











































प्रतीकात्मक
कोरोना महामारी (corona pandemic) ने हमारी जीवनशैली को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन (lockdown) के कारण वर्क फ्रॉम होम (work from home) और ऑनलाइन क्लासेज (online classes ) जैसी आदतों को बीमारी से बचाव के लिहाज से तो फायदेमंद माना जा रहा है, हालांकि इसके कुछ ऐसे दुष्प्रभाव (side effects) देखे जा रहे हैं जिसके कारण लोगों में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (serious health problems) का जोखिम कई गुना तक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, घर पर रहने के कारण हम सभी का स्क्रीन टाइम काफी (screen time) बढ़ गया है, जिसे सेहत के लिहाज से नुकसानदायक माना जाता है। स्क्रीन टाइम का मतलब मोबाइल-कंप्यूटर (mobile-computer) पर बिताया जाने वाला समय होता है।
नींद विकार के बढ़े मामले - increased incidence of sleep disorders

स्वस्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मोबाइल-कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल का सबसे ज्यादा असर हमारी नींद पर देखा जा रहा है। इन डिवाइसों की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारी नेचुरल सर्कडियन रिदम (natural circadian rhythm) को प्रभावित करती है, जिसके कारण लोगों में नींद की समस्या काफी बढ़ गई है। नीली रोशनी के लगातार संपर्क में रहने के कारण नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन मेलाटोनिन (melatonin) का प्रभाव कम होने लगता है। नींद की कमी के कारण तनाव (stress) और चिंता (anxiety) बढ़ने के साथ शरीर पर अन्य कई दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
बढ़ रही है तनाव की समस्या - Increasing stress problem

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम समय के साथ हमें चिड़चिड़ा बनाता जा रहा है। लोगों के मस्तिष्क में कई ऐसे रसायनिक परिवर्तन (chemical changes) देखे जा रहे हैं जो मानसिक सेहत (mental health) को गंभीर तौर से प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि लोगों में तनाव-चिंता और अवसाद के मामले पिछले कुछ वर्षों में काफी अधिक देखे जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़े हुए स्क्रीन टाइम के कारण संज्ञानात्मक कार्य में कमी, ब्रेन फॉग और याददाश्त (memory) से संबंधित दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं।
मोटापे के शिकार हो रहे हैं लोग - people are becoming obese

डिजिटल डिवाइसों का अधिक उपयोग स्वाभाविक तौर पर हमारी शारीरिक निष्क्रियता को बढ़ा देता है। इसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ाने जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल के साथ-साथ कुछ खाते रहने की आदत इस समस्या को और बढ़ा देती है। प्रतिदिन दो घंटे का अतिरिक्त स्क्रीन टाइम मोटे होने का खतरा 8 गुना तक बढ़ा देता है। मोटापे को हृदय रोग, डायबिटीज (diabetes) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।







हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 693
हुज़ैफ़ा अबरार May 31 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार May 31 2026 0 0
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4025
एस. के. राणा January 20 2026 0 3920
एस. के. राणा January 13 2026 0 3899
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3899
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3591
एस. के. राणा February 01 2026 0 3276
एस. के. राणा February 04 2026 0 3129
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86413
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34140
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37278
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35014
लेख विभाग March 19 2022 0 34496
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71797
सोमवार को स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में नोबेल कमेटी के सचिव थॉमस
सरकारी मेडिकल संस्थान व अस्पताल में इलाज पर खर्च होने वाली रकम की कोई बाध्यता नहीं होगी जबकि प्राइवे
उत्तर प्रदेश के जाने माने चिकित्सक डॉ. सूर्यकान्त को प्रतिष्ठित मैकमास्टर टेक्स्टबुक ऑफ इंटरनल मेडिस
पिछले हफ्ते ही दिल्ली में 262 मरीज सामने आए हैं। यह आंकड़ा दिल्ली नगर निगम के एंटी मलेरिया ऑपरेशन द
एलोवेरा में मौजूद विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई समेत अन्य कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों क
‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत आज रविवार को प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क स्वास्थ्य
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने रो बनाम वेड मामले से संबंधित फैसले को पलटते हुए गर्भपात कराने के महिलाओं
विदेश में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को भारत में सीधे डॉक्टरी की प्रैक्टिस करने की अनुमत
कोविड के प्रबंधन के लिए सार्वजनिक हित में हेपरिन इंजेक्शन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स
किसी भी इंसान को हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक ब्लड का फ्लो धीमा या ब्लॉक हो जाए। यह ब्लॉकेज आर्टर

COMMENTS