












































प्रतीकात्मक चित्र
न्यूयॉर्क। वैश्विक भुखमरी का संकट हर मिनट में एक बच्चे को गम्भीर कुपोषण में धकेल रहा है। जिससे बच्चों के अस्तित्व के लिये ख़तरा बढ़ रहा है। संघर्ष प्रभावित 15 देशों में, 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 80 लाख बच्चों को अगर तत्काल पोषण, समृद्ध भोजन व देखभाल उपलब्ध नहीं होते हैं तो गम्भीर कुपोषण से उनकी मौत होने का ख़तरा है। इस प्रकार के बच्चों की संख्या हर मिनट बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने दुनिया भर के देशों को चेतावनी देते हुए कही। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब जर्मनी में जी-7 सम्मेलन (G-7 summit) के लिये तैयारियाँ चल रहीं हैं।
यूनीसेफ़ के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से ही, वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में इज़ाफा हुआ है। इस कारण अतिरिक्त 15 देशों के दो लाख, 60 हज़ार बच्चों पर गम्भीर कुपोषण (severe malnutrition) का ख़तरा मंडराने लगा है। ये बच्चे संकट के सबसे गम्भीर असर का सामना कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में हॉर्न अफ़्रीका (Horn Africa) व मध्य साहेल (Central Sahel) भी शामिल हैं।
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशिका कैथरीन रसैल (Katherine Russell) का कहना है कि भुखमरी की चपेट में आए बच्चों को केवल गेहूँ के थैलों के ज़रिये नहीं बचाया जा सकता। हमें इन बच्चों तक अभी पहुँच बनानी होगी। इससे पहले कि बहुत देर हो जाये, उन तक पोषण और उपचार मुहैया कराना होगा।
यूक्रेन में युद्ध के कारण खाद्यान की कीमतें आसमान छू रहीं हैं। कुछ देशों में जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार सूखे के हालात बने हुए हैं। कोविड-19 ( COVID-19) के दुष्प्रभाव से उपजी आर्थिक परिस्थितियों ने, दुनियाभर में बच्चों से उनकी खाद्य व पोषण सुरक्षा (food and nutritional) छीन ली है। इसके परिणामस्वरूप 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में गम्भीर कुपोषण, आपदा स्तरों पर पहुँच गया है।
1.2 अरब डॉलर की सहायता अपील
यूनीसेफ़ ने इस स्थिति का सामना करने के लिये, सर्वाधिक प्रभावित 15 देशों में अपने सहायता प्रयास तेज़ किये हैं जिसके लिये एक अरब 20 करोड़ डॉलर की सहायता अपील जारी की गई है। यह अपील उस समय जारी की गयी है जब जी-7 (G-7) समूह के देश सम्मेलन की तैयारियों में लगें है।
अहम मदद का अवसर
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशिका कैथरीन रसैल ने कहा कि जर्मनी (Germany) में जी-7 सम्मेलन के लिये एकत्र हो रहे विश्व नेताओं के पास, इन बच्चों को स्वास्थ्य सुरक्षा (health security) मुहैया कराने के लिये एक अच्छा अवसर मौजूद है। समय बिल्कुल भी नहीं गँवाया जा सकता। किसी अकाल की घोषणा की प्रतीक्षा करने का मतलब होगा, बच्चों की मौत होने की प्रतीक्षा करना।







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