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गुवाहाटी। आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा कृत्रिम पैर तैयार किया है, जिसे लगाने के बाद दिव्यांगजन (disabled) पालथी मारकर बैठ सकेंगे और अन्य काम भी आराम से बैठ सकेंगे। इस कृत्रिम पैर की कीमत 25 हजार रुपये होगी। विकसित मॉडल के नमूनों का अभी आखिरी ट्रायल चल रहा है।
आईआईटी गुवाहाटी (IIT Guwahati) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एस. कनगराज ने कहा कि पश्चिमी तकनीक के उत्पाद भारतीय जरूरतों में फिट नहीं बैठते। भारतीय हालात में पालथी या चौकड़ी लगाकर बैठना, शौच में बैठना आदि मुख्य जरूरत हैं। पश्चिमी पैर से दुर्गम इलाकों में व्यक्ति का संतुलन नहीं बनता और हमेशा गिरने का खतरा बना रहता था।
इसी कारण नए पैर की जरूरत पड़ी। प्रो. कनकराज के मुताबिक, उनकी टीम द्वारा विकसित पैर में घुटने के जोड़ (knee joint) में स्प्रिंग आधारित तंत्र है। यह भारतीय शौचालय प्रणाली के अधिक आराम से उपयोग में मदद करता है। पालथी या चौकड़ी लगाकर बैठने में भी सहायता देता है। लॉकिंग तंत्र अपरिचित इलाके में चलने के दौरान गिरने का भय कम करता है। इस पैर का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानक (international standard) के अनुसार किया गया है। यह शरीर का सौ किलो तक वजन सह सकता है।







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