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परंपरा की जड़ों से जुड़े: आयुर्वेद और बादाम से सुबहों को बनाए और भी खास: डा मधुमिता कृष्णन

कैलिफ़ोर्निया के बादाम एक प्राकृतिक, संपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाला आहार हैं। अल्मंड बोर्ड ऑफ कैलिफ़ोर्निया 7,600 से अधिक बादाम उत्पादकों और प्रोसेसरों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से पारिवारिक रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।

हुज़ैफ़ा अबरार
September 20 2025 Updated: September 20 2025 16:51
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परंपरा की जड़ों से जुड़े: आयुर्वेद और बादाम से सुबहों को बनाए और भी खास: डा मधुमिता कृष्णन आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मधुमिता कृष्णन, पोषण विशेषज्ञ ऋतिका समद्दार, टेलीविज़न अभिनेत्री रोशनी चोपड़ा

लखनऊ। सुबह का समय पूरे दिन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में ‘दिनचर्या’ का विशेष महत्व है — यह एक दैनिक अनुशासन है जो आत्म-देखभाल को बढ़ावा देता है। इस दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है – प्रातःकाल जल्दी उठना और एक निश्चित सुबह की दिनचर्या का पालन करना। प्रकृति की लय के अनुरूप चलकर, यह दिनचर्या हमारे जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) को संतुलित करती है, आत्म-जागरूकता को बढ़ाती है, और शरीर एवं मन के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। सरल आयुर्वेदिक आदतें जैसे 'ब्रह्म मुहूर्त' में उठना, योग, ध्यान, प्राणायाम (सजग श्वास तकनीक), ऑयल पुलिंग (तेल कुल्ला), गुनगुना पानी पीना, और सुबह के समय बादाम का सेवन ये सभी मिलकर आपकी सुबह को सकारात्मक रूप से रूपांतरित कर सकते हैं और दिनभर के लिए बेहतर स्वास्थ्य की नींव रख सकते हैं।

स्वस्थ जीवनशैली, विशेष रूप से दिनचर्या (दिनाचर्या) और सुबह की आदतों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अल्मंड बोर्ड ऑफ कैलिफ़ोर्निया ने लखनऊ स्थित 'द रेनिसां' में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका शीर्षक था “आयुर्वेदिक ज्ञान से करें दिन की शुरुआत”। इस चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे सुबह की छोटी-छोटी, सजग आदतें जैसे कि बादाम को अपने आहार में शामिल करना, दीर्घकालिक स्वास्थ्य और संपूर्ण जीवनशैली को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

इस पैनल चर्चा में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मधुमिता कृष्णन, पोषण विशेषज्ञ ऋतिका समद्दार (रीजनल हेड, डायटेटिक्स, मैक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली), और लोकप्रिय टेलीविज़न अभिनेत्री रोशनी चोपड़ा शामिल रहीं। इस संवाद का संचालन रेडियो जॉकी समरीन ने किया।

दिनचर्या में सुबह की भूमिका के महत्व पर जोर देते हुए आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मधुमिता कृष्णन ने कहा: यदि हम अपनी सुबह की शुरुआत सही तरीके से करें, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे दिन पर पड़ता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठना, ऑयल पुलिंग, योग, ध्यान, भीगे हुए बादाम का सेवन और शरीर को हाइड्रेट करने के लिए गुनगुना पानी पीना, ये सभी अभ्यास शरीर और मन में संतुलन स्थापित करते हैं और व्यक्ति को तरोताज़ा, ऊर्जावान और केंद्रित महसूस कराते हैं। भीगे हुए बादाम का सेवन विशेष रूप से पीढ़ियों से एक सुबह की परंपरा रही है, क्योंकि यह समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, दोषों को संतुलित करता है और त्वचा की देखभाल में सहायक होता है। आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में भी बादाम को त्वचा की सेहत और प्राकृतिक चमक को बढ़ाने वाला बताया गया है। ये पारंपरिक अभ्यास आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं और इन्हें रोज़मर्रा की दिनचर्या में आसानी से शामिल किया जा सकता है। आयुर्वेद में आहार को संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार माना गया है।

ऋतिका समद्दार ने बताया कि सुबह का भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को पोषण और दिनभर की स्थिर ऊर्जा देने के लिए होता है। इसमें सही आहार की भूमिका बेहद अहम है।


रीजनल हेड डायटेटिक्स मैक्स हेल्थकेयर नई दिल्ली की रितिका समद्दार ने कहा सुबह के समय सही पोषण न केवल ऊर्जा और एकाग्रता को बढ़ाता है, बल्कि दिन की अच्छी शुरुआत के लिए भी आवश्यक है। मैं अक्सर लोगों को इसकी अहमियत याद दिलाती हूं। बादाम विशेष रूप से लगभग 15 पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं- जिनमें प्रोटीन, डायटरी फाइबर, हेल्दी फैट्स, मैग्नीशियम और ज़िंक शामिल हैं। ये पोषक तत्व ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने, भूख को नियंत्रित करने और लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य को सहयोग देने में मदद करते हैं। सुबह की शुरुआत बादाम के साथ करने से लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और समग्र सेहत को भी लाभ मिलता है। इन्हें अपने नाश्ते में शामिल करना बेहद आसान है। जैसे ओट्स, दलिया या पॉरिज पर कटे हुए बादाम डालकर क्रंच और प्रोटीन बढ़ाना, या फलों व सब्जियों की स्मूदी में बादाम या बादाम बटर मिलाना। भारतीय आहार दिशा निर्देश (Dietary Guidelines for Indians), जो ICMR-NIN द्वारा प्रकाशित किए गए हैं, उनके अनुसार भी बादाम जैसे मेवे पोषक माने जाते हैं और रोज़ाना सेवन के लिए उपयुक्त हैं। सालों के अनुभव से मैंने देखा है कि जब लोग दिन की शुरुआत मजबूत तरीके से करते हैं, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। यही कारण है कि मैं अपने कई ग्राहकों को बादाम खाने की सलाह देती हूं। यह आहार में शामिल करने के लिए एक आसान, प्राकृतिक और प्रभावशाली विकल्प है।

टीवी अभिनेत्री रोशनी चोपड़ा ने बताया कि कैसे बादाम उनके बचपन से ही सुबह की दिनचर्या का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा सुबह का समय मुझे सबसे प्रिय लगता है, क्योंकि यह वो पल होते हैं जब मैं अपने दिन के लिए सकारात्मक सोच और लक्ष्य तय करती हूं। मैं हमेशा कोशिश करती हूं कि जल्दी उठूं, व्यायाम करूं, पोषक आहार लूं और इस समय का भरपूर उपयोग करूं। बचपन से मेरी एक आदत रही है कि सुबह बादाम खाना। मुझे आज भी याद है कि मेरी मां रोज़ाना मुझे भीगे हुए बादाम देती थीं, और अब वही परंपरा मैं अपने बेटे के साथ भी निभा रही हूं। आज भी, चाहे लंबे शूट हों या व्यस्त दिनचर्या, बादाम मेरे लिए एक स्थायी साथी हैं, ये मुझे स्थिर ऊर्जा देते हैं और फोकस बनाए रखने में मदद करते हैं।

इस पैनल ने मिलकर यह दर्शाया कि कैसे प्राचीन आयुर्वेदिक प्रथाओं को आधुनिक जीवनशैली में सरल विकल्पों के माध्यम से अपनाया जा सकता है, जिससे सुबह के समय को ऊर्जा से भरपूर और उद्देश्यपूर्ण बनाया जा सके। एक सरल आदत जैसे दिन की शुरुआत बादाम से करना, संतुलन, फोकस और जीवंतता की ओर एक आसान और प्रभावशाली कदम के रूप में उभरी।

आयुर्वेद दिवस प्रतिवर्ष इस उद्देश्य से मनाया जाता है ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि आयुर्वेद एक वैज्ञानिक और फायदेमंद तरीका है जो सेहत को बनाए रखने और बीमारियों से बचाव में मदद करता है। इस खास दिन पर कैलिफ़ोर्निया के बादाम बोर्ड ने एक कार्यक्रम रखा, जिसमें बताया गया कि दिन की शुरुआत आयुर्वेदिक तरीकों से करना कितना फायदेमंद है। इसमें डॉ. मधुमिता कृष्णन, न्यूट्रिशनिस्ट ऋतिका समद्दार और अभिनेत्री रोशनी चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने आयुर्वेदिक दिनचर्या को अपनाकर कैसे अपनी सेहत को बेहतर बनाया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे जागरूक और संतुलित आदतें लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य में मदद करती हैं।

कैलिफ़ोर्निया के बादाम एक प्राकृतिक, संपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाला आहार हैं। अल्मंड बोर्ड ऑफ कैलिफ़ोर्निया 7,600 से अधिक बादाम उत्पादकों और प्रोसेसरों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से पारिवारिक रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। यह संस्था अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण से मार्केटिंग, कृषि और उत्पादन के विभिन्न पहलुओं को प्रोत्साहित करती है। 1950 में स्थापित, यह बोर्ड मोडेस्टो, कैलिफ़ोर्निया में स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो उत्पादकों द्वारा स्थापित फेडरल मार्केटिंग ऑर्डर का संचालन करता है। यह प्रक्रिया संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) के पर्यवेक्षण में संचालित होती है। अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें: www.almonds.in

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