











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। ब्लड कैंसर की दवा रुक्सोलिटिनिब से मरीजों में टीबी पनप सकती है। यह दवा धीमी गति के रक्त कैंसर (प्राइमरी माइलो फाइब्रोसिस) में दिया जाता है। यह तथ्य केजीएमयू हिमेटोलॉजी विभाग के शोध में सामने आया है। इंडियन जर्नल ऑफ ट्यूबरोक्लोसिस में शोध पत्र प्रकाशित हुआ है।
केजीएमयू हिमेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एके त्रिपाठी के निर्देशन में डॉ. अपराजिता सिंह, पूर्व रेजिडेंट डॉ. भूपेंद्र सिंह और डॉ. नीमा तिवारी ने शोध किया है। डॉ. भूपेंद्र के मुताबिक विभाग में हर साल ब्लड कैंसर के करीब 30 से 40 नए मरीज आते हैं। इनमें धीमी गति के रक्त कैंसर वाले मरीजों को रुक्सोलिटिनिब दवा दी जाती हैं। दूसरी कैंसर की दवाएं ऐसे मरीजों पर ठीक से काम नहीं करती हैं।
ब्लड कैंसर के मरीजों में रोगों से लड़ने की ताकत पहले से कम होती है। दवाओं के प्रभाव से मरीज में रोग प्रतिरोधिक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। यह दवा कैंसर में कारगर है पर इससे शरीर का जैक टू पाथ वे ब्लॉक हो जाता है। इससे ब्लड कैंसर में राहत मिलती है पर रोगों से लड़ने की ताकम कम होने से टीबी के बैक्टीरिया आसानी से हमला बोल देते हैं।
डॉ. नीमा तिवारी के मुताबिक रुक्सोलिटिनिब लेने वाले सभी मरीजों को टीबी नहीं होती है। कितने प्रतिशत को होती है, अभी इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। इस पर अधिक शोध की जरूरत है। डॉक्टर रक्त कैंसर पीड़ित में यह दवा चल रहे हैं, खांसी, बुखार व वजन में कमी आने पर तुरंत टीबी की जांच कराएं। रिपोर्ट आने के बाद इलाज की दिशा तय होगी।







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