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नई दिल्ली। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर ने एक शोध के आधार पर यह दावा किया है कि कोरोना महामारी से हुई मौतों का असल आंकड़ा सरकारों द्वारा जारी आंकड़ों से दो से चार गुना तक ज्यादा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से 55 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नेचर में प्रकाशित एक नए शोध में दावा किया गया है कि मौतों की वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है।
दुनियाभर में बहस जारी है कि क्या विभिन्न देश विश्व मंच पर अपनी बदनामी व छवि खराब होने के डर से कोविड-19 की मृत्यु दर को छिपाते हैं? नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट में लंदन में 'द इकोनॉमिस्ट' पत्रिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके व आंकड़ों के आधार पर यह दावा किया है। नेचर ने दावा किया कि कोविड-19 से वास्तविक मौतें सरकारी आंकड़ों से दो और चार गुना अधिक हो सकती हैं।
नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट एक मशीन आधारित प्रक्रिया पर केन्द्रित है। इसमें संग्रहित आंकड़ों के आधार पर मौतों को लेकर यह अनुमान जताया गया है। इस शोध में दुनियाभर के देशों द्वारा कोविड-19 के शिकार लोगों की सूचना देने के तरीकों का उदाहरण देकर यह दावा किया गया है। जैसे कि नीदरलैंड्स में महामारी के आरंभिक दिनों में केवल उन्हीं लोगों को कोविड से मृत माना गया, जिन्हें संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहां उनकी मौत हुई। दूसरी ओर बेल्जियम में सर्दी के शिकार लोगों की मौत को भी बगैर टेस्ट के कोविड-19 से मौत माना गया।
नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कोरोना मौतों के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का पहला आकलन जल्द आने वाला है। संगठन ने कोरोना से हुई मौतों की असल संख्या पता लगाने के लिए कई विशेषज्ञों की राय ली है। इन आंकड़ों की पांच साल पहले के मौतों के आंकड़ों से तुलना की जाएगी।







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