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यह उपलब्धि मेदांता लखनऊ के चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीक का इस्तेमाल और विशेषज्ञ डॉक्टर्स की दक्षता का प्रमाण है। इन सर्जरी में विभिन्न विभागों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। गायनकॉलजी विभाग ने 219 सर्जरी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) सर्जरी विभाग ने 137, यूरोलॉजी विभाग ने 109, कार्डियक विभाग ने 23 और अन्य विभागों ने 21 सर्जरी रोबोटिक तकनीक से कीं। इस अवसर पर मेदांता द्वारा मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मेडिकल डायरेक्टर व डायरेक्टर यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. राकेश कपूर, डॉ. अनीश श्रीवास्तव, डॉ. मनमीत सिंह, डायरेक्टर गायनकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स डॉ. नीलम विनय, डायरेक्टर जीआई सर्जरी डॉ. आनंद प्रकाश और डॉ. संदीप वर्मा, डायरेक्टर कैंसर केयर एंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जरी डॉ. अमित अग्रवाल, और डॉ रोमा प्रधान, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. गौरंगा मजूमदार, सीनियर कंसल्टेंट लिवर ट्रांसप्लांट विवेक गुप्ता, कंसल्टेंट पीडीयाट्रिक सर्जरी एंड यूरोलॉजी डॉ. अन्वेषा चक्रवर्ती और डॉ श्यामेदंर शर्मा शामिल रहे।
इस उपलब्धि पर मेदांता लखनऊ के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि 509 रोबोटिक सर्जरी का यह रिकॉर्ड मेदांता की बेहतरीन व्यवस्था और इनोवेशन के लिए हमारा कमिटमेंट दिखाता है। हमारी मॉडर्न रोबोटिक तकनीक और चिकित्सकों की कुशल टीम ने मरीजों को सटीक, सुरक्षित और तेजी से रिकवर करने वाली वाली सेवाएं दी हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर मरीज को बेहतर उपचार मिले और हम इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
रोबोटिक सर्जरी से आसान हुईं मरीजों की राहें
स्त्री रोगों में रोबोटिक सर्जरी की बात की जाए तो यह संख्या सबसे अधिक है। इसमें महिलाओं के गर्भाशय, अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब आदि से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए मिनिमली इनवेसिव तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यूटरीन फाइब्रॉइड्स, एंडोमेट्रियोसिस, पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स, हैवी ब्लीडिंग/मेनोरेजिया, एडनेक्सल डिजीज, एडनेक्सल डिजीज और गायनिक कैंसर की समस्या से ग्रसित महिलाओं की रोबोटिक सर्जरी से न सिर्फ तेजी रिकवरी होती है।
इसके अलावा रोबोट की मदद से प्रोस्टेट कैंसर, किडनी कैंसर और किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को ट्रीट किया जाता है। अक्सर लोगों में यह धारणा होती है कि प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी के बाद यूरिन लीकेज होता है या पूरी तरह से प्रोस्टेट नहीं निकल पाता है लेकिन रोबोटिक सर्जरी की मदद से प्रोस्टेट में न सिर्फ सटीक टांके लगाने में मदद मिलती है बल्कि तेजी से रिकवरी भी होती है। ठीक ऐसे ही किडनी के ट्यूमर में पहले पूरी किडनी निकालनी पड़ती थी लेकिन अब रोबोटिक तकनीक से किडनी बचा पाना संभव हो गया है।
गैस्ट्रो में रोबोटिक सर्जरी की बात की जाए तो पेट से जुड़ी बीमारियों में रोबोट की मदद से सर्जरी बेहद कारगर साबित हो रही है। इसमें पेट का कैंसर, ग्रासनली का कैंसर, हायटल हर्निया और एसिड रिफ्लक्स, आंतों के कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर, लिवर/बाइलरी कैंसर और गॉलब्लैडर को हटाना शामिल है। पेट से जुड़े ट्यूमर और कैंसर के प्रभावी इलाज में रोबोटिक सर्जरी बेहद कारगर साबित हो रही है। इस अलावा हृदय रोग में भारत में हर साल लगभग 2 से 2.5 लाख बायपास सर्जरी होती हैं। रोबोटिक तकनीक अब उन मरीज़ों के लिए उम्मीद बनकर आई है जो पारंपरिक ऑपरेशन से डरते हैं। इसमें डॉक्टर्स को भी शारीरिक थकावट नहीं होती और एक दिन में ज़्यादा सर्जरी कर पाना भी मुमकिन हो पाता है। इसके अलावा रोबोटिक तकनीक के माध्यम से पीडियाट्रिक और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भी बहुत मदद मिल रही है।







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