











































प्रतीकात्मक चित्र
बेंगलुरू। बीते कुछ महीनों में जब से ऑफिस और स्कूल फिर से खुले हैं बच्चों और नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी वापस से पटरी पर लौटी है। ठीक पहले की तरह लोगों से सीखना, खेल-कूद और स्कूल के बाद की गतिविधियां फिर से शुरू हो चुकी हैं। बहुत से परिवार वापस से अपनी पुरानी जिंदगी पाकर जहां पहले से खुश महसूस कर रहे हैं वहीं कुछ लोगों के लिए अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजना एक चुनौती बन चुका है। लोगों के सामने फ्लू, स्वाइन फ्लू, वायरल, कोविड जैसी बीमारियों का खतरा अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरा रहा है।
बीते कुछ हफ्तों में बेंगलुरू (Bengaluru) के डॉक्टरों ने शहर में बच्चों के बीच सांस संबंधी इंफेक्शन के मामलों में वृद्धि दर्ज की है। बारिश के मौसम के दौरान लो इम्यूनिटी के कारण स्कूल जाने वाले बच्चें (children) आमतौर पर सांस संबंधी इंफेक्शन का शिकार होते हैं लेकिन बीते दो वर्षों की तुलना में इस साल मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। स्कूल (school) का खुलना बच्चों के बीच क्रॉस इंफेक्शन की वजह बन रहा है, जिसके कारण बार-बार इंफेक्शन (infection) होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इतना ही नहीं मौसम में वायरस को तेजी से बढ़ने और फैलने में मदद कर रहा है। शहर के बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से ज्यादा से ज्यादा लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।
बेंगलुरू के राधाकृष्णा मल्टीस्पेशालियाटी हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. बी.के विश्वनाथ भट ने एक अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि हम बच्चों में वायरल और बैक्टीरियल दोनों प्रकार के इंफेक्शन (infection) के मामलों में वृद्धि देख रहे हैं। बच्चों में एच1एन1 (H1N1) के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। बच्चों में दिखाई दे रहे हैं ये लक्षण -
1- सर्दी
2- छींक (sneeze)
3- बुखार (Fever)
4- भूख न लगना
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर सांस संबंधी इंफेक्शन का समय पर इलाज न किया जाए तो ये निमोनिया और प्लूरल कैविटी (फेफड़ों की सरंचना) में पस जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। इस तरह के मामलों में बच्चे को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत तक आ जाती है और उसका इलाज (treatment) लंबा चलता है। उन्होंने कहा कि हम इस इंफेक्शन की वजह से बहुत से बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर चुके हैं।
Edited by Shweta Singh







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