











































प्रतीकात्मक चित्र
अक्सर गैस्ट्रोएंटेराइटिस के लक्षणों को लंबे समय तक नज़रअंदाज कर दिया जाता है लेकिन जब तापमान बढ़ रहा हो तो बुखार और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रीजेंसी सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉक्टरों ने कहा कि अगर ये स्थिति शुरुआत में ही ठीक नहीं की गई तो गैस्ट्रोएंटेराइटिस के परिणामस्वरूप किडनी फेल हो सकती है और कुछ मामलों में दिल का दौरा भी पड़ सकता है।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस (gastroenteritis) की स्थिति के दौरान, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (gastrointestinal tract) की सूजन होती है, जो आम वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी (common viruses, bacteria and parasites) के कारण होती है। उल्टी, पेट दर्द और कभी-कभी बुखार के साथ दस्त इसके सामान्य लक्षण हैं।
डॉ प्रवीण झा, एमडी, डीएम, कंसलटेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रीजेंसी सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ (Consultant Gastroenterology, Regency Super-Specialty Hospital) ने कहा, “कभी-कभी हल्के से मध्यम गैस्ट्रोएंटेराइटिस से पीड़ित रोगी की ओर से लापरवाही और अज्ञानता के परिणामस्वरूप गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं, खासकर जब मौसम की स्थिति बदल रही हो और गरमी बढ़ रही हो। यदि एक स्वस्थ व्यक्ति गैस्ट्रोएंटेराइटिस से हो जाए तो उनको प्री-रीनल फेलियर हो सकता है । तीव्र दस्त गंभीर डिहाइड्रेशन का कारण बनता है, जो बदले में शरीर में रक्त परिसंचरण (सर्कुलेशन) को कम करता है। इसके परिणामस्वरूप लो ब्लड प्रेशर हो सकता है। रक्त के प्रवाह में कमी के कारण, गुर्दे सुस्त हो जाते हैं और यहां तक कि किडनी फेल भी हो सकती है। जो लोग पहले से ही किसी दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें भी विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। हमारे ओपीडी में गैस्ट्रोएंटेराइटिस की अज्ञानता के कई गंभीर मामले सामने आ रहे है।’’
अक्सर उल्टी और दस्त (vomiting and diarrhea) के कारण शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो जाती है। जटिलताओं से बचने के लिए इसे तरल पदार्थों के माध्यम से प्रारंभिक चरण में ही सावधान रहना चाहिए।
डॉ अनुराग मिश्रा, एमडी, डीएम, कंसलटेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रीजेंसी सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने कहा कि गैस्ट्रोएंटेराइटिस को घर पर आसानी से ठीक किया जा सकता है यदि स्थिति हल्की है, जिसके लिए बहुत अधिक आराम और काफी सारा पानी और ऐसे चीज़े खाने की आवश्यकता होती है जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो । हालत में सुधार नहीं होने पर अमरीज को उपचार में एंटीबायोटिक्स (antibiotics) देने की आवश्यकता होती है। मरीज को उपचार में एंटीबायोटिक्स (antibiotics) देने की आवश्यकता होती है।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस के रोगी (Gastroenteritis patient) को ऐसी चरम स्थितियों में कुछ सावधानियों का पालन करना चाहिए -







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