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एरा के डॉक्टरों ने हृदय की जटिल सर्जरी कर बचाई जान।

पांच जुलाई को मरीज का ऑपरेशन किया गया। पांच घंटे तक चले इस ऑपरेशन में मरीज का एक वाल्व बदला गया और बाईपास सर्जरी से दोनों नसों के ब्लाकेज को दूर किया गया।

एरा के डॉक्टरों ने हृदय की जटिल सर्जरी कर बचाई जान। हृदय का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम।
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रिय योजना आयुष्मान भारत ने एक और गरीब मरीज की जान बचाई है। एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम ने पांच घण्टे की हृदय की जटिल सर्ज़री कर नामुमकिन को मुमकिन बनाया है। एरा ने मुफ्त में बाईपास सर्जरी कर मरीज के दिल का एक वॉल्व बदलकर उसके दो नसों के ब्लॉकेज को दूर किया है।

सतरीक बाराबंकी के 60 वर्षीय मोहम्मद तसव्वुर को चार साल से सांस फूलने की बीमारी थी। बाराबंकी में टू डी इको से पता चला कि उनके एक वाल्व में लीकेज है। इसके बाद मोहम्मद तसव्वुर ने एरा मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल के सीटीवीएस विभाग में डॉ. खालिद इकबाल को दिखाया। डॉक्टर ने जब गहनता से जांच की तो पता चला कि एक वाल्व में लीकेज के अलावा दिल की दो नसों में भी ब्लाकेज है। सीवियर पल्मोनरी आरट्री हाइपरटेंसिव (फेफड़ों का प्रेशर) भी बहुत ज्यादा है। इन जांचों के बाद मरीज ने शहर के कई प्रतिष्ठिïत अस्पतालों में इलाज के लिए संपर्क किया। सभी जगह जटिल सर्जरी और जान का खतरा बताया गया। मोहम्मद तसव्वुर को उनके परिजन फिर ऐरा मेडिकल कॉलेज लाये और ऑपरेशन कराने का फैसला लिया। पांच घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने तसव्वुर को नया जीवन दान दिया। मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है।
एरा मेडिकल कॉलेज के सीटीवीएस विभाग के डॉ. खालिद ने बताया कि मोहम्मद तसव्वुर स्मोकर थे। वो एक दिन में 50 बीडी पी जाया करते थे। उम्र के हिसाब से उनका वजन भी ज्यादा था। उन्होंने बताया कि जब मोहम्मद तसव्वुर हास्पिटल में दिखाने और उनकी जरूरी जांचें की गई तो पता चला कि उनके वाल्व में लीकेज के साथ ही दो नसों में ब्लाकेज भी है। उनके लंग्स का प्रेशर भी बढ़ा हुआ था जिसकी वजह से ऑपरेशन करना बहुत रिस्की था। दो-तीन साल से वह अपनी बीमारी की वजह से परेशान थे। कई प्रतिष्ठिïत अस्पतालों ने ऑपरेशन में बचने की उम्मीद बहुत कम बतायी थी।
डॉ. खालिद ने बताया कि उनकी टीम के लिए ये ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं था। रिस्क के बावजूद मरीज की जान बचाने के लिए पूरी टीम ने कई पहलुओं पर गहन अध्ययन किया। उस अध्ययन के बाद टीम ने ऑपरेशन करने का फैसला लिया। पांच जुलाई को मरीज का ऑपरेशन किया गया। पांच घंटे तक चले इस ऑपरेशन में मरीज का एक वाल्व बदला गया और बाईपास सर्जरी से दोनों नसों के ब्लाकेज को दूर किया गया।
ऑपरेशन के बाद एक दिन तक मरीज को वेंटीलेटर पर रखा गया। इस जटिल ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. खालिद के अलावा डॉ. केपी मल्ल, डॉ. इरशाद वानी भी शामिल थे। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश मे सबसे अधिक सर्जरी करने वालो में एरा मेडिकल कॉलेज एक है। कुछ दिन पहले एरा को केंद्र सरकार के एक संस्था द्वारा एरा को सम्मानित भी किया गया था।

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