













































आईएमए - एएमएस के वाइस चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत
लखनऊ। कोविड के टीके ने कोरोना संक्रमण की विकट समस्या से समाधान का रास्ता खोल दिया है। टीके के साथ ही सवाल भी उठने लगे हैं। लोगों जानना चाहतें हैं कि यह टीका कब और किसको लगेगा, टीका कितना कारगर है, कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के कोविड टीकाकरण के ब्रांड एम्बेसडर व आईएमए - एएमएस के वाइस चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत ने लोगों की इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास किया है।
कुछ लोगों के टीका लगवाने से घबराने व आगे न आने के सवाल पर डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि देश में जब विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हुआ तो सबसे पहले चिकित्सकों को ही टीका लगाया गया। उन्होंने कहा- “मैंने पहले ही दिन टीका लगवाया और जब से टीका लगवाया है तब से निरंतर ड्यूटी पर आ रहा हूँ और पहले की तरह ही पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रहा हूँ, मुझे कोई भी शारीरिक कष्ट नहीं है।” उनका कहना है कि जिस हाथ में वैक्सीन लगी थी उसमें पहले दो दिन हल्का-फुल्का दर्द था, जो कि अमूमन हर वैक्सीन के लगने के बाद रहता है। इसलिए समुदाय से यही कहना चाहूँगा कि बगैर घबराये या किसी तरह का भ्रम पाले बिना जब भी टीकाकरण की बारी आये तो केंद्र पर जाकर टीका अवश्य लगवाएं।
टीकाकरण के आगे बढ़ने और कब किसको टीका लगेगा के सवाल पर डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि अभी तो यह प्रक्रिया तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण जारी है, दूसरे चरण में पुलिसकर्मियों, राजस्व कर्मियों या कोरोना काल में फ्रंट लाइन में कार्य करने वालों का भी टीकाकरण शुरू किया जा चुका है। तीसरे चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों व गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को टीका लगाया जाएगा। इसके बाद आम लोगों को सुरक्षित बनाने की बारी आ जाएगी। आम लोगों को सरकार की तरफ से इस बारे में सूचना दी जायेगी। सूचना मिलने के बाद ही कोविन एप के जरिये उनका नाम पंजीकृत किया जाएगा ।
मधुमेह व रक्तचाप के मरीजों को वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं के, सवाल पर डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि फिर वही बात कहूंगा कि वैक्सीन से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी को मधुमेह, रक्तचाप, हृदय की समस्या या कोई भी को-मोरबिडिटी है तो उन्हें भी वैक्सीन लेनी है। हालाँकि ऐसे लोगों को इस बात का ध्यान जरूर रखना है कि वह पहले से जो भी दवा ले रहे हों उसे बंद नहीं करना है, उसे उसी तरह लेते रहें जिस तरह वैक्सीन लगने के पहले ले रहे थे।
टीका लगने के बाद भी कोविड प्रोटोकाल के पालन के सम्बन्ध में डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज लगने के दो हफ्ते बाद प्रतिरोधक क्षमता बननी शुरू होती है। इस तरह करीब 42 दिन बाद ही वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है। जब तक हर किसी को वैक्सीन न लग जाए तब तक पहले की भांति ही सभी प्रोटोकाल का पालन करना श्रेयस्कर होगा। वैसे भी जो प्रोटोकाल बताये गए हैं वह किसी को भी कोरोना वायरस के साथ ही कई अन्य संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित बनाते हैं, जैसे- मास्क लगाकर कोरोना वायरस के साथ टीबी या अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने से बच सकते हैं। इसी तरह हाथों की अच्छी तरह से सफाई से पेट सम्बन्धी व संक्रामक बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं । इसलिए इन प्रोटोकाल को अगर व्यवहार में अपना चुके हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं बल्कि सभी की भलाई ही है ।







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