











































प्रतीकात्मक चित्र डॉ रणदीप गुलेरिया
नयी दिल्ली। एम्स दिल्ली को एक बार फिर से विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके एक मास्टर प्लान सरकार को सौंप दिया गया है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य रोगियों की देखभाल में बढ़ोत्तरी करना, शिक्षण तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ बुनियादी ढांचे को फिर से विकसित करना है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Delhi) दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria) ने कहा कि सस्थान को पुनः विकसित करने के लिए मास्टर प्लान सरकार को सौंप दिया गया है। केंद्र सरकार (Central Government) ने एक 'चिंतन शिविर' आयोजित करने का फैसला किया है, जो मुख्य रूप से देश भर में एम्स के कामकाज में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेगा।
75वें स्वतंत्रता दिवस (75th Independence Day) के मौके पर एम्स की फेकल्टी और प्रशासनिक कर्मचारियों और डॉक्टरों को संबोधित करते हुए डॉ गुलेरिया ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत 50 नए ऑपरेशन थिएटर (new operation theatres), 300 नए इमरजेंसी बेड (new emergency beds) और 3000 से अधिक नए बेड का प्रस्ताव है।
नए प्रोजेक्ट के माध्यम से रिसर्च लैब्स (research labs), एनिमल फैसिलिटीज, क्लीनिकल ट्रायल (clinical trial) फैसिलिटीज, 4000 हॉस्टल यूनिट्स और 14000 पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा मस्जिद मोठ, अंसारी नगर पश्चिम, अंसारी नगर पूर्व, ट्रॉमा सेंटर के पांच अलग-अलग भूखंडों को भी चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) और अनुसंधान विश्वविद्यालय (Research University) की एक नई कैटेगरी के तहत एकीकृत किया गया है, जो इस परिसर को और अधिक लचीलापन देगा।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि स्वतंत्रता के 76वें वर्ष पर एम्स समग्र परिवर्तन के एक नए युग में प्रवेश करेगा, जहां न केवल हमारा भौतिक बुनियादी ढांचा बल्कि हमारी डिजिटल रीढ़ और संपत्ति भी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ संस्थान से मेल खाने के लिए बनाई जाएगी।







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