











































प्रतीकात्मक
ल्यूकोरिया (Leucorrhoea) या योनि से सफेद पानी का स्राव महिलाओं में आम समस्या है। ल्यूकोरिया को कुछ लोग लिकोरिया (Licoria) नाम से भी पुकारते हैं। आयुर्वेद में ल्यूकोरिया को श्वेत प्रदर कहा गया है। ल्यूकोरिया होने पर महिलाओं के शरीर में इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। आमतौर पर यह परेशानी शादीशुदा महिलाओं को ज्यादा होती है लेकिन ल्यूकोरिया किसी भी उम्र की लड़कियां या महिलाओं को किसी भी उम्र में हो सकता है।
सफेद पानी का निकलना दो प्रमुख कारणों से होता है।
1. स्वाभाविक रूप से
2. बीमारी के कारण
1. स्वाभाविक रूप से
स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से सफेद पानी निकलना प्राय:कुछ मात्रा में होता है। विशेषत: माहवारी (मासिक धर्म) के पूर्व, माहवारी के बाद, अण्डोत्सर्ग (Ovulation)के समय अौर कामेच्छा उद्दिप्त होने पर स्वाभाविक है। इसके लिए कोइ उपचार कि आवश्यकता नहीं होती| समुपदेशन, सही जानकारी देना पर्याप्त है।
2. बीमारी के कारण
श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिआ (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना" स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है। ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है। यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है।
श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण है; या सामान्यतः प्रजनन अंगों में सूजन का बोधक है।
यह महिलाओं कि एक आम समस्या है पीरियड्स से पहले या बाद में एक या दो दिन सामान्य रूप से होती है। ल्यूकोरिया का अर्थ है, महिलाओं की योनि से सफेद, पीले, हल्के नीले या हल्के लाल रंग का चिपचिपा और बदबूदार स्राव का आना। यह स्त्राव अधिकतर सफेद रंग का ही होता है इसलिए इसे श्वेत प्रदर का नाम दिया गया है। अलग-अलग महिलाओं में स्त्राव की मात्रा एवं समयावधि अलग-अलग होती हैं। इसके कारण प्रजनन अंगों में सूजन आ जाती है।
ल्यूकोरिया के सामान्य लक्षण -
ल्यूकोरिया से बचाव के उपचार
अधिक संख्या में महिलाओं को ल्यूकोरिया की समस्या "ट्रिकोमोन्स वेगिनेल्स" नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। इस संक्रामक ल्यूकोरिया की जांच किसी अच्छे महिला रोग विशेषज्ञ से अवश्य करवानी चाहिए, अन्यथा लापरवाही से रोग भयंकर रूप धारण कर सकता है।







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