देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

जन्मजात विकारों की वजह से दुनियाभर में हर साल तीन लाख नवजात मर जातें हैं: डब्लूएचओ

जन्मजात कमजोरी व शारीरिक विकारों की वजह से हर साल 3.03 लाख नवजात मर रहे हैं। जो बच रहे हैं वे जीवन भर किसी न किसी शारीरिक चुनौती का सामना करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन विकारों के बारे में जानकारी बढ़ाने व सावधान रहने की सिफारिश की है।

एस. के. राणा
March 03 2022 Updated: March 04 2022 01:07
0 32971
जन्मजात विकारों की वजह से दुनियाभर में हर साल तीन लाख नवजात मर जातें हैं: डब्लूएचओ प्रतीकात्मक

नयी दिल्ली। जन्मजात कमजोरी व शारीरिक विकारों की वजह से हर साल 3.03 लाख नवजात मर रहे हैं। जो बच रहे हैं वे जीवन भर किसी न किसी शारीरिक चुनौती का सामना करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 3 मार्च को विश्व जन्मजात विकार दिवस पर यह संख्या जारी कर इन विकारों के बारे में जानकारी बढ़ाने व सावधान रहने की सिफारिश की है।

संगठन ने इन विकारों पर भारत को लेकर अलग से डाटा जारी नहीं किया, लेकिन बताया कि 2014 से भारत, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, म्यांमार और नेपाल में अस्पतालों में होने वाले प्रसव में कुछ आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इनके अनुसार 2021 में 40 लाख बच्चों का जन्म दर्ज हुआ, जिनमें से 45 हजार में यह जन्मजात विकार मिले।

संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने बताया कि 2019 में विश्व में इस समस्या ने 5.30 लाख बच्चों का जीवन असमय खत्म किया था, इनमें से 1.17 लाख दक्षिण-पूर्व एशिया के थे। यह हमारे यहां बच्चों की मौत की तीसरी बड़ी वजह है। विश्व में नवजात में 12 प्रतिशत मौतें इन विकारों से हो रही हैं। मौत ही नहीं, जीवित रहे बच्चों को जीवन भर स्वास्थ्य समस्याएं व दिव्यांगता भोगनी पड़ सकती हैं। पुणे विश्वविद्यालय के अनुसार, भारत में 2017 में 82 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी।

37 हजार नवजात की मौत जन्म के कुछ दिन बाद ही
पुणे के सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेस के अध्ययनकर्ता धमसागर उजगरे और अनीता कर के अनुसार 2017 में 5 साल से छोटे 82,436 हजार बच्चे जन्मजात विकारों की वजह से मारे गए। 37 हजार की मौत जन्म के कुछ दिनों में ही हो गई थी। उसी वर्ष विश्व में 5,01,764 नवजात की मौत जन्मजात विकारों से दर्ज हुई थी। यह रिपोर्ट 1990 से 2017 के दौरान हुई इन मौतों का भी विश्लेषण करती है और बताती है कि इनमें गिरावट बेहद मामूली है।

क्या हैं यह विकार : इनमें दिमाग, रीढ़ व स्पाइनल में कमजोरी पैदा करने वाले न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, थैलेसीमिया, हृदय की बनावट में विकार, डाउन सिंड्रोम और चेहरे व होठों की बनावट में खामी प्रमुख हैं।

इसलिए होते हैं : संगठन के अनुसार यह विकार एक या एक से अधिक अनुवांशिक वजहों, संक्रमण, पोषण की कमी प्रतिकूल पर्यावरण की वजह से हो सकते हैं।

पहचान : गर्भावस्था, प्रसव या उसके बाद भी सामने आ सकते हैं।

बचाव : गर्भवती महिलाएं एक्स-रे से बचें

सावधानी : डब्ल्यूएचओ ने सिफारिश में कहा है कि गर्भवती महिलाएं अनावश्यक दवाओं का सेवन न करें, बहुत जरूरी न हो तो एक्सरे से भी बचें। साफ पर्यावरण में रहें, जहरीली वायु व वातावरण से दूर रहें। गर्भावस्था में शराब, सिगरेट के धुएं और तंबाकू आदि से भी पूरी तरह दूर रहें।

पोषण : गर्भावस्था और सामान्य समय में भी महिलाएं पोषण व जरूरी तत्वों की कमी को दूर करें। फल, सब्जियां, प्रोटीन व विटामिन से भरपूर भोजन लें। फॉलिक एसिड, बी-12, आयरन लेने पर भी खास ध्यान दें।

जांच : यह गर्भावस्था, प्रसव और जन्म के बाद भी करवाई जा सकती है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

जानिए लिवर का कैंसर और उसका इलाज।

जानिए लिवर का कैंसर और उसका इलाज।

लेख विभाग October 31 2021 43347

हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) व्यस्कों में पाया जाने वाला सबसे आम लिवर कैंसर है। भारत में हर साल

'हर घर दस्तक' कार्यक्रम के तहत 31 दिसंबर तक सौ फीसदी कोरोना टीकाकरण का लक्ष्य।

एस. के. राणा December 07 2021 25585

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज बताया कि देश की 85 फीसदी आबादी को कोविड 19 वैक्सीन की कम से कम

सिंगापुर में बुजुर्गों की सेवा के लिए नहीं मिल रहीं नर्सेज

सिंगापुर में बुजुर्गों की सेवा के लिए नहीं मिल रहीं नर्सेज

हे.जा.स. October 07 2022 33413

कुल पंजीकृत नर्सों में सिंगापुर के नागरिकों और वहां स्थायी तौर पर रहने वाली नर्सों की हिस्सेदारी 72

वर्तमान मौसम और कोरोना के प्रति लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत। 

वर्तमान मौसम और कोरोना के प्रति लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत। 

हे.जा.स. July 12 2021 29795

जब हम खांसते, छींकते, बातें करते हैं या गाना गाते हैं तो हमारे मुंह से पानी की बहुत छोटी बूंदें (एरो

खराब फेफड़ों की बीमारी में इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी कारगर: डॉ आकाश पंडिता

रंजीव ठाकुर July 28 2022 69082

आईएनओ की यह थेरेपी पुरानी फेफड़ों की बीमारी (बीपीडी) की रोकथाम में भी मदद करेगी। समय से पहले बच्चे,

गोरखपुर में एकीकृत टीबी अस्पताल की ज़रुरत, वर्तमान टीबी अस्पताल बन सकता है एपेक्स सेंटर

गोरखपुर में एकीकृत टीबी अस्पताल की ज़रुरत, वर्तमान टीबी अस्पताल बन सकता है एपेक्स सेंटर

आनंद सिंह March 25 2022 33323

गोरखपुर में करीब 33 हजार से अधिक टीबी के नए मरीज मिले हैं। इनमें से करीब 50 फीसदी मरीजों का इलाज निज

मेडिकल के PG छात्रों के लिए जिला अस्पतालों में 3 महीने की पोस्टिंग अनिवार्य।

मेडिकल के PG छात्रों के लिए जिला अस्पतालों में 3 महीने की पोस्टिंग अनिवार्य।

अखण्ड प्रताप सिंह November 21 2020 21017

इसका मुख्य उद्देश्य पीजी के इन छात्रों को जिला स्वास्थ्य प्रणाली से रूबरू कराना और जिला अस्पताल में

कोविड के बाद हेल्थ इंश्योरेंस के साथ ओपीडी कवर पॉलिसी लेने का तेजी से बढ़ रहा रुझान

कोविड के बाद हेल्थ इंश्योरेंस के साथ ओपीडी कवर पॉलिसी लेने का तेजी से बढ़ रहा रुझान

रंजीव ठाकुर August 27 2022 30105

कोरोना महामारी की दो भयंकर लहरें देखने के बाद हेल्थ सेक्टर में बड़े परिवर्तन आएं हैं और मेडिकल बीमा क

ब्यूटी के लिए फायदेमंद है वैसलीन

ब्यूटी के लिए फायदेमंद है वैसलीन

आरती तिवारी October 18 2022 30862

ज्यादातर लोग वैसलीन का उपयोग त्वचा व होंठों को मुलायम रखने के लिए करते हैं। लेकिन इसके अलावा भी वैसल

भारत सरकार की मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा

भारत सरकार की मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा 'ई संजीवनी' आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुडी 

विशेष संवाददाता June 03 2022 29220

एबीडीएम के साथ ई-संजीवनी का एकीकरण एक ऐसा उदाहरण है जहां 22 करोड़ एबीएचए धारक ई-संजीवनी के माध्यम से

Login Panel