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डीएनए सीक्वेंसिंग से एक लाख साल पुरानी वंशावली बनाई गई

एक लाख साल पुरानी वंशावली बनाने में मिली सफलता के बाद यह पता किया जा सकेगा कि हमारे पूर्वज कब और कहां रहते थे। इसकी मदद से अनुवांशिक बीमारियों की पहचान के साथ ही मेडिकल रिसर्च में काफी मदद मिलेगी।

हे.जा.स.
February 26 2022 Updated: February 27 2022 01:27
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डीएनए सीक्वेंसिंग से एक लाख साल पुरानी वंशावली बनाई गई प्रतीकात्मक

लंदन। एक लाख साल पुरानी वंशावली बनाने में मिली सफलता के बाद यह पता किया जा सकेगा कि हमारे पूर्वज (ancestors) कब और कहां रहते थे। साइंस जनरल में छपे एक अध्ययन के अनुसार इसकी मदद से अनुवांशिक बीमारियों (genetic diseases) की पहचान के साथ ही मेडिकल रिसर्च (medical research) में काफी मदद मिलेगी। 

अब तक इस तरह की वंशावली (genealogy) को बनाने में सबसे बड़ी समस्या अलग-अलग मिले जीनोम सीक्वेंस के डाटाबेस को इकट्ठा कर इसे संभालने के लिए गणितीय विधि को विकसित करने में आती थी। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विवि के शोधकर्ताओं (researchers) द्वारा विकसित इस नई विधि से आसानी से कई जगहों से मिले डाटाबेस को इकट्ठा करने के साथ-साथ लाखों जीनोम सीक्वेंस (genome sequences) को जोड़ा जा सकेगा। 

ऑक्सफोर्ड विवि (Oxford University) के अनुवांशिक विज्ञानी यान वोंग ने बताया, इस वंशावली की मदद से मानव शरीर में होने वाले अनुवांशिक बदलावों (genetic changes) का इतिहास जाना जा सकेगा। जैसे-जैसे आधुनिक और प्राचीन डीएनए (ancient DNA) सैंपल की जीनोम सीक्वेंस की गुणवत्ता में सुधार आता जाएगा, हम एक ऐसा नक्शा तैयार करने में सफल होंगे जिससे आज मनुष्यों में होने वाले अनुवांशिक बदलावों के बारे में पता लगाया जा सकेगा। इससे अनुवांशिक बदलावों को समझने के लिए गणितीय संकलन (mathematical compilation) के जरिए ये पता करने में आसानी हो सकेगी कि हमारे पूर्वज कहां रहे होंगे।

अगली पीढ़ी के डीएनए सीक्वेंसिंग के लिए नींव साबित होगा
अब यह भी पता करने में आसानी होगी कि कैसे एक व्यक्ति के अनुवांशिक लक्षण दूसरे से मेल खाते हैं। यह अध्ययन अगली पीढ़ी की डीएनए सीक्वेंसिंग की नींव साबित होगा।

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