देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

भारत में बढ़ रही है मानसिक रोगियों की संख्या

मानसिक रोगियों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक भारत में इसे एक रोग के रूप में पहचान नहीं मिल पाई है, आज भी यहाँ मानसिक स्वास्थ्य की पूर्णतः उपेक्षा की जाती है और इसे काल्पनिक माना जाता है।

लेख विभाग
October 10 2022 Updated: October 10 2022 22:21
0 48497
भारत में बढ़ रही है मानसिक रोगियों की संख्या प्रतीकात्मक चित्र

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, तकरीबन 7.5 प्रतिशत भारतीय किसी-न-किसी रूप में मानसिक विकार से ग्रस्त हैं। साथ ही WHO के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2020 तक भारत की लगभग 20 प्रतिशत आबादी मानसिक रोगों से पीड़ित होगी। मानसिक रोगियों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक भारत में इसे एक रोग के रूप में पहचान नहीं मिल पाई है, आज भी यहाँ मानसिक स्वास्थ्य की पूर्णतः उपेक्षा की जाती है और इसे काल्पनिक माना जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि जिस प्रकार शारीरिक रोग हमारे लिये हानिकारक हो सकते हैं उसी प्रकार मानसिक रोग भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

 

मानसिक स्वास्थ्य किसे कहते हैं ?

मानसिक स्वास्थ्य में हमारा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण (social welfare) शामिल होता है। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है।गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) (WHO) अपनी स्वास्थ्य की परिभाषा में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी शामिल करता है।

 

मानसिक स्वास्थ्य समस्या और दुष्प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्ष 2020 तक अवसाद (Depression) दुनिया भर में दूसरी सबसे बड़ी समस्या होगी।कई शोधों में यह सिद्ध किया जा चुका है कि अवसाद, ह्रदय संबंधी रोगों का मुख्य कारण है।मानसिक बीमारी (Mental diseases) कई सामाजिक समस्याओं जैसे- बेरोज़गारी, गरीबी और नशाखोरी आदि को जन्म देती है।

 

भारत में मानसिक रोग का वर्तमान परिदृश्य

WHO (WHO) के अनुसार, भारत में मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों की सबसे अधिक संख्या मौजूद है।आँकड़े बताते हैं कि भारत में 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है।उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भारत एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य महामारी की ओर बढ़ रहा है (mental health epidemic)।

भारत (India) में मानसिक स्वास्थ्यकर्मियों की कमी भी एक महत्त्वपूर्ण विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्ष 2011 में भारत में मानसिक स्वास्थ्य विकार से पीड़ित प्रत्येक 100,000 रोगियों के लिये 0.301 मनोचिकित्सक और 0.07 मनोवैज्ञानिक थे।

वर्ष 2011 की जनगणना के आँकड़े बताते हैं कि भारत में तकरीबन 1.5 मिलियन लोगों में बौद्धिक अक्षमता (intellectual disability) और तकरीबन 722,826 लोगों में मनोसामाजिक विकलांगता मौजूद है। इसके बावजूद भी भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर किये जाने वाला व्यय कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय का मात्र 1.3 प्रतिशत है।

साथ ही वर्ष 2011 की जनगणना आँकड़ों से पता चलता है कि मानसिक रोगों से ग्रसित तकरीबन 78.62 फीसदी लोग बेरोज़गार हैं। मानसिक विकारों के संबंध में जागरूकता की कमी भी भारत के समक्ष मौजूद एक बड़ी चुनौती है।

देश में जागरूकता की कमी और अज्ञानता के कारण लोगों द्वारा किसी भी प्रकार के मानसिक स्वास्थ्य विकार से पीड़ित व्यक्ति को ‘पागल’ ही माना जाता है एवं उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है।भारत में मानसिक रूप से बीमार लोगों के पास या तो देखभाल की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और यदि सुविधाएँ हैं भी तो उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है।

 

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ और मुद्दे

आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत में महिलाओं की आत्महत्या दर (suicide rate) पुरुषों से काफी अधिक है। जिसका मूल घरेलू हिंसा, छोटी उम्र में शादी, युवा मातृत्व और अन्य लोगों पर आर्थिक निर्भरता आदि को माना जाता है। महिलाएँ मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से पुरुषों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होती हैं। परंतु हमारे समाज में यह मुद्दा इस कदर सामान्य हो गया है कि लोगों द्वारा इस पर ध्यान ही नहीं दिया जाता।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियाँ भी एक बड़ी चुनौती है। उदाहरण के लिये भारत में वर्ष 2017 तक आत्महत्या को एक अपराध माना जाता था और IPC के तहत इसके लिये अधिकतम 1 वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया था। जबकि कई मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि अवसाद, तनाव और चिंता आत्महत्या के पीछे कुछ प्रमुख कारण हो सकते हैं।

ध्यातव्य है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को संबोधित करने के लिये भी भारत के पास आवश्यक क्षमताओं की कमी है। आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में भारत की विशाल जनसंख्या के लिये मात्र 5,000 मनोचिकित्सक (psychiatrists) और 2,000 से भी कम ​​मनोवैज्ञानिक (psychologists) मौजूद थे।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को ठीक ढंग से संबोधित न किये जाने के कारण अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल देश की मानव पूंजी को नुकसान होता है बल्कि प्रभावित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है, क्योंकि इस रोग के इलाज की जो भी सुविधाएँ उपलब्ध हैं वे अपेक्षाकृत काफी महँगी हैं।

WHO के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य (mental health) विकारों का सर्वाधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ता है और चूँकि भारत की अधिकांश जनसंख्या युवा है इसलिये यह एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता है।यदि कोई व्यक्ति एक बार किसी मानसिक रोग से ग्रसित हो जाता है तो जीवन भर उसे इसी तमगे के साथ जीना पड़ता है, चाहे वह उस रोग से मुक्ति पा ले। आज भी भारत में इस प्रकार के लोगों के लिये समाज की मुख्य धारा से जुड़ना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

मानसिक विकारों (mental disorders) और लक्षणों के संबंध में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर रोगी और समाज के अन्य लोगों के बीच एक अंतर उत्पन्न हो जाता है और रोगी को सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

कोरोना संक्रमण की चौथी लहर का ख़तरा टला !

कोरोना संक्रमण की चौथी लहर का ख़तरा टला !

एस. के. राणा May 17 2022 33733

पिछले 15 दिनों के आंकड़ें 1 मई से 15 मई तक देखें तो देश में कोविड-19 के करीब 46,020  नए मरीज मिले हैं

बीडीके अस्पताल में मेडिकल कॉलेज निर्माण का काम शुरू

बीडीके अस्पताल में मेडिकल कॉलेज निर्माण का काम शुरू

जीतेंद्र कुमार March 08 2023 39035

झुंझुनूं के समसपुर में बन रही मेडिकल कॉलेज शहर के निकट समसपुर गांव में 13.79 हैक्टेयर भूमि पर मेडिक

मॉनसून में बच्चों की सेहत का ऱखें खास ख्याल

मॉनसून में बच्चों की सेहत का ऱखें खास ख्याल

लेख विभाग July 15 2023 34263

दाल में प्रोटीन होता है, ये मौसमी संक्रमण से बचाने और बच्चों की इम्यूनिटी में मददगार होती है।यहीं नह

योग में है शानदार करियर, विदेशी छात्रों में बढ़ी जागरूकता

योग में है शानदार करियर, विदेशी छात्रों में बढ़ी जागरूकता

विशेष संवाददाता November 02 2022 32707

जर्मनी और चीन समेत कई देशों के छात्र संस्कृत और योग में करियर की संभावनाएं तलाश रहे हैं। योग और संस्

मौसम का बदलता मिजाज इन मरीजों की बढ़ा सकता है परेशानी

मौसम का बदलता मिजाज इन मरीजों की बढ़ा सकता है परेशानी

आरती तिवारी October 28 2022 29557

यह एलर्जी स्किन के अलावा सांस की भी हो सकती हैं। सांस की बीमारियों से निपटने के लिए समय रहते अवेयर

जापानी इन्सेफेलाइटिस: लक्षण, कारण, निदान, प्रबंधन और जटिलताएँ

जापानी इन्सेफेलाइटिस: लक्षण, कारण, निदान, प्रबंधन और जटिलताएँ

लेख विभाग July 17 2022 63189

जापानी इन्सेफेलाइटिस फलैवी वायरस के कारण होता हैं, जो कि मस्तिष्क के आसपास की झिल्ली को प्रभावित करत

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने, इलाज कराने आई महिला के एक्स-रे में निकली चाबी

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने, इलाज कराने आई महिला के एक्स-रे में निकली चाबी

admin March 22 2023 23922

जहां महिला के एक्स रे में चाबी निकली है। अब इस बात को लेकर महिला अपने साथ एक्स रे को लेकर इलाज के लि

अंग प्रत्यारोपण कर मरीजों को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

अंग प्रत्यारोपण कर मरीजों को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

विशेष संवाददाता January 08 2023 32789

तिरुवनंतपुरम स्थित मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 24 घंटे में 5 मरीजों को जीवनदान मिला।

दिल्ली में तेजी से फैल रहा डेंगू

दिल्ली में तेजी से फैल रहा डेंगू

एस. के. राणा July 31 2023 0

राजधानी दिल्ली में इस साल जुलाई माह में ही डेंगू के 121 मामले आ गए, जो पिछले पांच सालों में जुलाई मा

फ़्रंट ऑफ़ पैक लेबलिंग विषय पर कार्यशाला - स्वस्थ भोजन का चयन उपभोक्ता का अधिकार।

फ़्रंट ऑफ़ पैक लेबलिंग विषय पर कार्यशाला - स्वस्थ भोजन का चयन उपभोक्ता का अधिकार।

हुज़ैफ़ा अबरार April 13 2022 55670

डिब्बाबंद नुकसानदेह खाद्य और पेय पदार्थों के पैकेट पर फ्रंट ऑफ पैक लेबल (FoPL) यानी क‍ि ऊपर की ओर स्

Login Panel