











































Dr. Mansi Singh
कानपुर। कानपुर में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने एक बार फिर पीने के पानी की सुरक्षा और जलजनित संक्रमणों के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर बने रहने और शहर में जलभराव के बीच रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने लोगों से सुरक्षित पेयजल के प्रति विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। रीजेंसी हेल्थ कानपुर की कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी डॉ. मानसी सिंह ने कहा डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों को संक्रमण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अस्पताल ने इस बात पर जोर दिया कि गंभीर संक्रमण और डिहाइड्रेशन किडनी की सेहत को भी प्रभावित कर सकते हैं। डायरिया गैस्ट्रोएंटेराइटिस टाइफाइड और हेपेटाइटिस A एवं E जैसे जलजनित संक्रमण दूषित पानी या भोजन के संपर्क में आने से फैल सकते हैं।
मानसून के दौरान बाढ़ जलभराव और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पानी और भोजन को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इन बीमारियों का खतरा केवल संक्रमण तक सीमित नहीं है। लगातार उल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की गंभीर कमी हो सकती है। इससे किडनी तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह कम हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) यानी किडनी को अचानक नुकसान पहुंचने की स्थिति पैदा हो सकती है। गंभीर संक्रमण विशेषकर सेप्सिस की स्थिति में भी किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
भारत में 3,711 एक्यूट किडनी इंजरी से पीड़ित मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 34.7 प्रतिशत मामलों के लिए सेप्सिस और 9.8 प्रतिशत मामलों के लिए उष्णकटिबंधीय बुखार जिम्मेदार था। यह दर्शाता है कि गंभीर संक्रमण एक्यूट किडनी इंजरी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। रीजेंसी हेल्थ कानपुर के डॉक्टरों ने लोगों से सुरक्षित पेयजल को केवल स्वच्छता से जुड़ी सावधानी नहीं, बल्कि किडनी संबंधी गंभीर जटिलताओं से बचाव के एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में अपनाने की अपील की है। मानसून के दौरान लोगों को पानी उबालकर या उचित फिल्टर से साफ करके पीना चाहिए। अनजान स्रोतों से मिलने वाले सड़क किनारे के पेय पदार्थों और बर्फ के सेवन से बचना चाहिए। पीने के पानी को साफ और ढके हुए बर्तनों में रखना भी जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति को दस्त या उल्टी की समस्या होती है, तो ओआरएस (ORS) के माध्यम से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दस्त लगातार बने रहने, बार-बार उल्टी होने बुखार मल में खून अत्यधिक कमजोरी चक्कर आने भ्रम की स्थिति या पेशाब की मात्रा कम होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। रीजेंसी हेल्थ कानपुर की कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी डॉ. मानसी सिंह ने कहा, “डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों को संक्रमण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डिहाइड्रेशन और गंभीर संक्रमण किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को यदि कोई गंभीर जलजनित संक्रमण होता है, तो उनके लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करना जरूरी हो सकता है।
डॉ. मानसी सिंह ने कहा एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाओं का बिना चिकित्सकीय सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए। मानसून के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भोजन और पेयजल की स्वच्छता का ध्यान रखना तथा समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना जलजनित संक्रमणों से होने वाली गंभीर जटिलताओं जिसमें एक्यूट किडनी इंजरी भी शामिल है, के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। दूषित पानी किडनी को कई तरीकों से नुकसान पहुँचा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पानी में बैक्टीरिया/परजीवी भारी धातुएँ जैसे सीसा कैडमियम आर्सेनिक या अन्य रसायन किस मात्रा में मौजूद हैं।
संक्रमण: दूषित पानी से दस्त/उल्टी हो सकती है, जिससे शरीर में पानी और नमक की कमी होकर किडनी पर अचानक दबाव पड़ सकता है और Acute Kidney Injury (AKI) हो सकती है।
भारी धातुएँ: लंबे समय तक आर्सेनिक, कैडमियम या सीसे के संपर्क में रहने से किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है।
रसायन/प्रदूषक: कुछ औद्योगिक रसायन किडनी की फ़िल्टर करने वाली संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
पानी की कमी: दूषित पानी पीने से बचने के कारण पर्याप्त सुरक्षित पानी न मिलना भी डिहाइड्रेशन और किडनी पर अतिरिक्त भार का कारण बन सकता है। केवल पानी का गंदा दिखना यह साबित नहीं करता कि वह किडनी के लिए हानिकारक है; कई हानिकारक पदार्थ पानी में बिना रंग, गंध या स्वाद के मौजूद हो सकते हैं। अगर आपको कम पेशाब पैरों/चेहरे पर सूजन पेशाब में खून बहुत कमजोरी या लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जल्दी संपर्क करना चाहिए।







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