











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। महामारी के शुरूआती फेज के दौरान उत्तर प्रदेश में शराब और तम्बाकू की बिक्री काफी बढ़ गयी थी । रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डाक्टरों ने कहा कि इस ट्रेंड का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट लीवर की बीमारियों को लेकर बढ़ा है। इसमें एल्कोहोलिक फैटी लीवर की बीमारी, लीवर सिरोसिस और एल्कोहोलिक हेपटाईटिस शामिल है। शराब और तम्बाकू से लीवर को नुकसान पहुँचता है और इसका पता तब तक नहीं लगता है जब तक लीवर गंभीर रूप से डैमेज नही हो जाता है।
रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी कन्सलेन्ट एमडी, डीएम डॉ प्रवीण झा ने कहा कि उन्होंने देखा है कि लोग महामारी के कारण बढे तनाव, बोरियत और अकेलेपन की वजह से शराब और अन्य नशीले पदार्थो का सेवन ज्यादा करने लगे है।

रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी कन्सलेन्ट डॉ प्रवीण झा ने कहा, “30% लोग शराब से सम्बंधित लीवर की समस्या से पीड़ित है और इनमे से 10% लोगों को सर्जरी और ट्रांसप्लांट की जरुरत है। हमें न केवल लखनऊ से ऐसे मरीज मिल रहे है बल्कि आसपास के जिलो से भी ऐसे मरीजो के आने का तांता लगा हुआ है। शराब और तंबाकू से संबंधित लीवर की बीमारी का पता या तो अन्य स्थितियों के लिए होने वाले टेस्ट में चलता है या एडवांस लीवर डैमेज हो जाने पर पता चलता है। लीवर बहुत लचीला और अपने खुद में सुधार करने में सक्षम होता है। जब भी आपका लीवर शराब को छानता है, तब लीवर की कुछ कोशिकाएं मर जाती हैं। लीवर नई कोशिकाओं को विकसित कर सकता है, लेकिन कई सालों तक लंबे समय से शराब पीने से इसके दुबारा कोशिका को उत्पन्न करने की क्षमता कम हो सकती है। यह आपके लीवर को गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।”
लीवर को डैमेज होने से रोकने का मुख्य इलाज शराब का सेवन रोकना होता है, और इसके लिए शराब को जीवन भर के लिए पीना बंद कर देना चाहिए। यह आपके लीवर को और ज्यादा नुकसान होने के खतरे को कम करता है और इसे ठीक होने का बढ़िया मौका मिल सकता है। अगर कोई व्यक्ति शराब बहुत ज्यादा पीता है, तो उसे शराब पीने से रोकना बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन लोकल अल्कोहल सपोर्ट सर्विस के माध्यम से सहायता, सलाह और चिकित्सा की मदद से शराब को छुड़ाया जा सकता है। गंभीर केसेस में जहां लीवर काम करना बंद कर देता है और तब जाकर आप शराब पीना बंद करते है तो इससे लीवर के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होता है।
डॉ प्रवीण झा ने आगे कहा की,“कोविड के दौरान पहले से ही लीवर से संबंधित बीमारियों वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है, जैसे कि जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, फैटी लीवर या सिरोसिस होती है उन्हें गंभीर कोविड-19 से अन्य व्यक्तियों की तुलना में ज्यादा खतरा होता है और लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहना पड़ सकता है और अन्य कॉम्प्लिकेशन का भी सामना करना पड़ सकता है, कई केसेस में मृत्यु भी हो सकती है”।







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