्गी कहते हैं, मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि कुछ समय के लिए असामान्य हो जाती है, जिससे बार-बार बिना किसी तत्काल कारण के दौरे (seizures) पड़ सकते हैं।
कारण
सिर पर गंभीर चोट लगना या ब्रेन स्ट्रोक दिमागी संक्रमण जैसे मैनिंजाइटिस (Meningitis)।जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण कई मामलों में इसका सटीक कारण पता नहीं चलता भारत में नई दवा लॉन्च: Alkem Laboratories ने NeuCeno (cenobamate) लॉन्च की है। यह वयस्कों में partial-onset seizures के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है। रिपोर्ट के अनुसार क्लिनिकल अध्ययनों में अन्य दवाओं के साथ इस्तेमाल करने पर दौरे की आवृत्ति में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। एपिलेप्सी (Epilepsy) जिसे आम बोलचाल में मिर्गी कहते हैं, मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि कुछ समय के लिए असामान्य हो जाती है, जिससे बार-बार बिना किसी तत्काल कारण के दौरे (seizures) पड़ सकते हैं। हर मरीज में कारण पता चलना जरूरी नहीं है। संभावित कारणों में आनुवंशिक/जन्मजात कारण जन्म के समय मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी या चोट सिर में गंभीर चोट मस्तिष्क में संक्रमण जैसे मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस स्ट्रोक या मस्तिष्क में ट्यूमर कुछ आनुवंशिक या विकास संबंधी स्थितियां कई मामलों में जांच के बावजूद कारण अज्ञात रहता है।
एपिलेप्सी का निदान केवल एक टेस्ट से नहीं होता। डॉक्टर आमतौर पर दौरे का पूरा विवरण लेते हैं दौरा कब आया कितनी देर रहा शरीर में क्या बदलाव हुए आदि। संभव हो तो प्रत्यक्षदर्शी द्वारा बताई जानकारी या वीडियो उपयोगी होता है। न्यूरोलॉजिकल जांच करते हैं। EEG (Electroencephalogram) से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि देखते हैं। जरूरत के अनुसार MRI/CT स्कैन से मस्तिष्क की संरचना में कोई समस्या खोजी जाती है। कुछ परिस्थितियों में रक्त जांच या अन्य परीक्षण भी किए जाते हैं। महत्वपूर्ण: एक बार दौरा पड़ना हमेशा एपिलेप्सी होने का मतलब नहीं होता। बुखार लो ब्लड शुगर कुछ दवाओं/नशीले पदार्थों या अन्य कारणों से भी seizure हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। दौरा 5 मिनट से अधिक चले, लगातार दौरे पड़ें और बीच में होश न आए, सांस लेने में परेशानी हो या गंभीर चोट लगी हो तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
अल्केम ने लॉन्च की न्यूसीनो (सेनोबामेट)
अल्केम लैबोरेटरीज लि ने न्यूसीनो (सेनोबामेट) के लॉन्च की घोषणा की। यह वयस्क मरीज़ों में पार्शियल-ऑनसेट सीज़र्स के इलाज के लिए एक एंटी-सीज़र मेडिकेशन (एएसएम) है। सेनोबामेट भारत में पहली बार लॉन्च हो रहा है और यह एपिलेप्सी के इलाज में बड़ी प्रगति है। न्यूसीनो एक दिन में एक बार ली जाने वाली ओरल थेरेपी है, जो 12.5 एमजी, 25 एमजी, 50 एमजी, 100 एमजी, 150 एमजी और 200 एमजी की टैबलेट्स में उपलब्ध है। भारत में एपिलेप्सी बड़ी हेल्थकेयर चुनौती है। अनुमान है कि करीब 94 लाख लोग इस स्थिति के साथ जी रहे हैं। कई एंटी-सीज़र मेडिकेशन उपलब्ध होने के बावजूद एक बड़ी संख्या में मरीज़ों के सीज़र्स नियंत्रण में नहीं आ पाते, जिससे उनकी स्वतंत्रता रोज़मर्रा के कामकाज और समग्र जीवन-गुणवत्ता पर काफी असर पड़ता है। न्यूसीनो (सेनोबामेट) दो अलग तरीकों से एक साथ काम करता है। यह उस पर्सिस्टेंट सोडियम करंट को चुनिंदा तरीके से रोकता है, जो बार-बार न्यूरोनल फायरिंग को बढ़ावा देता है साथ ही जीएबीए-ए रिसेप्टर्स के पॉज़िटिव मॉड्युलेशन के ज़रिए मस्तिष्क के नैचुरल इनहिबिटरी सिग्नलिंग को बढ़ाता है।
मौजूदा एंटी-सीज़र मेडिकेशन ले रहे वयस्कों में, जिनके फोकल सीज़र्स नियंत्रण में नहीं आ रहे थे रैंडमाइज़्ड क्लिनिकल स्टडीज़ में एडजंक्टिव सेनोबामेट से सीज़र फ्रीक्वेंसी में 78% तक कमी देखी गई और मेंटेनेंस फेज़ के दौरान 30% तक मरीज़ों में सीज़र-फ्रीडम हासिल हुई। अल्केम लैबोरेटरीज के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप सिंह ने कहा एपिलेप्सी से जूझ रहे लोगों और उनकी देखभाल करने वालों को असरदार सीज़र-कंट्रोल हासिल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सेनोबामेट में इलाज के नतीजों को बेहतर बनाने और एपिलेप्सी प्रबंधन को आगे ले जाने की क्षमता है।







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