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लखनऊ। प्रदेश में एंबुलेंस सेवा संचालन की बागडोर निजी कंपनी जीवीकेईएमआरआइ के पास है। कोरोना काल के दौरान घाटा होने के कारण कंपनी ने एंबुलेंस सेवा संचालन करने में असमर्थता जतायी है। अब सरकार ने तय किया है कि एंबुलेंस सेवा का संचालन खुद करेगी। मरीजों को समय पर वाहन उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में ’एंबुलेंस सेवा प्रबंधन दल’ बनेगा।
राज्य के सभी 75 जनपदों में तीन तरह की एंबुलेंस सेवा संचालित हैं। गर्भवती,प्रसूता, नवजात को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है। 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा हैं। तीसरी एंबुलेंस सेवा एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) है। यह वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस है।
तय समझौते के अनुसार कंपनी मरीजों को मुफ्त अस्पताल पहुंचाती है। इसके एवज़ में सरकार कंपनी को उसका भुगतान करती रही है। कोरोना कॉल में एंबुलेंस से मरीजों की अस्पताल में शिफ्टिंग काफी घट गई। इस कारण तय नियमों के आधार पर कंपनी पर जुर्माना लगा दिया गया। ऐसे में कंपनी और सरकार के बीच कागजी युद्ध चलने लगा। कंपनी ने 17 अगस्त 2020 को विभिन्न परिस्थितियों का हवाला देकर सरकार से 60 दिनों में एंबुलेंस हैंडओवर करने का खत लिखा।
राज्य सरकार की सचिव अपर्णा यू ने 19 जनवरी को प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा। इसमें एंबुलेंस सेवा संचालन का पूरा खाका नत्थी किया। एंबुलेंस हैंडओवर व उसके संचालन के लिए 35 बिंदुओं की गाइड लाइन तय की गई है। जिसके नोडल ऑफीसर एसीएमओ होंगे।
जीवीकेई-एमआरआइयू के वाइस प्रेसीडेंट टीवीएस, रेड्डी ने बताया कि कोविड के दौरान मरीज कम मिले। फेरें पूरे नहीं हुए। ऐसे में जुर्माना लगाकर काफी कटाैती कर ली गई। हर माह कोम्पनी को 15 से 20 करोड़ का घाटा हो रहा है। शासन से राहत देने का अनुरोध किया गया। समस्या का समाधान न होने पर एंबुलेंस हैंडओवर करने को कहा। कई बार वार्ता हुई। आश्वसन मिला। मगर, अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।







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