











































प्रतीकात्मक
जयपुर। बीते दिनों एक मरीज की मौत का जिम्मेदार ठहराए जाने और पुलिस द्वारा भादवि की धारा 302 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज़ करने से आहात डॉक्टर अर्चना शर्मा को ने आत्महत्या (suicide) कर ली थी। पूरे देश में डॉक्टरों का विरोध देखते हुए राजस्थान प्रदेश सरकार ने दौसा के एसपी को हटाने के आदेश दे दिए हैं और दो अन्य पुलिस अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की ।
मामला राजस्थान के दौसा (Dausa) का है जहां 42 वर्षीय डॉ अर्चना शर्मा (Dr Archana Sharma) अपने पति के साथ मिलकर एक निजी अस्पताल चलाती थीं। वो उसी अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynecologist) के रूप में काम भी करती थीं। रविवार 27 मार्च की रात उनके अस्पताल में प्रसव पीड़ा से गुजर रही एक 22 वर्षीय महिला को लाया गया था। लेकिन प्रसव कक्ष में इलाज के दौरान ही महिला की स्थिति ज्यादा खराब हो गई और उसकी मौत हो गई। उसके बाद उसके रिश्तेदारों ने उसकी मौत के लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया और लापरवाही का आरोप लगाया।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर अर्चना शर्मा ने सुसाइड नोट (Suicide note) में लिखा है कि पीड़ित महिला की मौत एक्यूट पोस्टपार्टम हैमराज (PPH) नाम की अवस्था से हुई थी, जिसमें प्रसव के दौरान बहुत ज्यादा खून बह जाता है। उन्होंने लिखा, "मैं अपने पति और बच्चों से बहुत प्यार करती हूं। कृपया मेरी मौत के बाद उन्हें परेशान न करें। मैंने कोई गलती नहीं की और किसी की जान नहीं ली।
मामले के तूल पकड़ने के बाद बुधवार 30 मार्च को राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) ने एक बैठक बुलाई जिसमें इस मामले से संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। डॉक्टरों के बचाव में सरकार गहलोत ने दौसा के एसपी अनिल कुमार को हटाने, लालसोट पुलिस स्टेशन के एसएचओ अंकेश कुमार के निलंबन और वहीं के डीएसपी शंकर लाल को तैनाती आदेश के इंतजार में डाल देने के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्विटर पर लिखा कि हम सभी डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देते हैं। हर डॉक्टर मरीज की जान बचाने के लिए अपना पूरा प्रयास करता है परंतु कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होते ही डॉक्टर पर आरोप लगाना न्यायोचित नहीं है" गहलोत ने यह भी लिखा, "अगर इस तरह डॉक्टरों को डराया जाएगा तो वे निश्चिंत होकर अपना काम कैसे कर पाएंगे।
हम सभी को सोचना चाहिए है कि कोविड महामारी या अन्य दूसरी बीमारियों के समय अपनी जान का खतरा मोल लेकर सभी की सेवा करने वाले डॉक्टरों से ऐसा बर्ताव कैसे किया जा सकता है" उन्होंने त्वरित कार्रवाई के अलावा मामले में प्रशासनिक जांच के भी आदेश दिए हैं। इसके अलावा शर्मा को "आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई" करने के भी आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, "इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने, आवश्यक सुझाव देने हेतु अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा, पुलिस व विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा चिकित्सक शामिल होंगे"।







हुज़ैफ़ा अबरार May 12 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार May 07 2026 0 350
हुज़ैफ़ा अबरार May 03 2026 0 259
हुज़ैफ़ा अबरार May 12 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3808
एस. के. राणा January 13 2026 0 3780
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3661
एस. के. राणा January 20 2026 0 3626
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3332
एस. के. राणा February 01 2026 0 3024
एस. के. राणा February 04 2026 0 2863
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86287
सौंदर्या राय April 08 2022 0 33888
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37131
सौंदर्या राय April 05 2022 0 34909
लेख विभाग March 19 2022 0 34314
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71573
टीबी से पीड़ित महिलाएं बांझपन का शिकार हो रही हैं। एम्स में हर साल 3 हजार से अधिक महिलाएं उपचार करवा
अपोलोमेडिक्स की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रांजलि सक्सेना के मुताबिक़ यह कोविड होने के बाद बच्चों में होने
यदि थायराइड हार्मोन पर्याप्त न हो, तो शरीर के बहुत से कार्य की गति धीमी हो जाती है। अंडरएक्टिव थायरॉ
बीपीकॉन 2022, पूरे देश से डॉक्टर्स यहाँ आएं हैं और हाइपरटेंशन को लेकर मंथन हो रहा है। आगरा से आए डॉ
उपचार में उपहार को लेकर डॉक्टर्स और दवा व्यापारी आमने-सामने है। अब इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना
फाइजर ने कहा कि उसकी एक्सपेरिमेंटल कोविड-19 टेबलेट ओमिक्रोन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी प्रतीत होती है।
मंत्री भारती पवार ने कहा, ‘‘ 26 जुलाई, 2021 तक कुल 3.83 लाख ऐसे लोगों का कोविन के जरिए टीकाकरण किया
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि 2,00,000 टन से अधिक चिकित्सा अपशिष्ट दुनिया भर में कोरोना वायरस महामारी के परिण
52 वायल जम गई थीं जिन्हें हटाकर दूसरी वैक्सीन मंगाई गई। वैक्सीन की खराबी की जांच के लिए दो सदस्यीय ज
बदले मौसम के कारण ज्यादातर केस वायरल बुखार के आ रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सक डाॅक्टर सर्वेश

COMMENTS