












































प्रतीकात्मक फोटो
- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
कोरोना महामारी इस वक्त दुनिया के हर देश के लिए महासंकट बना हुआ है। जो देश अपने को सबसे स्वच्छ और आधुनिक मानते हैं (यूरोप और अमेरिका), देखा जा रहा है कि संकट उनके यहां सबसे अधिक गहराया है, ऐसे में जब भारत ''सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः'' की भावना के साथ वर्तमान में नेतृत्व करता दिखता है, तब हर भारतीय अपने आप में और अपनी चुनी हुई मोदी सरकार को लेकर गौरव अनुभव कर रहा है।
कोविड वैक्सीन विकसित होने के बावजूद, दुनिया के कई देशों के सामने जो बड़ी समस्या है वह उनके यहां वैक्सीन नहीं बनने के साथ अर्थ का अभाव है। उनका उतना बजट नहीं कि वे अमेरिकी, चीनी, रूस या ब्रिटेन से वैक्सीन खरीद सकें। ऐसे देशों के लिए भारत ही आशा की किरण है। छोटे और कम आय वाले कई देशों को भारत ने अपने यहां बनी ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन 'कोविशील्ड' की खेप भिजवाई है, वह भी तोहफे के रूप में। एक तरफ देश में टीकाकरण अभियान जारी है तो दूसरी तरफ, इन देशों की मदद भी। भारत की इस पहल को दुनिया सराह रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ट्रेडोस घेब्रेयसिस ने वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने में निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया है। इसी प्रकार से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी भारत की वैक्सीन निर्माण क्षमता की प्रशंसा करते हुए इसे विश्व के लिए एक थाती बताया है। इन दोनों की तरह ही अनेक राष्ट्राध्यक्षों को भी विश्वास है कि ''ग्लोबल वैक्सीनेशन कैंपेन को कामयाब बनाने के लिए भारत हर तरह की भूमिका निभाएगा।''
हमारे लिए अच्छी बात यह भी है कि आज भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता बहुत अधिक है। भारत की वैक्सीन अन्य देशों के लिए उनके जीवित बने रहने का आधार सिद्ध हो रही है। यही कारण है कि भारत में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद से लगातार अन्य देशों में भी इसकी मांग जोर पकड़ रही है। स्थिति यह है कि दुनिया के 92 देशों ने मेड इन इंडिया वैक्सीन के लिए भारत से संपर्क किया है। इससे वैक्सीन हब के रूप में भारत की साख और मजबूत हुई है।
इसी के साथ यह भी हमारे लिए बड़ी सफलता की बात है कि कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद भारत में निर्मित टीकों के नगण्य साइड इफेक्ट देखे गए हैं। निश्चित रूप से यह उपलब्धि हमारे विज्ञानियों के अथक परिश्रम का परिणाम है कि अपने कोरोना योद्धाओं का हौसला बढ़ाने वाले इस देश ने न केवल आज दो-दो वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल की बल्कि अब तीसरे की तैयारी लगभग पूर्णता की ओर है।
वस्तुत: यह किसी गौरव से कम नहीं कि दुनिया भर में दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की वैक्सीन में 70 फीसद का उत्पादन अकेला भारत करता है। शेष 30 प्रतिशत विश्व के सभी देश मिलाकर कर पाते हैं। वैक्सीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ओर से भारत की नीति को लेकर भी साफ कर दिया है कि भारत अपने व्यापक वैक्सीन इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल दूसरे देशों की मदद में तब तक करता रहेगा जब तक कि कोरोना का टीका अंतिम व्यक्ति तक नहीं लग जाता है। सरकार का साफ स्टैंड है कि दुनिया भर को वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए। महामारी के दौर को स्थायी न बनाने दिया जाए। जिसके बाद देखने में आ रहा है कि देश के लोगों की जरूरत पूरी करने के साथ ही भारत अपने पड़ोसियों और सहयोगियों को पहली प्राथमिकता दे रहा है। भारत सरकार सद्भावना के तौर पर नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मॉरीशस, बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई पड़ोसी देशों को वैक्सीन भेज भी रही है। उसने तो मानवीयता के हित में अपने धुर विरोधी पाकिस्तान को भी संदेश भिजवाया है कि अहंकार को त्यागो, जरूरत को देखते हुए बिना संकोच अपनी वैक्सीन की आवश्यकता बताओ।
यहां हम यदि आंकड़ों के साथ देखें तो भारत ने अबतक बांग्लादेश- 20 लाख डोज, म्यांमार- 15 लाख, नेपाल- 10 लाख, श्रीलंका- 5 लाख, भूटान- डेढ़ लाख, मालदीव- 1 लाख, मॉरीशस- 1 लाख, ओमन- 1 लाख, सेशेल्स- 50 हजार डोज, अफगानिस्तान- 5 लाख, निकारगुआ- 2 लाख, मंगोलिया- 1.5 लाख, बारबेडोज- 1 लाख, डॉमिनिका- 70 हजार डोज पहली खेम में पहुंचाए हैं। इनके अलावा भी अन्य देश ब्राजील से लेकर यूरोप, अफ्रीकी व अमेरिकी हैं, जिन्हें भारत लगातार वैक्सीन उपलब्ध करवा रहा है।
वस्तुत: यही कारण है विश्व समुदाय आज भारत के गुणगान गा रहा है। भारत ने जहां-जहां वैक्सीन भेजी है, उन देशों ने भी बेहद भावुक होकर शुक्रिया अदा किया है। अमेरिका बार-बार मानवता की सेवा में हमारे कार्यों को प्रमाणित कर रहा है। अमेरिका के 'डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के दक्षिण और मध्य एशियाई देशों के विभाग ने भारत की ओर से अपने पड़ोसी मुल्कों की मदद की जबरदस्त प्रशंसा में यहां तक कह दिया है कि ''हम वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की भूमिका की सराहना करते हैं, जो दक्षिण एशिया में कोविड-19 वैक्सीन की लाखों डोज साझा कर रहा है। भारत द्वारा वैक्सीन के फ्री शिपमेंट मालदीव, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में पहुंचने लगे हैं जो आगे और भी देशों में भेजे जाएंगे। भारत एक सच्चा दोस्त है जो अपने फार्मा का उपयोग वैश्विक समुदाय की मदद के लिए कर रहा है।'' वहीं, कई देश भारत से वैक्सीन हासिल होने की आशा लगाकर बैठे हैं। ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि कोरोना वैक्सीन को लेकर विश्व की नजर भारत पर टिकी हुई है।
वास्तव में जो तारीफ आज विश्व समुदाय की ओर से भारत को मिल रही है, यह उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो कल तक कोरोना महामारी के विरुद्ध लड़ाई के आरंभिक दौर में अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताली-थाली बजवाने और दीये जलवाने जैसे आह्वान का मजाक बना रहे थे और कह रहे थे कि दुनिया वैक्सीन बनाने में लगी है, भारत ताली-थाली बजाने में लगा है। इन लोगों ने हमारे विज्ञानियों की प्रतिभा पर भी विश्वास नहीं किया था।







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