











































सिर दर्द और गर्दन दर्द से पीड़ित महिला
बहराइच। सिर और गर्दन का कैंसर भारत में एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रहे हैं, विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में। ये कैंसर मुंह, गले, स्वरयंत्र और नाक जैसे हिस्सों को प्रभावित करते हैं और अब अधिकतर मामलों में एडवांस्ड स्टेज में सामने आ रहे हैं, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और परिणाम भी कम अनुकूल होते हैं। इसका असर खास तौर पर पुरुषों और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है, जिसका मुख्य कारण लाइफ़स्टाइल से जुड़ी आदतें और जागरूकता की कमी है।
डॉ. कमलेश वर्मा डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने कहा बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। तंबाकू के सभी रूपों से दूर रहना, शराब का सीमित सेवन करना, मुंह की साफ-सफाई बनाए रखना और एचपीवी से जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूकता फैलाना इन सभी कदमों से इन कैंसरों के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सिर और गर्दन के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। चाहे वह सिगरेट और बीड़ी के रूप में हो या गुटखा खैनी और पान मसाला के रूप में हो। बिना धुएं वाला तंबाकू खासतौर से ज्यादा नुकसानदायक होता है, क्योंकि यह सीधे पूरे मुंह को प्रभावित करता है। साथ ही शराब का सेवन जोखिम को और बढ़ा देता है। तंबाकू और शराब का एक साथ उपयोग कैंसर होने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा मुंह की ढंग से सफ़ाई न करना, दांतों की धार से होने वाली लगातार चोट और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) जैसे संक्रमण भी इसके कारणों में शामिल हैं। विशेष रूप से एचपीवी-16 का संबंध गले, टॉन्सिल और जीभ के कैंसर से तेजी से जुड़ता जा रहा है।
ऐसे लक्षण जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है वो बड़ी समस्या खड़ी करते हैं। कैंसरों के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती देर से पहचान होना है, क्योंकि शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अगर मुंह में दो हफ्ते से ज्यादा समय तक घाव ठीक नहीं हो रहा हो मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई दें, आवाज में लगातार भारीपन बना रहे, निगलने में दिक्कत हो बिना वजह खून आए या गर्दन में गांठ महसूस हो तो ये सभी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से बीमारी चुपचाप गंभीर अवस्था तक पहुंच सकती है।
समय पर पहचान होना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर शुरुआती अवस्था में ही सिर और गर्दन के कैंसर का पता चल जाए तो इसका इलाज असरदार तरीके से किया जा सकता है और सफलता की संभावना भी काफी अधिक रहती है। खासकर तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले लोगों को नियमित रूप से मुंह की जांच करानी चाहिए जिससे किसी भी असामान्यता का समय रहते पता चल सके। खुद से समय-समय पर जांच करना और किसी भी लगातार बने रहने वाले लक्षण पर डॉक्टर से सलाह लेना भी उतना ही जरूरी है।
इलाज कैंसर की अवस्था और उसके स्थान पर निर्भर करता है। इसमें सर्जरी रेडिएशन थेरेपी कीमोथेरेपी या इनका संयोजन शामिल हो सकता है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की इसमें अहम भूमिका होती है, जिसमें ट्यूमर को आस-पास के स्वस्थ टिशू के एक हिस्से के साथ हटाया जाता है ताकि दोबारा होने की संभावना कम हो सके। हाल के वर्षों में रोबोटिक सर्जरी जैसी नई तकनीकों ने इलाज को और अधिक सटीक बनाया है जटिलताओं को कम किया है और मरीजों की रिकवरी को बेहतर बनाया है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय जरूर हैं लेकिन अच्छी बात यह है कि इन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है। जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच के लिए प्रेरित करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, यह सभी कदम इस बोझ को कम करने में मदद कर सकते हैं। सही समय पर उठाया गया कदम न केवल जीवन बचा सकता है बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकता है।







हुज़ैफ़ा अबरार September 13 2026 0 1246
हुज़ैफ़ा अबरार September 16 2026 0 273
हुज़ैफ़ा अबरार September 16 2026 0 238
हुज़ैफ़ा अबरार September 17 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 3570
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 1407
हुज़ैफ़ा अबरार September 13 2026 0 1246
हुज़ैफ़ा अबरार September 04 2026 0 987
हुज़ैफ़ा अबरार September 08 2026 0 742
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 574
हुज़ैफ़ा अबरार September 01 2026 0 525
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9303
एस. के. राणा January 20 2026 0 5719
एस. के. राणा February 01 2026 0 5642
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5432
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5362
एस. के. राणा January 13 2026 0 4970
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4907
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87337
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35449
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38461
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35959
लेख विभाग March 19 2022 0 35609
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73309
अब अपोलोमेडिक्स क्षेत्र का पहला निजी अस्पताल बन गया है, जहाँ नी रिप्लेसमेंट के लिए दो समर्पित रोबोट
सामान्य तौर पर हर 15 से 20 दिन में हेयर डिटॉक्स करना चाहिए। यदि आपके बाल प्रदूषण के संपर्क में ज्याद
प्रोफेसर जीवन प्रकाश और प्रोफेसर सावित्री ठाकुर ने खुद टीका लगवाकर साफ तौर पर संदेश दिया कि कोरोना व
आगरा में ओपीडी ऑन व्हील की शुरुआत की गई है। वहीं यह शहर से ग्रामीण क्षेत्र तक ओपीडी ऑन व्हील सेवाएं
देश में इस समय कोरोना के 2,24,187 एक्टिव केस हैं, जिसकी दर 0.52% है। कोविड इंफेक्शन से अब तक 5,11,90
जयपुर में सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर रोग तेजी से पैर पसार रहा है। कोटा के सांगोद इलाके (Sangod l
चाय और पराठे को साथ में खाने से शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती हैं। इसलिए अगर आपको डायबिटीज नह
बच्चों के लिए भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के डेटा का मूल्यांकन किया जा रहा है। डीसीजीआई से अंतिम मंजूर
कोंडागांव जिला अस्पताल में नक्सल प्रभावित कुधूर गांव की गुमियापाल निवासी 20 वर्षीय पार्वती नाग के पे
एक अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना बीमारी से अब किडनी भी डैमेज होने लगी है। अर्थात, कोरोना का सीधी

COMMENTS